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दिल्ली में जन्मे वेंकटेश ने 20 साल की उम्र में की थी पीएचडी, अब मिला मैथ्स का नोबेल फील्ड्स मेडल

Fri, 03 Aug 2018 03:06 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 03 Aug 2018 03:06 PM IST
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Akshay Venkatesh a renowned Indian origin mathematician wins field medal

भारत के दिल्ली शहर में जन्म अक्षय वेंकटेश को 36 साल की उम्र में इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ मैथेमेटिशियन में मैथ्स का सर्वश्रेष्ठ सम्मान फील्ड्स मेडल मिला है। इस कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को ब्राजील के रियो डि जेनेरो में किया गया था। इस मेडल को मैथ्स में मिलने वाला नोबेल भी कहा जाता है। जो कि 40 साल से कम उम्र वाले उन लोगों को मिलता है जिन्होंने अपने श्रेत्र में अद्भुत काम किया हो।

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मैथ्स के क्षेत्र में जाने माने रिसर्चर

अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा के बल पर आज वेंकटेश मैथ्स के क्षेत्र में दुनिया के जाने माने रिसर्चर हैं। उनका जन्म तो दिल्ली में ही हुआ था लेकिन दो साल की उम्र में वह अपने माता पिता के साथ ऑस्ट्रेलिया के पर्थ चले गए। उन्होंने महज 11 साल की उम्र में फिजिक्स और मैथ्स ओलंपियाड में दो मेडल जीते थे। उन्होंने हमेशा अपनी उम्र के बच्चों से एक साल पहले हर कक्षा पास की है।
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16 की उम्र में ग्रेजुएशन

वेंकटेश की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज 13 साल की उम्र में हाईस्कूल पूरा कर लिया था। साल 1997 में महज 16 साल की उम्र में ही उन्होंने मैथमेटिक्स ऑनर्स में फर्स्ट क्लास से ग्रेजुएशन पूरी की। साल 2002 में 20 साल की उम्र में वह पीएचडी भी पूरी कर चुके थे। इस वक्त वह स्टेनफोर्ट विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। 

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इस विषय पर किया सबसे ज्यादा काम

Akshay Venkatesh a renowned Indian origin mathematician wins field medal

वेंकटेश ने सबसे ज्यादा काम नंबर थ्योरी पर किया है। इसके अलावा उन्होंने अर्थमैटिक ज्योमैट्री, टोपोलॉजी, ऑटोमोर्फिक फॉर्म्स आदि पर भी काम किया है। अभी तक उन्हें रिसर्च के क्षेत्र में कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है जिसमें ऑस्त्रोवस्की पुरस्कार, द इन्फोसिस पुरस्कार, द स्लेम प्राइज और शस्त्र रामानुजन पुरस्कार शामिल हैं।

86 साल पहले से शुरू किया गया पुरस्कार

यह पुरस्कार साल 1932 से कैनेडियन मैथमेटिशियन फील्ड्स के कहने पर शुरू किया गया था। फील्ड्स मेडल 40 साल से कम उम्र के मैथमेटिशियन को हर चार साल में दिया जाता है। इस पुरस्कार के साथ 15 हजार कैनेडियन डॉलर का कैश प्राइज और एक मेडल दिया जाता है। वेंकटेश के अलावा तीन अन्य लोगों को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। जिसमें कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर काउचर बिरकर, जर्मनी के पीटर स्कोल्ज और इटली के अलिसियो फिगैली शामिल हैं।

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