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तुम औरत हो, घर जाओ...: अफगानी पत्रकार ने बताया तालिबान के नियंत्रण हासिल करने के बाद कैसा रहा जीवन

Thu, 19 Aug 2021 11:04 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 19 Aug 2021 11:04 PM IST
सार

अफगानिस्तान में टीवी न्यूज एंकर शबनम दावरान ने तालिबान के सत्ता हासिल करने के एक दिन बाद के अपने अनुभव साझा किए हैं। शबनम को महिला होने के चलते कार्यालय में दाखिल होने की अनुमति नहीं दी गई थी।

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Afghanistan TV Anchor Shabnam Dawran tells her life after Taliban Takes Control of Kabul Afghanistan how women are not allowed to work in government institutions
अफगानी टीवी एंकर शबनम दावरान - फोटो : twitter.com/shabnamdawran

विस्तार

अफगानिस्तान में प्रभावी रूप से नियंत्रण हासिल कर लेने के बाद तालिबान सरकारी मीडिया संस्थानों में काम करने वाली महिला पत्रकारों से काम पर न आने के लिए कह रहा है। यह कहना है यहां के आरटीए पश्तो समाचार चैनल में एंकर शबनम दावरान का। इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में शबनम ने कहा कि तालिबान के दाखिले के साथ पेशेवर अफगान महिलाओं के लिए बहुत स्थिति बहुत ज्यादा गंभीर हो गई है। 

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शबनम ने कहा, तालिबान ने जब काबुल पर कब्जा कर लिया, उसके अगले दिन में ऑफिस गई जहां मुझे आगे से काम पर न आने के लिए कह दिया गया। जब मैंने इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि अब नियम बदल गए हैं और महिलाओं को आरटीए में अब काम करने की अनुमति नहीं है। जब पहले उन्होंने कहा था कि महिलाओं को पढ़ने और काम पर जाने की अनुमति दी जाएगी तब मैं थोड़ा उत्साहित हो गई थी।
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उन्होंने आगे कहा, लेकिन जब मैंने असलियत का खुद अनुभव किया, यह देखा कि जमीन पर हकीकत क्या है, जब मुझसे मेरे ही कार्यालय में केवल महिला होने के चलते काम करने से मना कर दिया गया, तब मुझे पता चला कि समस्या कितनी गंभीर है और हालात कितने बिगड़ चुके हैं। मैंने उन्हें अपना पहचान पत्र भी दिखाया था लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे ऑफिस में दाखिल ही नहीं नहीं दिया और घर जाने को कहा।
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इस सवाल पर कि क्या तालिबान ने दूसरे चैनलों की महिला एंकरों को भी ऐसे ही फरमान सुनाए हैं, शबनम ने कहा, 'नहीं, उन्होंने केवल उन महिलाओं के काम करने पर रोक लगाई है जो सरकारी संस्थानों में कार्यरत थीं। टोलो न्यूज एक निजी चैनल है। उन्होंने वहां की महिलाओं के लिए ऐसा कोई आदेश अभी तक तो नहीं जारी किया है।' शबनम ने कहा, 'उन्होंने मुझसे कहा कि तुम लड़की हो जाओ, अपने घर जाओ।'

तालिबान की एक प्रेस वार्ता में एक महिला पत्रकार को सवाल पूछते देखे जाने को लेकर शबनम ने कहा कि वह टोलो न्यूज पर था और वह साक्षात्कार मेरी ही एक मित्र ने लिया ता। हम सोच रहे थे कि अगर तालिबान फिर से सत्ता में आया तो महिलाओं के साथ क्या होगा। लेकिन इस साक्षात्कार के बाद हम सोचने लगे थे कि शायद चीजें कुछ अलग होंगी। तालिबान सरकारी मीडिया के साथ जो कर रहा है वह ठीक नहीं है।






शबनम कहती हैं कि मैं कुछ समझ नहीं पा रही हूं। मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं है कि आने वाले समय में क्या होने वाला है। मैं अब यहां इन स्थितियों में काम नहीं कर सकती। अफगानिस्तान में रहना बहुत कठिन है। अगर मुझे कोई सहयोग मिलता है तो मैं अफगानिस्तान छोड़ना पसंद करूंगी। वहीं, अपने परिवार को लेकर सवाल पर शबनम ने कहा कि मुझे अपनी जान से ज्यादा अपने परिवार की फिक्र है। 

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