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Britain: 50 भारतीय छात्र आधुनिक गुलामी के शिकार, भारतीय उच्चायोग की अपील- मदद के लिए संपर्क करें पीड़ित
Sat, 11 Feb 2023 04:42 AM IST
गुलाम अहमद
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: गुलाम अहमद
Updated Sat, 11 Feb 2023 04:42 AM IST
सार
श्रम शोषण के लिए ब्रिटिश सरकार की एजेंसी गैंगमास्टर्स एंड लेबर एब्यूज अथॉरिटी (जीएलएलए) ने पिछले 14 महीनों में कई छात्रों को आधुनिक दासता के संभावित शिकार के रूप में पहचाना है। भारतीय उच्चायोग ने इस घटना पर चिंता जताई है। उच्चायोग ने संपर्क करने वाले भारतीयों की पहचान गुप्त रखने का भरोसा दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
ब्रिटेन में 50 से अधिक भारतीय छात्रों के आधुनिक गुलामी का शिकार होने की आशंका है। मूलरूप से केरल के रहने वाले पांच लोगों पर इन छात्रों से नॉर्थ वेल्स के केयर होम्स में काम कराने का आरोप है। ब्रिटेन की एक अदालत ने इन पांचों के खिलाफ श्रम शोषण के आरोपों की जांच का आदेश दिया है। वहीं, भारतीय उच्चायोग ने पीड़ितों से अपील की है कि वे मदद के लिए संपर्क करें।
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श्रम शोषण के लिए ब्रिटिश सरकार की एजेंसी गैंगमास्टर्स एंड लेबर एब्यूज अथॉरिटी (जीएलएलए) ने पिछले 14 महीनों में कई छात्रों को आधुनिक दासता के संभावित शिकार के रूप में पहचाना है।
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कमजोर तबके के छात्रों के शोषण की आशंका...
कमजोर तबके के छात्रों की भर्ती और शोषण कराने के आरोपियों मैथ्यू इसाक (32), जिनू चेरियन (30), एल्डहोस चेरियन (25), एल्डहोस कुरियाचन (25) और जैकब लिजू (47) को गुलामी और तस्करी जोखिम आदेश (एसटीआरओ) सौंपा गया है। इस आदेश के उल्लंघन पर पांच साल तक की सजा हो सकती है।
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पीड़ितों की पहचान रखी जाएगी गोपनीय
भारतीय उच्चायोग ने इस घटना पर चिंता जताई है। उच्चायोग ने संपर्क करने वाले भारतीयों की पहचान गुप्त रखने का भरोसा दिया है। आधुनिक गुलामी में पीड़ितों का शोषण किया जाता है, नियंत्रित किया जाता है या बंदी बनाया जाता है।
निर्वासन के डर से भारतीय छात्रा लापता
अमेरिका के अर्कांसस प्रांत में एक 14 वर्षीय भारतीय-अमेरिकी स्कूली छात्रा तीन सप्ताह से अधिक समय से लापता है। इस मामले में पुलिस ने संकेत दिया कि लड़की अमेरिका छोड़ने के डर से संभवत: कहीं चली गई, क्योंकि ‘टेक इंड्रस्ट्री’ में उसके पिता को नौकरी में छंटनी का सामना करना पड़ सकता है। कॉनवे पुलिस विभाग (सीपीडी) ने कहा कि अर्कांसस के कॉनवे में रहने वाली तन्वी मारुपल्ली को आखिरी बार 17 जनवरी को उसके पड़ोस में देखा गया था, जब वह बस से स्कूल के लिए निकली थी।
पुलिस ने कहा है कि उनका मानना है कि उसके भागने के संभावित कारणों में से एक उसके परिवार को निर्वासित किए जाने का डर है। तन्वी के माता-पिता का मानना है कि परिवार की अप्रवासन स्थिति के कारण उनकी बेटी घर छोड़ गई। वहीं, पिता ने कहा है कि उनके नौकरी गंवाने का जोखिम अब नहीं है और फिलहाल देश छोड़ने की स्थिति भी नहीं हैं।