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पश्चिमी एशिया: जॉर्डन में तख्ता पलट की कोशिश नाकाम होने से अमेरिका को राहत
Sun, 04 Apr 2021 08:32 PM IST
गौरव पाण्डेय
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, अमान
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, अमान
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sun, 04 Apr 2021 08:32 PM IST
सार
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में शाह अब्दुल्ला को अपना मुख्य सहयोगी बताते हुए उनके लिए अपने पूरे समर्थन का एलान किया। साथ ही कहा कि अमेरिका आ रही खबरों पर नजर रख रहा है और जॉर्डन के अधिकारियों से संपर्क में है।
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जॉर्डन का ध्वज
- फोटो : पिक्साबे
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विस्तार
जॉर्डन में तख्ता पलट की कोशिश नाकाम हो जाने से अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने राहत की सांस ली है। अगर शाह अब्दुल्ला का तख्ता पलटने की कोशिश कामयाब हो जाती, तो पश्चिमी एशिया में नए समीकरण बनने की संभावना पैदा हो सकती थी। लेकिन जॉर्डन के सुरक्षा बलों ने कई प्रमुख लोगों को गिरफ्तार कर ये कोशिश नाकाम कर दी।
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जो लोग गिरफ्तार किए गए हैं, उनमें पूर्व युवराज हमजा बिन हुसैन भी शामिल हैं। उनके अलावा भी शाही परिवार के कई सदस्यों को हिरासत लिया गया है। हालांकि सुरक्षा बलों की तरफ प्रिंस हमजा के बारे में आधिकारिक रूप से यही कहा गया है कि उन्हें घर पर ही रहने और ऐसी गतिविधियों में शामिल न होने को कहा गया है, जिनसे जॉर्डन में स्थिरता और देश की सुरक्षा खतरे में पड़े। बाकी लोगों के बारे में आधिकारिक बयान में कहा गया कि उनकी गतिविधियों की जांच के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया है। सेना ने कहा है कि इस जांच के निष्कर्षों को जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा।
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जॉर्डन में असामान्य गतिविधियों के संकेत शनिवार को मिलने लगे। इसे देखते हुए इस क्षेत्र में शाह अब्दुल्ला के समर्थक देशों ने तुरंत उनके प्रति अपना समर्थन जताया। सऊदी अरब ने कहा कि शाह अब्दुल्ला बिन अल हुसैन और युवराज हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय के तमाम फैसलों और सुरक्षा एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए उनके कदमों का वह पूरा समर्थन करता है। सऊदी अरब के अलावा यूएई, मिस्र, बहरीन और कुवैत ने भी शाह अब्दुल्ला को पूरा समर्थन दिया है। फिलस्तीनी प्राधिकार के अध्यक्ष महमूद अब्बास और लेबनान के मनोनीत प्रधानमंत्री साद अल- हरीरी, और खाड़ी देशों के संगठन खाड़ी सहयोग परिषद ने भी शाह अब्दुल्ला के प्रति अपने समर्थन का एलान किया। गौरतलब है कि ये सभी अमेरिका के समर्थक सुन्नी देश हैं।
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अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने एक बयान में शाह अब्दुल्ला को अपना मुख्य सहयोगी बताते हुए उनके लिए अपने पूरे समर्थन का एलान किया। साथ ही कहा कि अमेरिका आ रही खबरों पर नजर रख रहा है और जॉर्डन के अधिकारियों से संपर्क में है। विश्लेषकों का मानना है कि इन प्रतिक्रियाओं का असर जॉर्डन में देखा गया। पश्चिम एशिया में अमेरिकी समर्थन काफी अहमियत रखता है। अमेरिका और उसके खेमे के देशों ने तुरंत शाह अब्दुल्ला को समर्थन दिया। उससे देश की सेना और बाकी अधिकारियों ने संदेश ग्रहण किया।
गौरतलब है कि शाह अब्दुल्ला 1999 से सत्ता में हैं। तब उन्होंने अपने पिता शाह हुसैन की मृत्यु के बाद सत्ता संभाली थी। पूर्व युवराज हमजा बिन हुसैन भी शाह हुसैन के ही बेटे हैं। उनका जन्म शाह हुसैन की अमेरिका में जन्मी पत्नी बेगम नूर के बेटे हैं। हमजा शाह हुसैन के सबसे बड़े बेटे हैं, इसलिए उनका दावा राजा बनने पर था। लेकिन अमेरिकन मां से पैदा होने के कारण उन्हें गद्दी नहीं मिली। यह उनके छोटे सौतेले भाई अब्दुल्ला को मिली। बताया जाता है कि तब से हमजा असंतुष्ट रहे हैं। इस बार उन्होंने जबरन शाह अब्दुल्ला को हटा कर शाह बनने की कोशिश की। लेकिन ये कोशिश शाह अब्दुल्ला के वफादार अफसरों ने नाकाम कर दी है।
विश्लेषकों के मुताबिक इससे पश्चिम एशिया क्षेत्र में नई राजनीतिक अस्थिरता पैदा होने की संभावना फिलहाल खत्म हो गई है। इससे इस क्षेत्र के सुन्नी देशों और अमेरिका ने राहत की सांस ली है।