फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   Afghan women buried under debris in earthquake Taliban religious restrictions took away their hope of help

Afghanistan: भूकंप में मलबे तले दबीं अफगानी महिलाएं, तालिबान की धार्मिक पाबंदियों ने छीन ली मदद की उम्मीद

Sun, 07 Sep 2025 01:26 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल Published by: शुभम कुमार Updated Sun, 07 Sep 2025 01:26 PM IST
सार

कोने में इकट्ठा कर, हमें भुला दिया गया...., अफगानिस्तान में आए विनाशकारी भूकंप ने महिलाओं की पीड़ा को और गहरा कर दिया। तालिबान की सख्त धार्मिक पाबंदियों के चलते घायल महिलाएं मदद के इंतजार में तड़पती रहीं। 36 घंटे तक कोई राहत नहीं मिली। न महिला डॉक्टर थीं, न बचावकर्मी। कई महिलाएं मलबे तले दम तोड़ गईं, कई बस इंतजार करती रहीं।

विज्ञापन
Afghan women buried under debris in earthquake Taliban religious restrictions took away their hope of help
अफगानिस्तान में भूकंप के बाद आस में बैठी महिलाएं - फोटो : ANI

विस्तार

अफगानिस्तान में बीते दिनों आए भूंकप ने हजारों लोगों के जीवन को तबाह कर दिया। इस आपदा के चलते देशभर में मातम का माहौल है। दूसरी तरफ गौर करने वाली बात ये है कि इस तबाही में सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना महिलाओं को करना पड़ा। मीडिया रिपोर्ट की माने तो तालिबान की सख्त सांस्कृतिक और धार्मिक पाबंदियों के कारण महिलाओं तक राहत पहुंचाना लगभग नामुमकिन हो गया है। भूकंप के 36 घंटे बाद भी एक भी महिला को मदद नहीं मिली।

विज्ञापन


तालिबान की 'दूसरे पुरुषों से सपंर्क न करने की'  सख्त हिदायत के कारण पुरुष बचावकर्मी महिलाओं की मदद तक नहीं कर पा रहे हैं, चाहे उनकी जान खतरे में हो। इससे कई घायल महिलाएं मलबे के नीचे फंसी रह गईं और उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल सका। फलस्वरूप कुछ ने अपना दम तोड़ दिया तो कुछ संघर्ष करती रहीं।  
विज्ञापन


19 साल की आयशा ने बताता कैसा था भयावह मंजर
इस आपदा में संघर्ष कर रहीं महिलाओं में कुनार प्रांत के अंदरलुकक गांव की रहने वाली 19 वर्षीय आयशा ने भूकंप के बाद चीख पूकार करते उस भयावह मंजर को याद किया। आयशा ने बताया कि कैसे इस भयावह आपदा के समय महिलाओं को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने बताया कि हम महिलाओं को एक कोने में इकट्ठा कर दिया गया और भुला दिया गया। मदद के लिए कोई नहीं आया, किसी ने पूछा तक नहीं कि हमें क्या चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इतना ही नहीं तालिबान के सख्त शासक ने महिलाओं को चिकित्सा शिक्षा और सार्वजनिक कामों में हिस्सा लेने से भी रोक रखा है। इसलिए महिला डॉक्टरों और बचावकर्मियों की भारी कमी रही, खासकर ग्रामीण इलाकों में। यह महिलाओं के लिए और भी बड़ी मुसीबत बन गया है।

ये भी पढ़ें:- Afghanistan Earthquake: अफगानिस्तान में भूकंप से मरने वालों का आंकड़ा 1400 के पार, भारत ने भेजी राहत सामग्री

पुरुष स्वयंसेवक ताजिबुल्लाह ने क्या कहा?
वहीं इसके बारे में एक पुरुष स्वयंसेवक 33 साल के ताजिबुल्लाह मुहाजेब ने बताया कि मलबे के नीचे फंसी महिलाओं को निकालने में उनके मेडिकल टीम के पुरुष सदस्य हिचकिचाते थे। उन्होंने कहा कि महिलाएं जैसे अदृश्य थीं। मुहाजेब ने बताया कि इस दौरान पुरुषों और बच्चों का इलाज पहले होता था, जबकि महिलाएं दूर बैठकर मदद के इंतजार में थीं। 

ये भी पढ़ें:- Afghanistan Earthquake: भूकंप के झटकों से फिर दहला अफगानिस्तान; रिक्टर स्केल पर दर्ज की गई 5.3 तीव्रता

धार्मिक पाबंदिया महिलाओं के लिए बनी जी का जंजाल
इन धार्मिक पाबंदियों के चलते अगर किसी महिला के साथ कोई पुरुष रिश्तेदार मौजूद नहीं था, तो बचावकर्मी बिना छुए उनके कपड़ों से शव को बाहर निकालते थे। यह सख्त नियम महिलाओं की मदद में भारी बाधा बन रहा है। संयुक्त राष्ट्र महिला संगठन की विशेष प्रतिनिधि सुसान फर्ग्यूसन ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों को फिर से इस आपदा का सबसे बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उनकी जरूरतों को राहत और पुनर्निर्माण के केंद्र में रखना होगा।

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने भी जताई चिंता
अफगानिस्तान में महिलाओं की इस त्रासदी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी चिंतित हैं और तालिबान की नीतियों को कड़ा आलोचना का निशाना बना रहे हैं। वे कह रहे हैं कि राहत कार्यों में महिलाओं को समान और सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में बीते दिनों आए बड़े भूकंप में अब तक 2200 से ज्यादा लोग मारे गए और 3600 से ज्यादा घायल हुए हैं। राहत कार्यों में महिलाओं को प्राथमिकता नहीं मिलने से उनके हालात और खराब हो गए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed