{"_id":"6ab9d7e507ae0831f7015e7e","slug":"ambassador-david-perdue-says-donald-trump-asks-xi-jinping-of-us-arms-sale-taiwan-14-billion-weapons-package-2026-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमेरिका-चीन संबंध: जब ट्रंप ने जिनपिंग से पूछा- क्या आप खरीदेंगे हथियार? ताइवान कर रहा आपूर्ति का इंतजार","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
अमेरिका-चीन संबंध: जब ट्रंप ने जिनपिंग से पूछा- क्या आप खरीदेंगे हथियार? ताइवान कर रहा आपूर्ति का इंतजार
Mon, 28 Sep 2026 08:28 AM IST
देवेश त्रिपाठी
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 28 Sep 2026 08:28 AM IST
सार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री का मुद्दा उठाते हुए कथित तौर पर उनसे यह तक पूछा कि क्या चीन अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेगा। अमेरिका में चीन के राजदूत डेविड पर्ड्यू ने यह जानकारी दी। इसी बीच ताइवान ने 14 अरब डॉलर के लंबित हथियार पैकेज को जल्द उपलब्ध कराने की मांग की है।
विज्ञापन
ताइवान के हथियार सौदे पर ट्रंप प्रशासन की परीक्षा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सामने ताइवान को प्रस्तावित अमेरिकी हथियारों की बिक्री को दुनिया के दूसरे देशों को होने वाली हथियारों की बिक्री जैसा बताया। यहां तक कि ट्रंप ने एक मौके पर जिनपिंग से यह भी पूछ लिया कि क्या वह अमेरिका से हथियार खरीदना चाहेंगे। अमेरिका के चीन में राजदूत डेविड पर्ड्यू ने रविवार को यह जानकारी दी।
पर्ड्यू ने कहा कि ट्रंप ने चीन के साथ अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता के बीच उसे अमेरिकी हथियार बेचने की संभावना का जिक्र किया था। उन्होंने यह नहीं बताया कि ट्रंप ने जिनपिंग के सामने यह प्रस्ताव कब रखा था। अगर ऐसा कोई सौदा होता है तो यह अमेरिका की चीन और ताइवान से जुड़ी दशकों पुरानी नीति में बड़ा बदलाव होगा और अमेरिकी तकनीक के संभावित प्रतिद्वंद्वी तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है।
क्या जिनपिंग को खुश करने के लिए ताइवान को हथियार नहीं देगा अमेरिका?
फॉक्स न्यूज संडे में शैनन ब्रीम से बातचीत के दौरान पर्ड्यू से ताइवान को हथियारों की बिक्री में देरी को लेकर सवाल किया गया। ब्रीम ने पूछा था कि क्या अमेरिका चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को खुश करने के लिए ताइवान को हथियार देने में देरी कर रहा है।
विज्ञापन
पर्ड्यू ने इस बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ताइवान के मामले में जितने मजबूत रुख वाले हैं, उन्होंने किसी और को ऐसा नहीं देखा। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने ताइवान को काफी हथियार बेचे हैं और दोनों नेता भविष्य में ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को लेकर बातचीत करते रहते हैं।
जब ट्रंप ने जिनपिंग को दिया अमेरिकी हथियारों की खरीद का ऑफर
पर्ड्यू ने कहा, “लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप लगातार कहते हैं, ‘अरे, हम दुनिया भर के दूसरे लोगों को भी हथियार बेचते हैं।’ एक समय उन्होंने राष्ट्रपति शी से वास्तव में पूछा था कि क्या वह कुछ हथियार खरीदना चाहेंगे।”
अमेरिका अपने कानूनों के तहत ताइवान को अपनी रक्षा के लिए जरूरी साधन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। अमेरिका ताइवान को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता, लेकिन वह द्वीप का सबसे मजबूत अनौपचारिक समर्थक और हथियार आपूर्तिकर्ता है। हालांकि, कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिका अपने सहयोगी की रक्षा के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल करेगा या नहीं।
चीन की मांग को किनारे रख अमेरिका दे रहा ताइवान को हथियार
चीन लंबे समय से अमेरिका से ताइवान को हथियारों की बिक्री रोकने की मांग करता रहा है। मई में बीजिंग में ट्रंप और शी की पिछली बैठक के दौरान भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। उस बैठक के बाद अमेरिका ने 14 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हथियार पैकेज की बिक्री रोक दी थी। ट्रंप ने उस समय ताइवान को हथियारों की बिक्री को चीन के साथ बातचीत में “बहुत अच्छा बातचीत का माध्यम” बताया था।
पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस में हुई निजी बातचीत के दौरान शी ने ट्रंप से ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने का आग्रह किया था। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, शी ने बातचीत में यह मुद्दा उठाया था।
ताइवान ने मांगा 14 अरब डॉलर का हथियार पैकेज
इस बीच ताइवान ने ट्रंप प्रशासन से 14 अरब डॉलर के लंबित हथियार पैकेज को जल्द से जल्द मंजूरी देकर उपलब्ध कराने की अपील की है। ताइवान का कहना है कि चीन की संभावित आक्रामकता को रोकने के लिए उसका मजबूत और तैयार रहना जरूरी है।
अमेरिका में ताइवान के प्रतिनिधि अलेक्जेंडर यूई ने यह अपील ट्रंप और शी जिनपिंग के वाशिंगटन शिखर सम्मेलन के बाद की। सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने ताइवान के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा चर्चा नहीं की।
ताइवान पर अमेरिकी नीति में नहीं हुआ बदलाव
उन्होंने कहा, “अमेरिका ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया कि ताइवान को लेकर उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।” यूई ने ट्रंप की शी से मुलाकात से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और जापान तथा दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तीनों देशों ने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता का समर्थन किया था और किसी भी तरह के दबाव का विरोध किया था।
इसके बाद ध्यान उस हथियार पैकेज पर गया, जिसे अमेरिकी कांग्रेस मंजूरी दे चुकी है लेकिन अब भी ट्रंप की ओर से कार्रवाई का इंतजार है। सीबीएस के “स्टेट ऑफ द यूनियन” कार्यक्रम के अनुसार, ताइवान इन हथियारों के लिए पहले ही भुगतान कर चुका है। यूई ने कहा कि इन हथियारों की जरूरत संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए नहीं बल्कि उसे रोकने के लिए है।
उन्होंने कहा, “यह खरीद या यह बिक्री वास्तव में ताकत के जरिए शांति का रास्ता है और किसी भी संघर्ष से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा, यह धारणा इस आधार पर है कि ताइवान मजबूत है।” यूई ने कहा कि ताइवान अपना रक्षा बजट बढ़ा रहा है और अपनी सुरक्षा की लागत का अधिक हिस्सा खुद उठाना चाहता है। अमेरिका अब भी उसका प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता है। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि हमें ये हथियार जल्द से जल्द मिल जाएंगे।”
हथियारों की डील में क्या है देरी की वजह?
सीबीएस के अनुसार, कई रिपब्लिकन सीनेटरों ने भी सवाल उठाया है कि 1 अरब डॉलर से अधिक की अतिरिक्त सहायता अब तक क्यों नहीं दी गई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने हथियारों की आपूर्ति में देरी के लिए अमेरिकी रक्षा उद्योग की क्षमता पर दबाव को जिम्मेदार बताया।
वॉल्ट्ज ने सीएनएन से कहा, “हथियारों की बहुत बड़ी लंबित मांग है और इसका काफी हिस्सा हमारे औद्योगिक आधार से जुड़ा है। हमें न केवल उनकी मांग पूरी करनी है, बल्कि यूरोपीय देशों की मांग भी पूरी करनी है।” उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी सेना की जरूरतों और अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मांगों को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
विज्ञापन
पर्ड्यू ने कहा कि ट्रंप ने चीन के साथ अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता के बीच उसे अमेरिकी हथियार बेचने की संभावना का जिक्र किया था। उन्होंने यह नहीं बताया कि ट्रंप ने जिनपिंग के सामने यह प्रस्ताव कब रखा था। अगर ऐसा कोई सौदा होता है तो यह अमेरिका की चीन और ताइवान से जुड़ी दशकों पुरानी नीति में बड़ा बदलाव होगा और अमेरिकी तकनीक के संभावित प्रतिद्वंद्वी तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है।
विज्ञापन
क्या जिनपिंग को खुश करने के लिए ताइवान को हथियार नहीं देगा अमेरिका?
