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Afghanistan: अफगानिस्तान में कबीलों के बीच जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप, चौथे दिन जारी झड़प में कई घायल

Mon, 03 Aug 2026 11:09 PM IST
Pavan आईएएनएस, काबुल
आईएएनएस, काबुल Published by: Pavan Updated Mon, 03 Aug 2026 11:09 PM IST
सार

तालिबान के करीबी माने जाने वाले मीडिया संस्थान रेडियो हुर्रियत ने कहा कि झड़पें चौथे दिन में पहुंच गई हैं। उसने एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें कथित तौर पर एक व्यक्ति विरोधी पक्ष की तरफ मोर्टार दागता हुआ दिखाई दे रहा है। हालांकि, इस वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी।

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Afghanistan: Land dispute between tribes turns violent; several injured in clashes continuing for fourth day
अफगानिस्तान में कबीलों के बीच झड़प - फोटो : IANS

विस्तार

दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में खोस्त और पक्तिया प्रांतों की सीमा पर स्थित एक पहाड़ी इलाके के मालिकाना हक को लेकर दो कबीलों के बीच हुई सशस्त्र झड़पें सोमवार को चौथे दिन भी जारी रहीं। अफगानिस्तान की प्रमुख समाचार एजेंसी खामा प्रेस के मुताबिक, यह झड़प खोस्त प्रांत के स्पाइरा जिले के बोरी खेल कबीले और पक्तिका प्रांत के गियान जिले के गियान खेल कबीले के लोगों के बीच शुरू हुई।
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स्थानीय रिपोर्टों का हवाला देते हुए एजेंसी ने बताया कि दोनों पक्षों ने संघर्ष के दौरान हल्के और भारी हथियारों का इस्तेमाल किया। इससे लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद के और बढ़ने की चिंता पैदा हो गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, विवादित पहाड़ स्पाइरा और गियान जिलों के बीच स्थित है। यह इलाका जंगलों से घिरा हुआ है, जिनमें कीमती पाइन नट के पेड़ भी हैं। लोगों का कहना है कि इन्हीं संसाधनों की वजह से जमीन के मालिकाना हक, उपयोग और नियंत्रण को लेकर मतभेद और बढ़ गए हैं। कई दशकों से यह विवाद समय-समय पर सशस्त्र झड़पों का कारण बनता रहा है।
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स्पाइरा जिले के निवासी शाह मीर खान ने कहा कि पहले भी इस पहाड़ को लेकर हुई झड़पों में भारी जान-माल का नुकसान हुआ है। उनका दावा है कि इस विवाद से जुड़े पुराने संघर्षों में करीब 80 लोग मारे गए या घायल हुए थे। हालांकि, इस आंकड़े की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। रेडियो हुर्रियत के अनुसार, हालात को और बिगड़ने से रोकने और दोनों पक्षों को अलग करने के लिए तालिबान बलों को इलाके में तैनात किया गया है।
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रिपोर्ट में बताया गया है कि इस पहाड़ को लेकर विवाद की जड़ दोनों समुदायों के ऐतिहासिक मालिकाना दावों में है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस क्षेत्र को लेकर तनाव कई पीढ़ियों से चला आ रहा है। यह विवाद अक्सर प्राकृतिक संसाधनों, चराई की जमीन और जंगलों तक पहुंच से जुड़ा रहता है। रेडियो हुर्रियत का कहना है कि यह व्यापक विवाद लगभग 80 वर्षों से जारी है और इस दौरान दोनों पक्षों के 250 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
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