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तालिबान राज: दुनियाभर के देशों में अफगानी दूत और तीन हजार दूतावास कर्मचारी अधर में

Fri, 17 Sep 2021 06:45 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन Published by: देव कश्यप Updated Fri, 17 Sep 2021 06:45 AM IST
सार

तालिबान ने सभी दूतावासों से काम जारी रखने के लिए कहा है। कनाडा, जापान, जर्मनी सहित आठ देशों में दूतावास कर्मियों ने हालात को बेहद निराशाजनक बताया।

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Afghan envoy and three thousand embassy employees in countries around the world are in Problem
तालिबान (फाइल) - फोटो : ANI

विस्तार

अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के कारण सैकड़ों अफगान राजनयिक दुनियाभर के देशों में अधर में हैं। उनके पास दूतावास चलाने के लिए धन नहीं, साथ ही वे अफगानिस्तान में फंसे परिवार के लिए चिंतित हैं।

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हालात ये हैं कि वे दूतावास छोड़ विदेश में शरण लेने को बेताब हैं। हालांकि, तालिबान ने सभी दूतावासों से काम जारी रखने के लिए कहा है। कनाडा, जापान, जर्मनी सहित आठ देशों में दूतावास कर्मियों ने हालात को बेहद निराशाजनक बताया। एक वरिष्ठ राजनयिक ने बताया, करीब तीन हजार लोग दूतावासों में काम कर रहे हैं। बर्लिन स्थित एक अफगान राजनयिक ने कहा, मैं और मेरे साथी तैनाती वाले देशों में शरण मांग रहे हैं। उन्हें काबुल में मौजूद अपनी पत्नी व चार बेटियों की सुरक्षा की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा कि वे काबुल में अपना घर सहित सबकुछ बेच देंगे और अफगानिस्तान से बाहर फिर से नई जिंदगी शुरू करेंगे।

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निष्क्रिय हैं दूतावास
ब्रिटेन की नॉटिंघम यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ अध्येता अफजल अशरफ कहते हैं कि ज्यादातर दूतावास निष्क्रिय पड़े हैं। क्योंकि, तालिबान को मान्यता न मिलने से वे किसी सरकार का प्रतिनिधित्व नहीं करते, उन्होंने उम्मीद जताई कि ज्यादातर दूतावास कर्मचारियों को शरण दी जा सकती है। क्योंकि तालिबान क्रूर कृत्यों के लिए कुख्यात रहा है।

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तालिबान बोला, दूत देश की संपत्ति 
दूतावासों को काम जारी रखने का निर्देश देते हुए तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने कहा कि ये दूत देश की संपत्ति हैं। कनाडा में एक दूतावास कर्मी ने बताया कि फंड ही नहीं है तो वे कैसे काम जारी रखें। नई दिल्ली में दूतावास कर्मचारियों ने बताया कि हजारों अफगानाें को मदद की जरूरत है, लेकिन इतना धन नहीं है कि उनकी मदद कर पाएं। ऑस्ट्रिया में राजदूत मनिजा बख्तारी टि्वटर पर अफगानिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघनों पर लिखती रहती हैं। चीन में राजदूत जाविद अहमद कायम भी तालिबान के वादों पर भरोसा नहीं करने के लिए दुनिया को चेताते रहते हैं।

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