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नेपाल: स्थानीय चुनावों में हार से मायूस ओली की पार्टी ने वापस लिया संसदीय विरोध

Thu, 19 May 2022 05:10 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 19 May 2022 05:10 PM IST
सार

बुधवार तक मिले संकेतों के मुताबिक यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टी ने पांच स्थानीय निकायों में जीत हासिल की थी और 14 में बढ़त बनाए हुए थी। उधर यूएमएल ने 101 स्थानीय इकाइयों में जीत दर्ज की थी और 92 में उसने बढ़त बना ली थी। इस तरह उसे लगभग 100 निकायों का नुकसान होता लग रहा था...

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After not getting the expected success in Nepal local election, now opposition Communist Party of Nepal (UML) decided to change its strategy
केपी शर्मा ओली - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नेपाल के स्थानीय चुनावों में उम्मीद के मुताबिक कामयाबी ना मिलने के बाद अब ऐसा लगता है कि विपक्षी दल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) ने अपनी रणनीति बदलने का फैसला किया है। उसने संसदीय कार्यवाही में रुकावट डालने की अपनी रणनीति बदलने का एलान किया है। बीते आठ महीनों से पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली ये पार्टी संसदीय कार्यवाही नहीं चलने दे रही थी। संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में यूएमएल अभी भी सबसे बड़ी अकेली पार्टी है।

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पिछले साल अगस्त में यूएमएल विभाजित हो गई थी। तब उसके 14 सांसदों ने पार्टी छोड़ कर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूनिफाइड सोशलिस्ट) नाम से अलग पार्टी बना ली थी। यूएमएल ने प्रतिनिधि सभा के स्पीकर अग्नि सपकोटा को पत्र लिख कर इन सांसदों की सदस्यता खारिज करने की गुजारिश की थी। लेकिन स्पीकर ने उसे स्वीकार नहीं किया। इसी के विरोध में यूएमएल ने संसद ना चलने देने की रणनीति अपना ली थी। उसने कहा था कि वह कार्यवाही में रुकावट तभी खत्म करेगी, जब या तो स्पीकर उन 14 सदस्यों को सदन से निकाल दें या फिर वे खुद इस्तीफा दे देंगे। यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टी इस समय नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले पांच दलों के सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है।

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यूएमएल बदलेगी रणनीति

लेकिन इन दोनों में बिना कोई मांग पूरी हुए अब यूएमएल ने रणनीति बदलने का एलान किया है। पार्टी के उप महासचिव प्रदीप गयावली ने कहा- हमने अपने विरोध का रूप बदलने का फैसला किया है। इसकी वजह यह है कि मौजूदा आर्थिक संकट और महंगाई पर सदन में गंभीर चर्चा की जरूरत है। बीते आठ महीनों के दौरान दो मौकों पर यूएमएल संसद चलने देने पर राजी हुई थी। उनमें एक मौका अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन से 50 करोड़ डॉलर की मदद स्वीकार करने के करार के संसदीय अनुमोदन का था। इसके अलावा बजट संबधी चार विधेयकों को भी उसने बिना रुकावट डाले पारित होने दिया था।

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हालांकि स्थानीय चुनावों में यूएमएल को भी उम्मीद के मुताबिक कामयाबी नहीं मिली है, लेकिन माधव कुमार नेपाल के नेतृत्व वाली यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टी को उससे भी ज्यादा झटका लगा है। यूएमएल ने कहा है कि अब चूंकि स्थानीय चुनावों में जनता ने यूनिफाइड सोशलिस्ट को पूरी तरह नकार दिया है, इसलिए भी उसने संसदीय विरोध को खत्म करने का फैसला किया। पार्टी के प्रमुख संसदीय ह्विप विशाल भट्टराई ने अखबार काठमांडू पोस्ट से कहा- जनता ने अपने वोट से यूनिफाइड सोशलिस्ट के खिलाफ फैसला दे दिया है।

यूएमएल को 100 निकायों का नुकसान

बुधवार तक मिले संकेतों के मुताबिक यूनिफाइड सोशलिस्ट पार्टी ने पांच स्थानीय निकायों में जीत हासिल की थी और 14 में बढ़त बनाए हुए थी। उधर यूएमएल ने 101 स्थानीय इकाइयों में जीत दर्ज की थी और 92 में उसने बढ़त बना ली थी। इस तरह उसे लगभग 100 निकायों का नुकसान होता लग रहा था। 2017 के स्थानीय चुनावों में उसने 294 इकाइयों में जीत दर्ज की थी।



यूएमएल के इस खराब प्रदर्शन को ही उसके रणनीति बदलने का कारण समझा जा रहा है। प्रतिनिधि सभा के पूर्व स्पीकर तारानाथ रानाभट ने कहा है- ‘स्थानीय चुनावों का नतीजा एक कारण रहा हो सकता है, जिससे यूएमएल ने अपना विरोध वापस लिया।’

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