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Wheat Export Ban : भारत के गेहूं निर्यात बंद करने के फैसले का अमेरिका ने किया विरोध, तो बचाव में उतरा चीन, कहा-दोष देने से समाधान नहीं
Tue, 17 May 2022 06:04 PM IST
सुरेंद्र जोशी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन/नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 17 May 2022 06:04 PM IST
सार
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने कहा कि भारत के साथ सुरक्षा परिषद में इस पर विचार होगा। उम्मीद है कि भारत रोक हटाने पर पुनर्विचार करेगा। वहीं चीन ने कहा है कि भारत जैसे विकासशील देशों को दोष देने से संकट का समाधान नहीं होगा।
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संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड
- फोटो : twitter
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विस्तार
घरेलू बाजार में कीमतें बढ़ने के कारण भारत द्वारा गेहूं निर्यात पर लगाई गई पाबंदी का अमेरिका ने विरोध किया है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस ग्रीनफील्ड ने आशंका जताई है कि भारत के कदम से विश्व में खाद्य संकट बढ़ सकता है। वहीं, इस बीच चीन ने इस मामले पर भारत का बचाव किया है। इस बीच, भारत सरकार ने आज गेहूं के निर्यात पर पाबंदी के आदेश में मामूली ढील दे दी।
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ग्रीनफील्ड ने कहा कि हमने गेहूं निर्यात पर रोक को लेकर भारत के फैसले की रिपोर्ट देखी है। हम विभिन्न देशों को निर्यात को प्रतिबंधित नहीं करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, क्योंकि हमें लगता है कि निर्यात पर किसी भी पाबंदी से खाद्यान्न की और ज्यादा कमी हो जाएगी। भारत के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इस पर विचार होगा। उम्मीद है कि भारत रोक हटाने पर पुनर्विचार करेगा।
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अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत सुरक्षा परिषद की हमारे द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल होगा और हमें उम्मीद है कि वह अन्य देशों द्वारा जताई जा रही चिंता को देखते हुए अपने फैसले पर फिर से विचार करेगा।
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चीन ने किया भारत का बचाव
भारत के गेहूं के निर्यात को बंद करने के फैसले को लेकर जी-7 देशों की आलोचना के बाद चीन ने भारत के बचाव में आया है। इस मामले में भारत का बचाव करते हुए चीन ने रविवार को कहा था कि भारत जैसे विकासशील देशों को दोष देने से वैश्विक खाद्य संकट का समाधान नहीं होगा।
मीडीया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अब जी-7 के कृषि मंत्री भारत से गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध नहीं लगाने का आग्रह करते हैं, तो जी-7 देश स्वयं अपने निर्यात में वृद्धि करके खाद्य बाजार की आपूर्ति को स्थिर करने के लिए आगे क्यों नहीं बढ़ेंगे?
बता दें, भारत सरकार ने गत दिनों बड़ा फैसला लेते हुए गेहूं के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। गेहूं को निर्यात की प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि देश की खाद्य सुरक्षा के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। साथ ही पड़ोसी देशों और गरीब देशों को समर्थन करने के लिए भी ऐसा करना जरूरी था।
13 मई के पूर्व कस्टम्स की मंजूरी प्राप्त गेहूं निर्यात की छूट
मंगलवार को केंद्र सरकार ने गेहूं निर्यात पर रोक के आदेश में मामूली ढील दे दी। सरकार ने निर्यात के लिए 13 मई के पहले कस्टम्स परीक्षण के लिए सौंपी गई या पंजीकृत गेहूं की खेपों को निर्यात की इजाजत दी जाएगी।
कीमतों में हुआ भारी इजाफा, अब गिरावट
गौरतलब है कि रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग से पूरी दुनिया में गेहूं की कीमतों में जोरदार इजाफा हुआ था। भारत में भी घरेलू स्तर पर गेहूं की कीमत बढ़ी है, निर्यात पर रोक के बाद कीमतें नीचे आने लगी हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक। देश ने वित्त वर्ष 2021-22 कुल 70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया, जबकि बीते अप्रैल महीने की बात करें तो भारत ने रिकॉर्ड 14 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है।
सरकारी खरीदी अब 31 मई तक
केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं खरीद की समय सीमा बढ़ाकर 31 मई कर दी है। केंद्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल ने आदेश की प्रति ट्वीट करते हुए इस बात की घोषणा की। अब किसानों को एमएसपी पर गेहूं बेचने के लिए 15 दिनों का और समय मिल गया है। इस साल अनुकूल मौसम के कारण रबी फसल की उपज अच्छी हुई है। लेकिन देश के कई हिस्सों में गेहूं की जबर्दस्त उपज के बाद भी किसान तय समय सीमा तक अपनी फसल नहीं बेच पाने की वजह से कुछ दिनों से परेशान थे। इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इस कीमत पर अब देश के करोड़ों किसान 31 मई तक गेहूं की बिक्री कर सकेंगे।
वहीं, गेहूं की उपलब्धता को लेकर वाणिज्य सचिव सुब्रह्मण्यम ने भी बयान दिया है। उनका कहना है कि भारत की खाद्य सुरक्षा के अलावा, भारत सरकार पड़ोसियों और कमजोर देशों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि गेहूं निर्यात पर नियंत्रण आदेश तीन मुख्य उद्देश्यों को पूरा करता है। यह देश के लिए खाद्य सुरक्षा के साथ ही, संकट में अन्य लोगों की मदद करने और आपूर्तिकर्ता के रूप में भारत की विश्वसनीयता भी बनाए रखता है।