फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   America: Pentagon Spokesperson John Kirby says Quad existence is not just to compete with China, it has many consequences

अमेरिका : पेंटागन ने कहा- क्वाड का अस्तित्व सिर्फ चीन से मुकाबला करने के लिए नहीं, इसके और भी आयाम हैं

Sat, 02 Oct 2021 06:06 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Published by: Kuldeep Singh Updated Sat, 02 Oct 2021 06:06 AM IST
सार

पेंटागन प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, क्वाड के बहुत सारे नतीजे हैं और सभी का चीन से कोई नाता नहीं है। ऐसा नहीं है कि क्वाड का वजूद सिर्फ चीन या उसके प्रभाव का मुकाबला करने के लिए है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच अहम समुद्री मार्गों को किसी भी प्रभाव से मुक्त रखने के लिहाज से एक नई रणनीति के तहत नवंबर 2017 में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने क्वाड की स्थापना के प्रस्ताव को आकार दिया था।
 

विज्ञापन
America: Pentagon Spokesperson John Kirby says Quad existence is not just to compete with China, it has many consequences
QUAD countries leaders - फोटो : PTI

विस्तार

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के मुख्यालय पेंटागन ने कहा कि संसाधन बहुल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता और बल प्रयोग की प्रकृति क्वाड देशों के बीच अक्सर चर्चा का विषय रही है। पेंटागन प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, क्वाड के बहुत सारे नतीजे हैं और सभी का चीन से कोई नाता नहीं है। ऐसा नहीं है कि क्वाड का वजूद सिर्फ चीन या उसके प्रभाव का मुकाबला करने के लिए है।

विज्ञापन


सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के बीच अहम समुद्री मार्गों को किसी भी प्रभाव से मुक्त रखने के लिहाज से एक नई रणनीति के तहत नवंबर 2017 में भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया ने क्वाड की स्थापना के प्रस्ताव को आकार दिया था।
विज्ञापन


चीनी आक्रामकता, बलप्रयोग रहा हर क्वाड बैठक के एजेंडे में शामिल
पेंटागन के प्रेस सचिव ने कहा, जाहिर है हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन क्या कर रहा है? जिस आक्रामकता या बलप्रयोग के जरिये वह अपने दावों को पेश करने की कोशिश करता है, निश्चित रूप से यह क्वाड में हमारे सभी सहयोगियों तथा भागीदारों के साथ लगातार चर्चा का एक विषय रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


किर्बी ने कहा, क्वाड व्यवस्था हमें सभी प्रकार की पहलों पर बहुपक्षीय रूप से काम करने का शानदार मौका देती है, जो हमें वास्तव में एक स्वतंत्र व खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र बनाने में मदद कर सकती है। क्वाड देश इस क्षेत्र के लिए मिलकर आगे आए हैं।  इसमें काफी कुछ है और हर चीज का चीन से नाता नहीं है। 

ऑकस : ईयू ने ऑस्ट्रेलिया से ट्रेड वार्ता 1 माह स्थगित की
यूरोपीय संघ (ईयू) ने हाल ही में स्थापित ऑकस गठबंधन के तहत ऑस्ट्रेलिया-अमेरिका में पनडुब्बी करार पर राजनयिक विवाद के बीच ऑस्ट्रलिया से मुक्त व्यापार समझौते पर होने वाली वार्ता एक माह के लिए स्थगित कर दी है। 12वें दौर की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होने वाली यह बातचीत अक्तूबर में निर्धारित थी जो अब नवंबर में होगी।

बीजिंग से अपने तरीके से निपटेगा भारत

विदेश मंत्री जयशंकर ने शुक्रवार को कहा, चीन से जुड़े घटनाक्रम से निपटने के लिए भारत के पास द्विपक्षीय विकल्प समेत कई रास्ते हैं। इस संबंध में हम अपने हितों के हिसाब से प्रतिक्रिया देंगे।

अमेरिका-भारत सामरिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेशमंत्री ने कहा, चीन के बारे में हम सभी को विचार करना है तथा हममें से सभी के चीन के साथ समग्र संबंध हैं। कई मायनों में चीन आज एक बड़ा खिलाड़ी देश है।

उन्होंने कहा कि ऐसे में हमारी समस्या या हमारे अवसर वैसे नहीं हो सकते हैं, जैसे अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया, जापान या इंडोनेशिया या फ्रांस के होंगे। ये हर देश के लिए अलग-अलग होंगे और चीन से जुड़े मसलों का अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर बहुत प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में हमें अपने हितों के अनुरूप मूल्यांकन करना है और प्रतिक्रिया देनी हैं। 
 

क्वाड किसी देश के खिलाफ नहीं

क्वाड पर चीन की प्रतिक्रिया पर विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की सहभागी वाला गठबंधन क्वाड किसी देश के खिलाफ नहीं है और किसी तरह की गुटबंदी और नकारात्मक पहल के तौर पर इसे नहीं देखा जाना चाहिए।

तालिबान संग करार से पहले भारत को भरोसे में नहीं लिया
अफगानिस्तान के हालात पर जयशंकर ने अमेरिका पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, दोहा में तालिबान के साथ करार के संबंध में अमेरिका ने इस समझौते के कई आयामों को लेकर भारत को भरोसे में नहीं लिया। विदेश मंत्री ने कहा, भारत के लिए प्रमुख चिंता यह है कि क्या अफगानिस्तान में समावेशी सरकार होगी और उस देश की सरजमीं का इस्तेमाल किसी दूसरे देश या बाकी दुनिया के खिलाफ आतंकवाद के लिए तो नहीं किया जाएगा।

उन्होंने कहा, भारत काबुल की नई सरकार को मान्यता देने के लिए जल्दबाजी में नहीं है। पूर्व अमेरिकी राजदूत फ्रैंक बाइजनर के साथ संवाद सत्र में विदेश मंत्री का कहना था कि अफगानिस्तान से जुड़े मसलों पर भारत-अमेरिका की सोच काफी हद तक समान है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed