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जलवायु परिवर्तन का हल: सूरज जैसी तकनीक से धरती पर ऊर्जा बनाने की कोशिश से जगी हैं नई उम्मीदें

Fri, 03 Jun 2022 03:39 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 03 Jun 2022 03:39 PM IST
सार

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक मानव समाज की जरूरत से कहीं ज्यादा मात्रा में ऊर्जा निर्मित करने में सक्षम होगी। मसलन, एक ग्राम ईंधन से उतनी फ्यूजन बिजली बन सकेगी, जितनी बनाने के लिए अभी आठ टन कच्चे तेल को जलाना पड़ता है...

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A project to generate nuclear power using fusion technology which is used in stars and sun, is underway in france
इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लीयर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर - फोटो : Agency

विस्तार

दक्षिण फ्रांस के क्षेत्र प्रोवेंस में सूरज पर होने वाली प्रक्रिया को धरती पर दोहराने की कोशिश आगे बढ़ रही है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ये कोशिश सफल रही, तो मानव समुदाय का आज का संभवतः सबसे बड़ा संकट दूर हो जाएगा। इस क्षेत्र के सेंट पॉल-लेज-दुरांस में फ्यूजन तकनीक से परमाणु ऊर्जा बनाने की परियोजना चल रही है। सूरज और तमाम सितारों पर ऊर्जा इसी विधि से पैदा होती है। अब तक धरती पर इस विधि से ऊर्जा पैदा करना कठिन बना हुआ है। लेकिन संभव है कि जल्द ही ये संभव हो जाए।

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वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर इस विधि से ऊर्जा तैयार होने लगी, तो मानवता जलवायु परिवर्तन के संकट से बच जाएगी। यह तकनीक मानव समाज की जरूरत से कहीं ज्यादा मात्रा में ऊर्जा निर्मित करने में सक्षम होगी। मसलन, एक ग्राम ईंधन से उतनी फ्यूजन बिजली बन सकेगी, जितनी बनाने के लिए अभी आठ टन कच्चे तेल को जलाना पड़ता है।

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एक मजाक जो सच होने के करीब

अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस में चल रही परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब देने से इनकार करते हैं कि फ्यूजन एनर्जी कब तक उपलब्ध हो सकेगी। एक वैज्ञानिक ने सीएनएन से मजाक में कहा- यह लक्ष्य हमेशा ही 30 वर्ष दूर रहा है। लेकिन इस रिपोर्ट में कहा गया है कि अब ये मजाक सच होने के करीब है। यानी यह संभव है कि सचमुच 30 वर्ष में सारी दुनिया को फ्यूजन तकनीक से तैयार ऊर्जा मिलने लगे।

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इस साल फरवरी में इंग्लैंड में ऑक्सफॉर्ड के करीब कुलहम गांव में चल रहे प्रयोग के दौरान वैज्ञानिक पांच सेकंड तक फ्यूजन एनर्जी उत्पन्न करने में सफल रहे। इस दौरान जितनी ऊर्जा पैदा हुई, उससे एक घर को एक दिन के लिए बिजली आपूर्ति करना संभव था। वैज्ञानिकों के मुताबिक जिन पांच सेकंडों में ये उपलब्धि हासिल हुई, उसे सचमुच एतिहासिक समय कहा जाएगा।  

फ्रांस में ये परियोजना इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लीयर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर (आईटीईआर) नाम से चल रही है। इंग्लैंड से आई खबर से इस परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक बेहद उत्साहित हुए। उनके मुताबिक मुख्य मकसद यह सिद्ध करना है कि कारोबारी उपयोग के लिए फ्यूजन एनर्जी पैदा की जा सकती है। अगर ऐसा हो गया, तो फिर दुनिया को फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ऊर्जा) यानी कोयला, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। जीवाश्म ऊर्जा ही जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण है।

विखंडन से बेहतर है फ्यूजन

इस समय जबकि दुनिया गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, आईटीईआर से मिल रही छोटी खबरें भी बड़ी उम्मीदें पैदा कर रही हैं। लेकिन इसी बीच एक दुखद खबर आई। इस परियोजना के महानिदेशक बर्नार्ड बिगॉट का पिछले 14 मई को निधन हो गया। मृत्यु से कुछ दिन पहले उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था- ‘ऊर्जा ही जीवन है- जैविक, सामाजिक, या आर्थिक हर क्षेत्र पर ये बात लागू होती है।’ अब उनके साथियों ने दुनिया को ये जीवन देने की कोशिश में अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी है।



अभी जो परमाणु ऊर्जा बनती है, वह विखंडन तकनीक से बनती है। इसमें एक खास तापमान पर ले जा कर अणुओं को विखंडित किया जाता है, जिस दौरान बड़े पैमाने पर ऊर्जा निकलती है। फ्यूजन तकनीक प्राकृतिक रूप से विकर्षण करने वाले दो अणुओं को वैज्ञानिक तकनीक से एक दूसरे से मिलाया जाएगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस प्रक्रिया से विखंडन की तुलना में भी ज्यादा ऊर्जा पैदा होगी।

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