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एच-1बी वीजा : विदेशी कर्मियों से संबंधित सख्त विधेयक पेश

Fri, 05 Mar 2021 02:22 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Fri, 05 Mar 2021 02:22 AM IST
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America H-1B Visa News three Republican lawmakers introduced Strict bill related to foreign workers
एच1बी वीजा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में तीन सांसदों ने एच-1बी वीजा को लेकर एक विधेयक पेश किया है जिसमें नियोक्ताओं को अमेरिकी कर्मचारियों के बजाय विदेशी कर्मियों को अधिक भुगतान देने की बात शामिल है। रिपब्लिकन सांसदों द्वारा पेश इस बिल में उन नियोक्ताओं को एच-1बी धारी विदेशी कर्मियों को नौकरी पर रखने से रोकने की बात है जिन्होंने अमेरिकी कर्मचारियों को हाल में लंबी छुट्टी पर भेज दिया है।

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इस विधेयक में उन विदेशी कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है जिन्हें उनके नियोक्ता लंबी छुट्टी पर भेजना चाहते हैं। रिपब्लिकन पार्टी के सांसद एमओ ब्रूक्स, मैट गाऐट्ज और लांस गूडेन की ओर से पेश ‘अमेरिकंस जॉब्स फर्स्ट एक्ट’ में आव्रजन और राष्ट्रीयता कानून में आवश्यक बदलाव करके एच-1बी वीजा कार्यक्रम में बड़े बदलाव का प्रस्ताव है।
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बता दें कि पूर्व रिपब्लिकन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसी तरह का कानून लाकर विदेशियों के बजाय देश में रोजगार बढ़ाना चाहते थे। तीन सांसदों द्वारा पेश नए मसौदे के अनुसार विदेशी कर्मी को तब तक एच-1बी का दर्जा नहीं दिया जा सकता जब तक नियोक्ता श्रम मंत्री के समक्ष यह आवेदन न सौंप दे कि वह एच-1बी वीजा धारक को अमेरिकी नागरिक या कानूनन स्थायी नागरिक कर्मी को मिलने वाले सालाना वेतन से अधिक वार्षिक पारिश्रमिक की पेशकश कर रहा है।
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आफत : नियोक्ताओं पर होगी सख्ती
विधेयक पेश करते हुए एमओ ब्रूक्स ने कहा, अमेरिकन जॉब्स फर्स्ट एक्ट आवश्यक सुधार लाएगा और एच1बी वीजा कार्यक्रम को देखेगा। यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी कर्मचारियों को उनके अपने ही देश में और नुकसान नहीं उठाना पड़े। उन्होंने कहा, विदेशी कर्मचारियों के कम वेतन में उपलब्ध होने जैसा लालच खत्म करने के लिए बिल में यह व्यवस्था की गई है कि नियोक्ताओं को किसी भी एच1बी कर्मचारी को न्यूनतम 1,10,000 डॉलर देना होगा। इसके अलावा कंपनी नियोक्ता विदेशी कर्मचारियों को रखने के बाद कम से कम दो साल तक बिना कारण अमेरिकी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाल सकेंगी।


भारतीयों के बीच सर्वाधिक मांग
भारतीय मूल के आईटी पेशवरों में एच-1बी वीजा की सर्वाधिक मांग रहती है। यह गैर-आव्रजक वीजा है जो अमेरिकी कंपनियों को उन विशेषज्ञता वाले पदों पर विदेशी कार्मिकों की नियुक्ति का अधिकार देता है जिनमें तकनीकी विशेषज्ञता जरूरी होती है। प्रौद्योगिकी कंपनियां इस वीजा प्रणाली के आधार पर हर वर्ष भारत और चीन जैसे देशों से हजारों कर्मियों की भर्ती करती हैं।

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