प्रतिबंध कूटनीति से नाराज रूस, चीन और ईरान: अफगानिस्तान में अमेरिका की नाकामी से खुश हैं उसके विरोधी देश
पर्यवेक्षकों का कहना है कि अफगानिस्तान में बने नए हालात के बाद अब अमेरिका विरोधी देशों का रुख अधिक सख्त हो जाने की संभावना है। इस सिलसिले में हफ्ते भर पहले एक पश्चिमी समाचार एजेंसी की तरफ से दी गई इस खबर का जिक्र किया गया है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की गति तेज कर दी है...
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अफगानिस्तान में गहराए संकट के बीच अमेरिका विरोधी देश अपने लिए नया मौका देख रहे हैं। चीन, रूस, और ईरान जैसे देशों ने इस मसले पर आपसी तालमेल की कोशिशें भी तेज कर दी हैं। ईरान के अखबार तेहरान टाइम्स में छपी एक टिप्पणी में कहा गया है- ‘अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी से अमेरिकी प्रभाव में गिरावट को लेकर कई अटकलें चर्चित हुई हैं। यह एक बड़ी विनाशकारी घटना है और इससे दुनिया को वियतनाम से अमेरिकी वापसी की घटना याद आई है।’
तेहरान टाइम्स के मुताबिक अमेरिका ने, खासकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में ईरान, रूस और चीन के खिलाफ प्रतिबंधों को हथियार बनाया। अब अफगानिस्तान में उसकी नाकामी सामने आई है। इसलिए निशाना बने देशों के नेता अब अमेरिकी प्रभाव में गिरावट की खुल कर चर्चा कर रहे हैं।
इस अखबार ने संयुक्त राष्ट्र में रूस के स्थायी उप प्रतिनिधि दिमित्री पोलांस्की से बातचीत प्रकाशित की है। उसमें पोलांस्की ने कहा है- ‘अमेरिका के आर्थिक वर्चस्व का क्षय प्राकृतिक रूप से हो रहा है। हमारे सामने चुनौती अपनी घरेलू अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने और समान विचार वाले देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की है।’ पोलांस्की ने कहा कि अमेरिका ने ‘प्रतिबंध कूटनीति’ को अपना रखा है। उसके साथ ही वह डॉलर का इस्तेमाल दूसरे देशों पर दबाव डालने के लिए करता है। इसी वजह के कई देश अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिकी दबदबे का मुकाबला करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
तेहरान टाइम्स ने ये बात याद दिलाई है कि पूर्व डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अमेरिका को ईरान परमाणु डील से निकाल लिया और ईरान पर फिर से प्रतिबंध लागू कर दिए। उसने अपनी शर्तों के आगे ईरान को झुकाने की कोशिश की। अखबार ने कहा- लेकिन अमेरिका की अधिकतम दबाव डालने की नीति नाकाम रही। ईरान ने अपनी परमाणु नीति नहीं बदली।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि अफगानिस्तान में बने नए हालात के बाद अब अमेरिका विरोधी देशों का रुख अधिक सख्त हो जाने की संभावना है। इस सिलसिले में हफ्ते भर पहले एक पश्चिमी समाचार एजेंसी की तरफ से दी गई इस खबर का जिक्र किया गया है कि ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की गति तेज कर दी है।
एजेंसी ने ये खबर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा ऐजेंसी (आईएईए) के हवाले से दी थी। इसमें कहा गया कि ईरान अब 60 फीसदी तक यूरेनियन का संवर्धन कर रहा है। पहले वह ऐसा 20 फीसदी तक कर रहा था। इस रिपोर्ट के मुताबिक पिछले अप्रैल में ईरान के परमाणु संयंत्र नातान्ज में हुए जोरदार धमाके के बाद ईरान ने यूरेनियन संवर्धन की रफ्तार तेज कर दी।
इस समय वियना में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों और जर्मनी के साथ ईरान की परमाणु डील को लेकर बातचीत चल रही है। मकसद यह है कि अमेरिका फिर से इसमें शामिल हो। लेकिन रूसी राजनयिक पोलांस्की ने कहा कि उन्हें जितनी जानकारी है, ऐसा समझौता होने की अभी कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पूर्व ट्रंप प्रशासन और मौजूदा बाइडन प्रशासन के रुख में कोई फर्क नहीं है। उन्होंने कहा- ‘हम इस नीति की निंदा करते हैं।’
पर्यवेक्षकों ने पोलांस्की के इस बयान को ईरान के साथ रूस की उभर रही एक धुरी का संकेत माना है।