फॉक्स न्यूज संडे में शैनन ब्रीम से बातचीत के दौरान पर्ड्यू से ताइवान को हथियारों की बिक्री में देरी को लेकर सवाल किया गया। ब्रीम ने पूछा था कि क्या अमेरिका चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को खुश करने के लिए ताइवान को हथियार देने में देरी कर रहा है।
विज्ञापन
पर्ड्यू ने इस बात से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप ताइवान के मामले में जितने मजबूत रुख वाले हैं, उन्होंने किसी और को ऐसा नहीं देखा। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने ताइवान को काफी हथियार बेचे हैं और दोनों नेता भविष्य में ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को लेकर बातचीत करते रहते हैं।
जब ट्रंप ने जिनपिंग को दिया अमेरिकी हथियारों की खरीद का ऑफर
पर्ड्यू ने कहा, “लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप लगातार कहते हैं, ‘अरे, हम दुनिया भर के दूसरे लोगों को भी हथियार बेचते हैं।’ एक समय उन्होंने राष्ट्रपति शी से वास्तव में पूछा था कि क्या वह कुछ हथियार खरीदना चाहेंगे।”
अमेरिका अपने कानूनों के तहत ताइवान को अपनी रक्षा के लिए जरूरी साधन उपलब्ध कराने के लिए बाध्य है। अमेरिका ताइवान को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता, लेकिन वह द्वीप का सबसे मजबूत अनौपचारिक समर्थक और हथियार आपूर्तिकर्ता है। हालांकि, कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो अमेरिका अपने सहयोगी की रक्षा के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल करेगा या नहीं।
चीन की मांग को किनारे रख अमेरिका दे रहा ताइवान को हथियार
चीन लंबे समय से अमेरिका से ताइवान को हथियारों की बिक्री रोकने की मांग करता रहा है। मई में बीजिंग में ट्रंप और शी की पिछली बैठक के दौरान भी यह मुद्दा प्रमुखता से उठा था। उस बैठक के बाद अमेरिका ने 14 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हथियार पैकेज की बिक्री रोक दी थी। ट्रंप ने उस समय ताइवान को हथियारों की बिक्री को चीन के साथ बातचीत में “बहुत अच्छा बातचीत का माध्यम” बताया था।
पिछले सप्ताह व्हाइट हाउस में हुई निजी बातचीत के दौरान शी ने ट्रंप से ताइवान की स्वतंत्रता का विरोध करने का आग्रह किया था। चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, शी ने बातचीत में यह मुद्दा उठाया था।
ताइवान ने मांगा 14 अरब डॉलर का हथियार पैकेज
इस बीच ताइवान ने ट्रंप प्रशासन से 14 अरब डॉलर के लंबित हथियार पैकेज को जल्द से जल्द मंजूरी देकर उपलब्ध कराने की अपील की है। ताइवान का कहना है कि चीन की संभावित आक्रामकता को रोकने के लिए उसका मजबूत और तैयार रहना जरूरी है।
अमेरिका में ताइवान के प्रतिनिधि अलेक्जेंडर यूई ने यह अपील ट्रंप और शी जिनपिंग के वाशिंगटन शिखर सम्मेलन के बाद की। सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने ताइवान के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से ज्यादा चर्चा नहीं की।
ताइवान पर अमेरिकी नीति में नहीं हुआ बदलाव
उन्होंने कहा, “अमेरिका ने यह बिल्कुल स्पष्ट कर दिया कि ताइवान को लेकर उसकी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।” यूई ने ट्रंप की शी से मुलाकात से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और जापान तथा दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तीनों देशों ने ताइवान जलडमरूमध्य में शांति और स्थिरता का समर्थन किया था और किसी भी तरह के दबाव का विरोध किया था।
इसके बाद ध्यान उस हथियार पैकेज पर गया, जिसे अमेरिकी कांग्रेस मंजूरी दे चुकी है लेकिन अब भी ट्रंप की ओर से कार्रवाई का इंतजार है। सीबीएस के “स्टेट ऑफ द यूनियन” कार्यक्रम के अनुसार, ताइवान इन हथियारों के लिए पहले ही भुगतान कर चुका है। यूई ने कहा कि इन हथियारों की जरूरत संघर्ष को बढ़ावा देने के लिए नहीं बल्कि उसे रोकने के लिए है।
उन्होंने कहा, “यह खरीद या यह बिक्री वास्तव में ताकत के जरिए शांति का रास्ता है और किसी भी संघर्ष से बचने का सबसे अच्छा तरीका है। चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा, यह धारणा इस आधार पर है कि ताइवान मजबूत है।” यूई ने कहा कि ताइवान अपना रक्षा बजट बढ़ा रहा है और अपनी सुरक्षा की लागत का अधिक हिस्सा खुद उठाना चाहता है। अमेरिका अब भी उसका प्रमुख हथियार आपूर्तिकर्ता है। उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि हमें ये हथियार जल्द से जल्द मिल जाएंगे।”
हथियारों की डील में क्या है देरी की वजह?
सीबीएस के अनुसार, कई रिपब्लिकन सीनेटरों ने भी सवाल उठाया है कि 1 अरब डॉलर से अधिक की अतिरिक्त सहायता अब तक क्यों नहीं दी गई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने हथियारों की आपूर्ति में देरी के लिए अमेरिकी रक्षा उद्योग की क्षमता पर दबाव को जिम्मेदार बताया।
वॉल्ट्ज ने सीएनएन से कहा, “हथियारों की बहुत बड़ी लंबित मांग है और इसका काफी हिस्सा हमारे औद्योगिक आधार से जुड़ा है। हमें न केवल उनकी मांग पूरी करनी है, बल्कि यूरोपीय देशों की मांग भी पूरी करनी है।” उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी सेना की जरूरतों और अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मांगों को भी ध्यान में रखना पड़ता है।