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अफगानिस्तान: काबुल छोड़ने को मजबूर अफगान गायक और संगीत संरक्षक, बोले- तालिबान शासन में कला का भविष्य खतरे में
Sun, 12 Sep 2021 05:51 PM IST
अभिषेक दीक्षित
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेशावर
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेशावर
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 12 Sep 2021 05:51 PM IST
सार
अपनी जान के डर से कुछ कलाकार और गायक पाकिस्तान भी पहुंचने लगे हैं। एक अफगान गायक पासुन मुनव्वर ने बताया कि तालिबान से हमें खतरा है। तालिबान के काबुल पर अधिकार करने के बाद सभी संगीत कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : PTI
विस्तार
जैसे-जैसे तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करते जा रहा है, पाकिस्तान में लोकप्रिय अफगान संगीत के संरक्षकों को अपने कार्यालय बंद करने पड़ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि काबुल में कलाकार को छिपने के लिए मजबूर हैं। जिसके परिणामस्वरूप संगीत कार्यक्रम रद्द हो रहे हैं और इंडस्ट्री को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि एक मई से शुरू हुई अमेरिकी सेना की वापसी की पृष्ठभूमि में तालिबान ने पिछले महीने देश भर में लगभग सभी प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 15 अगस्त को राजधानी काबुल पर भी विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया था।
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इससे पहले तालिबान ने 6 सितंबर को पंजशीर के रूप में आखिरी प्रांत पर भी जीत का दावा किया था। इसके साथ ही दावा किया गया कि काबुल पर कब्जा करने के तीन सप्ताह बाद तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर अपना कब्जा पूरा कर लिया। तब से संगीत कलाकारों ने अपने वाद्ययंत्रों को घर पर ही रख लिया है या उन्हें स्टोर रूम में बंद कर दिया है। उन्हें डर है कि कहीं तालिबान फिर से संगीत पर प्रतिबंध न लगा दे, जैसा कि उसने 20 साल पहले किया था।
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पाकिस्तान जाने को मजबूर
इस बीच अपनी जान के डर से कुछ कलाकार और गायक पाकिस्तान भी पहुंचने लगे हैं। एक अफगान गायक पासुन मुनव्वर ने बताया कि तालिबान से हमें खतरा है। तालिबान के काबुल पर अधिकार करने के बाद सभी संगीत कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। एक अन्य गायक अजमल ने कहा कि उन्होंने अपनी पोशाक बदली और काबुल के पतन के बाद पेशावर पहुंच गए हैं। तालिबान से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है। हम उन्हें अपना भाई मानते हैं, लेकिन उनके शासन में असुरक्षित हैं क्योंकि उन्हें हमारा काम पसंद नहीं है।
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न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अफगान संगीत से प्यार करने वाले और पेशावर में इससे जुड़े गायक और संगीतकारों ने अफगानिस्तान में तेजी से बदलती स्थिति के कारण अपने कार्यालय बंद कर दिए हैं। इससे कारोबार ठप्प सा हो गया है और लाखों रुपये का घाटा हो रहा है। एक पाकिस्तानी कलाकार शाहजहां ने बताया कि जब भी वे संगीत कार्यक्रमों के लिए अफगानिस्तान जाते थे तो उन्हें पूरा सम्मान दिया जाता था। अफगान लोग संगीत को बहुत पसंद करते हैं।
पाकिस्तानी कलाकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव
उन्होंने कहा कि हम अपनी धरती पर अफगान कलाकारों और गायकों का स्वागत करते हैं, जो अफगानिस्तान में अपने जीवन के लिए डर या खतरे के कारण यहां आए हैं। अफगान तार वाले रबाब को बजाने वाले गुलाब अफरीदी ने बताया कि अफगानिस्तान में संगीत कार्यक्रमों पर प्रतिबंध से पाकिस्तानी कलाकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। अफगान गायक अशरफ गुलजार ने कहा कि तालिबान ने काबुल में सभी संगीत कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो संगीत उद्योग से जुड़े लोगों के लिए चिंता का विषय है।
अफगान संगीत कंपनियां दिवालिया हो रहीं
काबुल, जलालाबाद और अफगानिस्तान के अन्य बड़े शहरों में पाकिस्तानी कलाकारों के साथ निर्धारित संगीत कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं और इस तरह अफगान संगीत कंपनियां दिवालिया हो गई हैं। ज्यादातर मामलों में अफगानिस्तान में कार्यक्रमों के आयोजकों को अग्रिम भुगतान किया गया था। बोर्ड बाजार, हयाताबाद और जहांगीराबाद में अफगान संगीत कार्यालय बंद कर दिए गए हैं। इसी तरह दर्जनों कलाकार जो अफगानिस्तान के कुछ हिस्सों में फंसे हुए हैं, वे पाकिस्तान और अन्य विदेशी देशों के लिए देश छोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।