आतंक का खौफ: तालिबान के डर से भाग रहे पूर्व अफगानी दुभाषिए को पाकिस्तानी जासूसों ने घेरा, की गई कड़ी पूछताछ
तालिबान के डर से भार रहे ब्रिटिश सेना के लिए काम करने वाले अफगान दुभाषियों को पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों द्वारा सीमा पर घेरकर हिरासत में ले लिया गया।
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तालिबान के डर से भार रहे ब्रिटिश सेना के लिए काम करने वाले पूर्व अफगान दुभाषियों को पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों द्वारा सीमा पर घेरकर हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद अब इन सभी से कड़ी पूछताछ की गई।पूर्व अफगानी दुभाषियों ने कहा कि उन्हें सीमा पार करते समय पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों ने रोककर कड़ी पूछताछ की। इस दौरान उन्होंने कई गुप्त जानकारियां लेने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि इन सभी खुफिया अधिकारियों का तालिबान से संबंध था। अफगानी दुभाषियों ने कहा कि पूछताछ के दौरान ऐसा लग रहा था कि पाक के खुफिया अधिकारी तालिबान के लिए ही काम करते हैं।
सच्चाई बयां करने से कई नागरिकों की जान खतरे में पड़ जाती
दुभाषिए ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि वे जिस प्रकार की जानकारी की तलाश कर रहे हैं, वह तालिबान के लिए उन परिवारों की तलाश में काफी काम आ सकती है जो अब भी छिपे हुए हैं और बदला लेने की धमकी का सामना कर रहे हैं। एक पूर्व वरिष्ठ अनुवादक, शरीफ करीमी ने आपबीती सुनाते हुए कहा था कि यह डराने वाला था। मुझे बताया गया कि यह कुछ ऐसा है जो मुझे करना है नहीं तो मुझे अपने परिवार के साथ नहीं जाने दिया जाएगा।
अक्तूबर में अफगानी दुभाषिए अमन खलीली ने छोड़ दिया था देश
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन साल 2008 में सांसद रहते वक्त जब अमेरिकी सेना के हेलिकाप्टर में बैठे थे तब एक बर्फीले तूफान के कारण उन्हें वहीं घाटी में उतरना पड़ा था। यह घाटी सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील थी और तब एक अफगानिस्तानी दुभाषिए अमन खलीली ने सभी अमेरिकी सांसदों की सुरक्षित वापसी में मदद की। लेकिन अब उसी अमन खलीली को अपनी जान बचाने के लिए देश छोड़ना पड़ा है।