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Afghanistan: बीते साल आज ही के दिन अफगानिस्तान में तालिबान ने किया था तख्तापलट, अब तक नहीं बनी समावेशी सरकार

Mon, 15 Aug 2022 07:17 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
वर्ल्ड न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Mon, 15 Aug 2022 07:17 PM IST
सार

तालिबान ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अशरफ गनी सरकार के पतन के बाद काबुल में आज ही के दिन सत्ता पर कब्जा कर लिया था। अफगान राजनयिक ने कहा कि अफगान नागरिक तब से बुनियादी सेवाओं से वंचित हैं। उन्हें गंभीर मानवाधिकारों के हनन और उल्लंघन, गरीबी, दमन और भय का सामना करना पड़ता है। 

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Afghan diplomatic missions says Taliban rejected national and global appeals to create inclusive govt
तालिबान - फोटो : पीटीआई

विस्तार

तालिबान ने समावेशी सरकार बनाने की राष्ट्रीय और वैश्विक अपीलों को खारिज कर दिया है। दुनिया भर में अफगान राजनयिकों ने सोमवार को तालिबान शासन की पहली वर्षगांठ पर कहा कि तालिबान न केवल अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहा है, बल्कि कई कठोर नीतियां भी लागू कीं हैं। उन्होंने कहा कि देश में तालिबान ने महिलाओं पर कई तरह के कठोर प्रतिबंध भी लगाए हैं। यह बयान दिल्ली में अफगान दूतावास के एक अधिकारी ने दिया। 

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आज ही के दिन तालिबान ने किया था कब्जा
गौरतलब है कि तालिबान ने पिछले साल 15 अगस्त को ही अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा कर लिया था। तालिबान ने अमेरिकी सैनिकों की वापसी और अशरफ गनी सरकार के पतन के बाद काबुल में सत्ता पर कब्जा कर लिया था। अफगान राजनयिक ने कहा कि अफगान नागरिक तब से बुनियादी सेवाओं से वंचित हैं। उन्हें गंभीर मानवाधिकारों के हनन और उल्लंघन, गरीबी, दमन और भय का सामना करना पड़ता है। 
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भारत सहित अफगानिस्तान के अधिकांश राजनयिक मिशन अभी भी तालिबान शासन से स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तालिबान ने समावेशी और प्रतिनिधि सरकार के निर्माण के लिए लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अपीलों को खारिज कर दिया है, जो राजनीतिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
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प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में विफल रहा तालिबान
उन्होंने कहा कि तालिबान के अफगानिस्तान पर हिंसक और नाजायज कब्जे के बाद भी उन्हें नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सुनिश्चित करने और अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह नहीं बनने देने सहित अन्य प्रतिबद्धताओं को पूरा करने का अवसर दिया गया था। राजनयिक ने कहा कि एक साल बाद भी तालिबान न केवल अपनी सभी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहा है, बल्कि कठोर नीतियों और निर्देशों को फिर से लागू किया है।

तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा पर भी लगाया है प्रतिबंध
बयान में कहा गया है कि अन्य प्रतिबंधों के साथ ही तालिबान ने लड़कियों के शिक्षा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है।  साथ ही सार्वजनिक जीवन से महिलाओं और लड़कियों को काम करने और समाज में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए उनके मौलिक अधिकारों को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि लड़कियों को शिक्षा से रोकना न केवल गंभीर मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि देश की प्रगति और भविष्य को भी खतरे में डालता है।


इसके अलावा बयान में यह भी कहा गया है कि तालिबान ने देश में भय और शारीरिक और मनोवैज्ञानिक असुरक्षा का माहौल बना दिया है, जिससे सैकड़ों अफगान देश छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं।

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