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US: हिंद-प्रशांत सहयोगी देशों को अमेरिका ने किया आगाह, रक्षा मंत्री बोले- चीन का खतरा बेहद नजदीक
Sat, 31 May 2025 12:58 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगापुर
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 31 May 2025 12:58 PM IST
सार
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र के सहयोगी देशों से भी अपील की कि वे भी अपने बजट का 5 फीसदी रक्षा क्षेत्र पर खर्च करें।
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पीट हेगसेथ, अमेरिकी रक्षा मंत्री
- फोटो : X / @SecDef
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विस्तार
अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शनिवार को अपने एक बयान में कहा कि अमेरिका हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ है और चीन की आक्रामकता की स्थिति में उन्हें अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका हिंद प्रशांत क्षेत्र के सहयोगी देशों के साथ रक्षा संबंधों को मजबूत करेगा।
ताइवान पर कब्जे की तैयारी कर रहा चीन
सिंगापुर में वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन शंगरी-ला डायलॉग में बोलते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री के निशाने पर खासतौर पर चीन रहा और उन्होंने ताइवान के खिलाफ चीन की आक्रामकता का भी जिक्र किया। चीन द्वारा लगातार युद्धाभ्यास किया जा रहा है और उसके युद्धाभ्यास में ताइवान को ब्लॉक करने का अभ्यास किया जा रहा है। चीन, ताइवान के हवाई और समुद्री क्षेत्र का भी लगातार उल्लंघन कर रहा है। चीन, ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, वहीं ताइवान खुद को आजाद देश कहता है। हेगसेथ ने सिंगापुर में कहा कि 'चीन की सेना युद्ध की तैयारियों में लगी है और हम इसे चाशनी में लपेटकर नहीं बताना चाहते। चीन का खतरा असली है और ये बेहद नजदीक भी है।'
ये भी पढ़ें- Brigitte Macron: कैसा है फ्रांस के राष्ट्रपति की 72 वर्षीय पत्नी का जीवन; खुद हारीं पार्षद का चुनाव, पति को...
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सहयोगी देशों से रक्षा बजट बढ़ाने की अपील
चीन ने कहा है कि उसका लक्ष्य है कि साल 2027 तक ताइवान पर कब्जा करना है। इसके लिए चीन ने दक्षिण चीन सागर में एक कृत्रिम द्वीप बनाया है, जहां नई सैन्य चौकियां बनाई जा रही हैं और साथ ही वहां पर आधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलें भी तैनात की जा रही हैं। हेगसेथ ने कहा कि चीन न सिर्फ ताइवान पर कब्जे के लिए सैन्य निर्माण कर रहा है बल्कि वह सक्रिय तौर पर युद्धाभ्यास में भी जुटा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र के सहयोगी देशों से भी अपील की कि वे भी अपने बजट का 5 फीसदी रक्षा क्षेत्र पर खर्च करें।
पीट हेगसेथ ने सहयोगी देशों को चीन के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के प्रति भी आगाह किया और कहा कि दोनों तरफ खेलने के खतरे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका से सैन्य मदद लेना और वहीं चीन से आर्थिक मदद लेने के खतरे हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने ये भी कहा कि चीन लैटिन अमेरिकी देशों में भी अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और लगातार पनामा नहर पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर रहा है।
'भारत के साथ बढ़ा रहे सैन्य साझेदारी'
पीट हेगसेथ ने कहा कि हम भारत के साथ सैन्य साझेदारी बढ़ा रहे हैं और युद्धाभ्यास टाइगर ट्रायंफ के जरिए सहयोग को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही क्वाड और अन्य बहुस्तरीय समूहों के जरिए सहयोग को बढ़ाया जा रहा है। क्वाड के जरिए हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में रसद आपूर्ति क्षमताओं को बढ़ाया जा रहा है। भारत के साथ सैन्य सहयोग को पीट हेगसेथ ने मील का पत्थर बताया और कहा कि हर दिन के साथ यह मजबूत हो रहा है।
चीन और अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता से बचें एशिया व यूरोप : मैक्रों
