{"_id":"5f45c5418341784e0d66d07a","slug":"agitation-in-pok-against-pak-china-project","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीओके में चीन-पाक बांध के विरोध में प्रदर्शन शुरू","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
पीओके में चीन-पाक बांध के विरोध में प्रदर्शन शुरू
Wed, 26 Aug 2020 07:43 AM IST
Amit Mandal
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 26 Aug 2020 07:43 AM IST
विज्ञापन
पीओके में प्रदर्शन (फाइल फोटो)
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नीलम-झेलम नदी पर चीनी कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे मेगा-बांधों का विरोध करने के लिए मुजफ्फराबाद शहर में बड़ा प्रदर्शन किया गया। यहां मशाल रैली निकालकर ‘दरिया बचाओ, मुजफ्फराबाद बचाओ’ और ‘नीलम-झेलम बहने दो हमको जिंदा रहने दो’ जैसे नारे लगाए गए। रैली में पीओके के कई क्षेत्रों से लोग एकत्रित हुए।
बता दें कि हाल ही में, चीन और पाकिस्तान ने पीओके में आजाद पट्टन और कोहाला हाइड्रोपावर कंपनी के साथ निर्माण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के हिस्से के रूप में ये हस्ताक्षर जुलाई में किए गए थे। 1.54 अरब डॉलर की परियोजनाएं चीन की जियोझाबा कंपनी द्वारा प्रायोजित होंगी। वहीं, इस्लामाबाद से 90 किमी दूर झेलम नदी के कोहाला हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के वर्ष 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
यह परियोजना चीन थ्री गोरजेस कॉर्पोरेशन, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन और सिल्क बोर्ड फंड द्वारा प्रायोजित की जाएगी। इसकी मदद से देश में बिजली सस्ती हो सकती है। जबकि प्रदर्शनकारी इसके विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने कहा, ये विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रखना चाहिए जब तक निर्माण कार्य रोक नहीं दिया जाता।
विज्ञापन
इसलिए है नाराजगी
इस क्षेत्र में रहने वाले लोग यहां पर चीनियों की मौजूदगी, बांधों के बड़े पैमाने पर निर्माण और नदियों के बहाव मोड़ने से उनके अस्तित्व पर पड़ रहे खतरे को लेकर नाराज हैं। सीपीईसी के नाम पर पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों को संयुक्त रूप से मिलकर लूटने में लगे बीजिंग और इस्लामाबाद को लेकर भी लोगों में खासी नाराजगी है।
विज्ञापन
बता दें कि हाल ही में, चीन और पाकिस्तान ने पीओके में आजाद पट्टन और कोहाला हाइड्रोपावर कंपनी के साथ निर्माण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के हिस्से के रूप में ये हस्ताक्षर जुलाई में किए गए थे। 1.54 अरब डॉलर की परियोजनाएं चीन की जियोझाबा कंपनी द्वारा प्रायोजित होंगी। वहीं, इस्लामाबाद से 90 किमी दूर झेलम नदी के कोहाला हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के वर्ष 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।
विज्ञापन
यह परियोजना चीन थ्री गोरजेस कॉर्पोरेशन, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन और सिल्क बोर्ड फंड द्वारा प्रायोजित की जाएगी। इसकी मदद से देश में बिजली सस्ती हो सकती है। जबकि प्रदर्शनकारी इसके विरोध में उतर आए हैं। उन्होंने कहा, ये विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रखना चाहिए जब तक निर्माण कार्य रोक नहीं दिया जाता।
विज्ञापन
इसलिए है नाराजगी
इस क्षेत्र में रहने वाले लोग यहां पर चीनियों की मौजूदगी, बांधों के बड़े पैमाने पर निर्माण और नदियों के बहाव मोड़ने से उनके अस्तित्व पर पड़ रहे खतरे को लेकर नाराज हैं। सीपीईसी के नाम पर पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों को संयुक्त रूप से मिलकर लूटने में लगे बीजिंग और इस्लामाबाद को लेकर भी लोगों में खासी नाराजगी है।