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रूस पर पाबंदियों की झड़ी: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में प्रतिबंधों की राजनीति क्या है? आर्थिक बंदिशों का क्या असर होता है?

Wed, 23 Feb 2022 01:16 PM IST
Pratibha Jyoti प्रतिभा ज्योति
Updated Wed, 23 Feb 2022 01:16 PM IST
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सार
जब कोई देश किसी दूसरे देश के हमलावर तेवर या रवैए पर रोक लगाने या अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने के आरोप में उसके खिलाफ कार्रवाई करता है तो कूटनीतिक व्यवहार में इसका मतलब ‘प्रतिबंध’ से होता है। इसका अर्थ किसी देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना भी होता है।
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a flurry of sanctions on russia US President Joe Biden issued many sanctions on russia after putin troop movements in eastern ukraine what is the politics of sanctions in international diplomacy?
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन। - फोटो : Social Media

विस्तार

युद्ध की आशंका के बीच रूस ने मंगलवार को यूक्रेन के दो टुकड़े करते हुए उसके लुहांस्क- डोनेत्स्क को स्वतंत्र घोषित कर दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस की सेनाएं अब इन इलाकों में शांति स्थापित करेगी। यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और पोलैंड समेत कई देशों ने दावा किया कि रूसी सेनाएं पूर्वी यूक्रेन में घुस चुकी हैं। रूस के इस कदम के बाद अमेरिका-यूरोप बिफरे और रूस पर कड़ी पाबंदियों का एलान कर दिया है।


अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने एक आदेश जारी कर अमेरिकी लोगों के डोनेत्सक और लुहांस्क में सभी नए निवेश, व्यापार और वित्त पोषण पर रोक लगा दी है। यूरोपीय संघ में शामिल 27 देशों ने रूस के राजनेताओं और उद्योगपतियों के पाबंदी की बात कही। वहीं ब्रिटेन ने पांच रूसी बैंक और तीन अरबपतियों पर पाबंदी लगा दी है। उनकी संपत्ति भी फ्रीज की जा रही है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने भी रूस के खिलाफ कई पाबंदियों का एलान भी किया है। 


दूसरी तरफ जर्मनी ने रूस से आ रही नॉर्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइपलाइन परियोजना बंद करने का फैसला किया है। आने वाले समय में इसी से जर्मनी को गैस की आपूर्ति होनी थी। दरअसल अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ इन पाबंदियों और सख्तियों के जरिए रूस को अलग-थलग करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि पुतिन को रोकने के लिए लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंध रूस के खिलाफ अहम हथियार साबित हो सकता है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में प्रतिबंधों का क्या मतलब है?    
पूर्व विदेश सचिव शशांक बताते हैं 'अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में प्रतिबंध सबसे आम और विवादास्पद हथियारों में से एक है। अब किसी देश पर प्रतिबंध लगाना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का स्वीकार्य हिस्सा बन चुका है। जिस देश पर प्रतिबंध लगता है, उसकी प्रतिष्ठा का नुकसान पहुंचता है, क्योंकि उसके साथ राजनयिक संबंध तोड़कर उस देश को अकेला करने का प्रयास किया जाता है। जिसकी इकोनॉमी मजबूत होती है वह ही दूसरे देशों पर प्रतिबंध लगाते हैं, लेकिन जो कमजोर देश होते हैं, उस पर इसका गहरा बहुत असर होता है।' 

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : PTI
प्रतिबंध का क्या असर होता है? 
प्रतिबंधों में सबसे ज्यादा प्रचलित आर्थिक पाबंदियां है। आर्थिक प्रतिबंध सरकारों के लिए एक- दूसरे अस्वीकृत करने का भी एक तरीका है। आर्थिक प्रतिबंध से इसे झेलने वाले देश की अर्थव्यवस्था पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। जिन देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाया जाता है उसके आयात-निर्यात रद्द कर दिए जाते हैं, आपूर्ति और सभी आर्थिक गतिविधियों के क्षेत्र में बाधा पहुचंती है और निवेश पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके तहत उसके साथ व्यापार समझौते रद्द कर दिए जाते हैं, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा मिलने वाली विदेशी फंडिंग भी रोक दी जाती है। इससे वे देश भी चपेट में आ जाते हैं जो उनके साथ व्यापार कर रहे हैं।

उदाहरण क्या?
उदाहरण के लिए 2015 में ईरान और अमेरिका परमाणु डील पर एकमत हुए। नतीजे में अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंध हटा लिए। इसके अगले ही साल ईरान की अर्थव्यवस्था में उछाल आई और जीडीपी में 12.3 फीसदी बढ़ोतरी हुई। मगर 2018 में जैसे ही प्रतिबंध दोबारा लगे, उसकी जीडीपी-3 से भी नीचे चली गई। 2019 में तो यह -10 तक नीचे गिर गई। यही नहीं उसके तेल उत्पादन में भी भारी गिरावट हो गई।

इसी तरह क्रीमिया पर हमले के बाद 2014 में रूस पर सीमित आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे। अब तक वहां जीडीपी ग्रोथ 0.3 फीसदी से ऊपर नहीं पाई है। शशांक कहते हैं ‘यूक्रेन पर युद्ध की आशंका के मद्देनजर रूस पर जो पाबंदियां लगी हैं उससे उसकी अर्थव्यवस्था पर असर तो पड़ेगा ही।’

