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अफगानिस्तान: तालिबान ने अफीम की खेती पर लगाया प्रतिबंध, उल्लंघन करने पर खेत जलाकर जेल भेजने की चेतावनी दी
Sun, 03 Apr 2022 10:19 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 03 Apr 2022 10:19 PM IST
सार
इससे पहले 2001 में देश के किसानों ने अनाज की खेती बंद कर दी थी। कारण यह था कि लगातार युद्ध के कारण देश का आधारभूत ढांचा बर्बाद हो गया था। अनाज को मंडियों तक पहुंचाना मुश्किल था।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
अफगानिस्तान की सत्ता हथियाने के बाद तालिबान ने पहली बार दुनिया को राहत देने वाला कदम उठाते हुए अफीम की खेती पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इन दिनों पूरे अफगानिस्तान में किसान अफीम के लिए खेत तैयार करने में जुटे हैं। अफगानिस्तानी अफीम से बनी हेरोइन पूरी दुनिया में सप्लाई की जाती है।
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तालिबान ने किसानों के लिए जारी आदेश में चेतावनी दी है कि अफीम की फसल उगाई तो खेत को जलाकर उन्हें जेल भेजा जाएगा। इस प्रतिबंध ने तालिबान के 1990 के शासनकाल की याद ताजा कर दी है। उस समय भी अफीम की खेती प्रतिबंधित थी। तालिबान के अफीम की खेती पर प्रतिबंध लगाने की संयुक्त राष्ट्र ने पुष्टि की है।
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इससे पहले 2001 में देश के किसानों ने अनाज की खेती बंद कर दी थी। कारण यह था कि लगातार युद्ध के कारण देश का आधारभूत ढांचा बर्बाद हो गया था। अनाज को मंडियों तक पहुंचाना मुश्किल था।
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इसके बाद अफीम छोटे किसानों की आय का मुख्य साधन बन गया था। इससे वे एक महीने में तीन हजार रुपये तक कमा लेते थे। अब अफगानिस्तान दुनिया में अफीम का सबसे बड़ा उत्पादक है। तालिबान के सत्ता कब्जाने से पहले यहां सालभर में 6000 टन से ज्यादा अफीम का उत्पादन होता था। संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों के मुताबिक, इससे 320 टन शुद्ध हेरोइन बनती थी।