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रूसी वैक्सीनः हंगरी के बाद चेक रिपब्लिक दिखाएगा यूरोपीय यूनियन को आईना?
Fri, 05 Mar 2021 03:57 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Fri, 05 Mar 2021 03:57 PM IST
सार
चेक रिपब्लिक कोरोना संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित है। इसे देखते हुए वहां के राष्ट्रपति मिलोस जेमान ने रूस और चीन में बनी वैक्सीन मंगवाने का फैसला किया...
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- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
हंगरी के बाद चेक रिपब्लिक अगला ऐसा देश बनने जा रहा है, जो यूरोपियन यूनियन (ईयू) के रुख से अपने को अलग कर रूस में बने स्पुतनिक वी कोरोना वायरस को अपने यहां मंजूरी देने की तैयारी में है। गौरतलब है कि ईयू के ड्रग रेगुलेटर यूरोपियन मेडिसिंस एजेंसी (ईएमए) ने अभी तक स्पुतनिक वी को हरी झंडी नहीं दी है। बल्कि गुरुवार को ईएमए ने कहा कि उसने स्पुतनिक वी की समीक्षा शुरू की है। इस बीच गुरुवार को ही जारी हुई एक अध्ययन रिपोर्ट में बताया गया कि ईयू के कई देशों में आम लोगों के बीच स्पुतनिक को लेकर सकारात्मक भावना में उछाल आया है। इस मामले में कोरोना वायरस संक्रमण रोकने की इस रूसी वैक्सीन ने एस्ट्राजेनिका के वैक्सीन को पीछे छोड़ दिया है।
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चेक रिपब्लिक कोरोना संक्रमण से बुरी तरह प्रभावित है। इसे देखते हुए वहां के राष्ट्रपति मिलोस जेमान ने रूस और चीन में बनी वैक्सीन मंगवाने का फैसला किया। उनके प्रवक्ता जिरी ओवकासेक के मुताबिक जेमान ने वैक्सीन भेजने का अनुरोध करते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को व्यक्तिगत पत्र लिखा है। ओवकासेक ने बताया कि चीन ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया दिखाई और वैक्सीन की खेप भेजने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि रूसी और चीनी वैक्सीन कुछ दिनों के अंदर ही चेक रिपब्लिक पहुंचने वाली हैं।
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रूसी वैक्सीन को हंगरी में लगाने का काम शुरू हो चुका है। इस बीच ऑस्ट्रियन इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट एंड इकॉनमिक रिसर्च (आईएमवीएफ) ने तीन जर्मन भाषी देशों- जर्मनी, ऑस्ट्रिया और स्वीट्जरलैंड- में किए अपने एक अध्ययन के आधार पर कहा है कि वहां की चर्चाओं में स्पुतनिक को ऊंची रेटिंग मिली है। इंस्टीट्यूट के अध्ययनकर्ताओं ने वैक्सीन से संबंधित प्रकाशित ढाई लाख टिप्पणियों का अध्ययन किया। ये टिप्पणियां मेनस्ट्रीम मीडिया, सोशल मीडिया, ब्लॉग पोस्ट, ट्विटर, और फेसबुक पर इसी साल जनवरी और फरवरी में छपीं।
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इस अध्ययन में पाया गया कि इन टिप्पणियों में सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिकी कंपनी फाइजर और ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी एस्ट्राजेनिका के वैक्सीन की हुई है। ये दोनों वैक्सीन ईयू में उपलब्ध हो चुके हैं। इन्हें ईयू ने निर्माता कंपनियों से खरीदा है। अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक टिप्पणियों में सबसे ज्यादा बार फाइजर की वैक्सीन का जिक्र हुआ। इसके बाद एस्ट्राजेनिका की वैक्सीन का नंबर है। लेकिन इन दोनों के वैक्सीन के मामले में ज्यादातर चर्चा उनके साइट इफेक्ट्स, उनकी डिलीवरी की समस्या और उन्हें हासिल करने में हो रही दिक्कतों को लेकर हुई। लोगों में सबसे ज्यादा असंतोष ब्रिटिश-स्वीडिश कंपनी के वैक्सीन को लेकर देखा गया। अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक इस वैक्सीन का जितनी बार सकारात्मक ढंग से जिक्र हुआ, लगभग उतनी ही बार नकारात्मक टिप्पणियां भी इसे मिलीं।
फाइजर की रेटिंग उससे काफी बेहतर रही। हालांकि स्पुतनिक का जिक्र ज्यादा नहीं हुआ, लेकिन जितनी बार हुआ, उसको लेकर सकारात्मक बातें ज्यादा कही गईं। खासकर जर्मनी और ऑस्ट्रिया में इसको लेकर लोगों में ज्यादा अच्छी धारणाएं नजर आईं।
जानकारों के मुताबिक इसे देखते हुए इसमें ज्यादा हैरत की बात नहीं है कि ईयू के देश अब स्पुतनिक की तरफ झुक रहे हैं। टीवी चैनल यूरो न्यूज की वेबसाइट पर छपी एक रिपोर्ट में ध्यान दिलाया गया है कि पिछले हफ्ते तक चेक रिपब्लिक का यही रुख था कि देश में वही वैक्सीन लगया जाएगा, जिसे ईएमए की मंजूरी मिली होगी। लेकिन पिछले सप्ताहांत में चेक सरकार न कहा कि चेक रिपब्लिक के ड्रग रेगुलेटर की तरफ से मिली मंजूरी काफी होगी। हालांकि अभी ये सवाल बना हुआ है क्या चेक रिपब्लिक में सचमुच ईएमए की इजाजत के पहले रूसी और चीनी वैक्सीन लगाने का काम शुरू कर दिया जाएगा? जानकारों ने कहा है कि उस हालत में बीमा कंपनियां किसी खर्च को कवरेज नहीं देंगी।
लेकिन हंगरी की मिसाल भी सामने है, जिसने अपने रेगुलेटर से मिली हरी झंडी के बाद पिछले जनवरी में ही स्पुतनिक वैक्सीन को लगाए जाने की इजाजत दे दी थी। अब वहां चीन में बनी साइनोफार्म वैक्सीन की 30 लाख डोज पहुंचने वाली हैं। इन खबरों को इसलिए अहम माना गया है क्योंकि ये ईयू के अपने घटक देशों पर घटते प्रभाव की झलक देती हैं।