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI
प्रतिबंध लगाने में अमेरिका सबसे आगे
अमेरिकी विदेश नीति में प्रतिबंध लगाना बहुत आसान बात है। दुनिया भर में अमेरिका ऐसा देश है जो अन्य देशों पर सबसे ज्यादा प्रतिबंध लगाता है। शीत युद्ध के बाद किसी भी देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाना अमेरिका के लिए सबसे आसान उपकरण बन गया। यह एक ऐसा हथियार है, जिसका इस्तेमाल वह 200 से भी ज्यादा साल से करता आ रहा है। हालांकि अमेरिका की दलील यह भी रही है कि वह उन देशों पर प्रतिबंध लगाता है जो आतंकवाद को प्रायोजित करते हैं या अपने लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं। वह चाहे तो पूरे राष्ट्र या विशिष्ट व्यक्तियों या संस्थाओं पर प्रतिबंध लगा देता है। 

अमेरिका ने किन-किन देशों पर प्रतिबंध लगाया है?
अमेरिका की पाबंदी और सख्ती का सामना अब तक कई देश कर चुके हैं। 2019 के मई मई तक अमेरिका 9,967 आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिका ने इसके लिए 1950 में आफिस आफ फॉरन एसेट कंट्रोल (ओएफएसी) का गठन किया था। इसका प्रमुख काम अमेरिकी की नीतियों के खिलाफ काम कर रहे देशों पर प्रतिबंध लगाना और उनकी समीक्षा करना है। 

पहला प्रतिबंध किस पर?
अमेरिका ने सबसे पहले किसी तरह का प्रतिबंध का प्रयोग 1812 की युद्ध के दौरान लगाया था। उसने अमेरिकी नौसैनिकों को प्रताड़ना देने के आरोप में ग्रेट ब्रिटेन पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे।  1950 में चीन और उत्तर कोरिया पर भी अमेरिका ने पाबंदी लगाई थी।

तब से लेकर अब तक अमेरिका कई देशों पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति उसके उच्च अधिकारियों को निशाना बनाया और उनके अमेरिका प्रवेश करने पर रोक लगा दिया। अमेरिकी फर्मों को भी वेनेजुएला के साथ व्यापार करने से मना कर दिया गया। 2019 में अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ राजनयिक संबंध भी तोड़ लिए।

क्यूबा
क्यूबा - फोटो : Social Media
अमेरिका ने रूस पर उससे किसी के हथियार खरीदने पर प्रतिबंध लगा दिया है। तुर्की रूस से हथियार खरीदना चाहता था तो अमेरिका ने उस पर भी प्रतिबंध लगाने की धमकी दी। अमेरिकी प्रशासन ने चीन के ऊपर कई तकनीकी प्रतिबंध लगा रखे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल रहने पर अमेरिका ने 2020 में नाइजीरिया, तंजानिया, सूडान, किर्गिस्तान और म्यांमार पर यात्रा प्रतिबंध लगा दिए। ईरान, लीबिया, सोमालिया, सीरिया, यमन, वेनेजुएला, उत्तर कोरिया पर भी ट्रंप प्रशासन इसी तरह का प्रतिबंध 2017 में लगा चुका है।

ये देश झेल चुके हैं प्रतिबंध
जून 2021 तक, बाल्कन, बेलारूस, बर्मा, बुरुंडी, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, क्यूबा, कांगो, हांगकांग, ईरान, इराक, लेबनान, लीबिया, माली, निकारागुआ, उत्तर कोरिया, सोमालिया, सूडान, दक्षिण सूडान, सीरिया, रूस, वेनेजुएला, यमन और जिम्बाब्वे जैसे देशों ने अधिक या आंशिक अमेरिकी प्रतिबंध झेला है। 

सबसे ज्यादा प्रतिबंध किन देशों ने झेला है?
क्यूबा, ईरान, उत्तर कोरिया और सीरिया जैसे देशों ने अमेरिका का सबसे ज्यादा प्रतिबंध झेला है। क्यूबा के हालात को देखते हुए अमेरिका ने 1992 से उस पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। सूडान के गृह युद्ध और खराब मानवाधिकारों के चलते अमेरिका ने 1986 से समय-समय पर प्रतिबंध लगाए। इन देशों के अलावा अमेरिका ने कई प्रतिबंध नशे की तस्करी, आतंकवाद और साइबर अपराधों और मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर भी लगाया है। 

यूरोपीय यूनियन
यूरोपीय यूनियन - फोटो : Social Media
क्या यूरोप भी प्रतिबंध लगाता है?
यूरोपीय यूनियन के दूसरे देशों पर प्रतिबंध लगाने का लंबा इतिहास रहा है। हालांकि यूनियन यह घोषणा करता है कि वह आतंकवाद से लड़ने, सामूहिक विनाश के हथियार को रोकने और मानवाधिकारों के सम्मान की रक्षा के लिए देशों पर प्रतिबंध लगाता है। यूरोपीय संघ अपने प्रतिबंध गैर-यूरोपीय संघ के देशों की सरकारों के साथ-साथ कंपनियों, समूहों, संगठनों या व्यक्तियों पर लगाता है। यूरोपीय संघ ने कई देशों पर प्रतिबंध लगा रखा है। जैसे बेलारूस, बुरुंडी, उत्तर कोरिया, कांगों, ईरान, लेबनान, लीबिया, माली, सोमालिया और हैती समेत कई देशों पर किसी न किसी तरह का प्रतिबंध लगाया। 
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