11 सितंबर 2001: जब दुनिया ने आतंक और दहशत का सबसे भयावह रूप देखा  

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 11 Sep 2020 12:25 PM IST
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11 सितंबर 2001, यही वो दिन था जब दुनिया ने आतंक और दहशत का सबसे भयावह रूप देखा था। इसी दिन 19 साल पहले अमेरिका ने उस मंजर का सामना किया था जिसकी कल्पना भी उसने कभी नहीं की थी। अमेरिका में अबतक का सबसे खतरनाक आंतकी हमला इसी दिन हुआ था। न्यूयॉर्क की शान कही जाने वाली इमारत वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला हुआ और ये पलभर में राख हो गई। अल कायदा के आतंकी हमले में सैकड़ों बेगुनाह अमेरिकी नागरिकों की जान चली गई। जानते हैं कि आखिर 11 सितंबर के हुई भयावह दिन क्या हुआ था। कैसे आतंकियों ने अबतक का सबसे खौफनाक आतंकी हमला अंजाम दिया था। 
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दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के लिए 11 सितंबर 2001 का दिन दहशत भरा था। आतंकी हमले ने सबसे ताकतवर देश की रूह कंपा दी थी। इस हमले ने अमेरिका को हिलाकर रख दिया था। हमले को अंजाम दिया था आतंकी संगठन अल कायदा के आतंकियों ने। जिस तरीके से इसे अंजाम दिया गया वैसा इससे पहले कभी नहीं हुआ था। अल कायदा के आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहण कर लिया था। इसके बाद चार में से दो विमान न्यूयॉर्क शहर में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकरा दिए। तीसरा विमान पेंटागन पर और चौथा विमान जंगल में गिरा दिया। हमले में व्यापक तबाही हुई।
11 सितंबर की सुबह 8:46 बजे, अमेरिकी एयरलाइंस की फ्लाइट 11 वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के नॉर्थ टॉवर और दूसरी फ्लाइट 9:03 बजे साउथ टॉवर से टकराई। इस भयावह हमले में विमान में सवार यात्रियों सहित 2974 लोग मारे गए और करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ। मरने वालों में 343 फायर विभाग और 60 पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। मरने वाले लोगों में 70 अलग-अलग देशों के नागरिक थे। इसे अंजाम देने वाले 19 आतंकियों की भी इसमें मौत हुई। 
19 आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया 
इस खौफनाक हमले को अंजाम दिया था अल कायदा 19 आतंकियों ने जिन्होंने विमानों को हाइजैक कर इसे इमारत से टकरा दिया। इनमें से 15 सऊदी अरब के थे और बाकी यूएई, मिस्र और लेबनान के रहने वाले थे। इन 19 आतंकियों का सरगना मिस्र का मोहम्मद अत्ता था जो पायलट की ट्रेनिंग ले चुका था। वो भी बाकी आतंकियों के साथ ही मारा गया। 
जांच में सामने आया कि 9/11 का मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद था। वह ओसामा बिन लादेन का खास आदमी था। इस खौफनाक हमले की तैयारी साल 1996 से ही शुरू हो गई थी। इसे पांच साल बाद अंजाम दिया गया। जिस तरीके इसे इस हमले को अंजाम दिया गया, उसने जांचकर्ताओं के भी होश उड़ा दिए।   

अमेरिका का पलटवार और लादेन का खात्मा

राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ओसामा बिन लादेन और उसके आतंकी संगठन अल कायदा को खत्म करने की ठान ली थी। इसके साथ ही अफगानिस्तान से तालिबानी शासन हटाने की कवायद भी तेज कर दी गई। 

राष्ट्रपति बुश ने अफगानिस्तान में अपनी सेनाएं भेजीं ताकि ओसामा और उसके साथियों का पता लगाया जा सके। लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल सकी। अरबों डॉलर फूंके जाने के बाद भी बुश खाली हाथ रहे। हालांकि तालिबान को जरूर एक बड़े हिस्से से उखाड़ फेंका गया। लेकिन लादेन हाथ नहीं आया। हमले में निर्दोष नागरिकों की भी जान गई। आखिरकार बुश के बाद अमेरिका के नए राष्ट्रपति बराक ओबामा के शासनकाल के दौरान लादेन को अमेरिका ने ढूंढ़ निकाला। दो मई 2011 की रात को दुनिया के खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन का खात्मा हुआ था। पाकिस्तान के एबटाबाद में एक गुप्त कार्रवाई में उसे मार गिराया गया। इस तरह पूरे दस साल बाद अमेरिका ने 9/11 का बदला लिया। 



 
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