सिंगापुर में वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन शंगरी-ला डायलॉग में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी शिरकत की। उन्होंने यूरोपीय और एशियाई देशों से अमेरिका व चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता में घसीटे जाने से बचने के लिए एक सकारात्मक नया गठबंधन बनाने का आह्वान किया है। सिंगापुर में शांगरी-ला संवाद में बोलते हुए मैक्रों ने चीन-अमेरिका प्रतिद्वंद्विता को दुनिया के सामने सबसे बड़ा जोखिम बताया। मैक्रों ने कहा, यूरोप की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए फ्रांस का दीर्घकालिक लक्ष्य एशियाई देशों के लिए भी प्रासंगिक है, जो कई समान हितों को साझा करते हैं और समान विचारधारा वाले यूरोपीय भागीदारों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं, क्योंकि वे तीसरा रास्ता तलाश रहे हैं।
ये भी पढ़ें- US: 'भारत-पाकिस्तान ने युद्ध किया तो अमेरिका नहीं करेगा समझौता', अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान
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ताइवान पर कब्जे की तैयारी कर रहा चीन
सिंगापुर में वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन शंगरी-ला डायलॉग में बोलते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री के निशाने पर खासतौर पर चीन रहा और उन्होंने ताइवान के खिलाफ चीन की आक्रामकता का भी जिक्र किया। चीन द्वारा लगातार युद्धाभ्यास किया जा रहा है और उसके युद्धाभ्यास में ताइवान को ब्लॉक करने का अभ्यास किया जा रहा है। चीन, ताइवान के हवाई और समुद्री क्षेत्र का भी लगातार उल्लंघन कर रहा है। चीन, ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, वहीं ताइवान खुद को आजाद देश कहता है। हेगसेथ ने सिंगापुर में कहा कि 'चीन की सेना युद्ध की तैयारियों में लगी है और हम इसे चाशनी में लपेटकर नहीं बताना चाहते। चीन का खतरा असली है और ये बेहद नजदीक भी है।'
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सहयोगी देशों से रक्षा बजट बढ़ाने की अपील
चीन ने कहा है कि उसका लक्ष्य है कि साल 2027 तक ताइवान पर कब्जा करना है। इसके लिए चीन ने दक्षिण चीन सागर में एक कृत्रिम द्वीप बनाया है, जहां नई सैन्य चौकियां बनाई जा रही हैं और साथ ही वहां पर आधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइलें भी तैनात की जा रही हैं। हेगसेथ ने कहा कि चीन न सिर्फ ताइवान पर कब्जे के लिए सैन्य निर्माण कर रहा है बल्कि वह सक्रिय तौर पर युद्धाभ्यास में भी जुटा है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र के सहयोगी देशों से भी अपील की कि वे भी अपने बजट का 5 फीसदी रक्षा क्षेत्र पर खर्च करें।
पीट हेगसेथ ने सहयोगी देशों को चीन के साथ व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के प्रति भी आगाह किया और कहा कि दोनों तरफ खेलने के खतरे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका से सैन्य मदद लेना और वहीं चीन से आर्थिक मदद लेने के खतरे हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने ये भी कहा कि चीन लैटिन अमेरिकी देशों में भी अपना प्रभाव बढ़ा रहा है और लगातार पनामा नहर पर भी अपना नियंत्रण स्थापित कर रहा है।
'भारत के साथ बढ़ा रहे सैन्य साझेदारी'
पीट हेगसेथ ने कहा कि हम भारत के साथ सैन्य साझेदारी बढ़ा रहे हैं और युद्धाभ्यास टाइगर ट्रायंफ के जरिए सहयोग को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही क्वाड और अन्य बहुस्तरीय समूहों के जरिए सहयोग को बढ़ाया जा रहा है। क्वाड के जरिए हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र में रसद आपूर्ति क्षमताओं को बढ़ाया जा रहा है। भारत के साथ सैन्य सहयोग को पीट हेगसेथ ने मील का पत्थर बताया और कहा कि हर दिन के साथ यह मजबूत हो रहा है।
चीन और अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता से बचें एशिया व यूरोप : मैक्रों
सिंगापुर में वैश्विक सुरक्षा सम्मेलन शंगरी-ला डायलॉग में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी शिरकत की। उन्होंने यूरोपीय और एशियाई देशों से अमेरिका व चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता में घसीटे जाने से बचने के लिए एक सकारात्मक नया गठबंधन बनाने का आह्वान किया है। सिंगापुर में शांगरी-ला संवाद में बोलते हुए मैक्रों ने चीन-अमेरिका प्रतिद्वंद्विता को दुनिया के सामने सबसे बड़ा जोखिम बताया। मैक्रों ने कहा, यूरोप की रणनीतिक स्वायत्तता के लिए फ्रांस का दीर्घकालिक लक्ष्य एशियाई देशों के लिए भी प्रासंगिक है, जो कई समान हितों को साझा करते हैं और समान विचारधारा वाले यूरोपीय भागीदारों के साथ मिलकर काम कर सकते हैं, क्योंकि वे तीसरा रास्ता तलाश रहे हैं।
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