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भारत में 50 वर्षों में 4.58 करोड़ लड़कियां हुईं लापता, 9 राज्यों में बेटों के मुकाबले बेटियां कम

Wed, 01 Jul 2020 09:28 AM IST
योगेश साहू न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 01 Jul 2020 09:28 AM IST
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India accounts for 45.8 million of the worlds missing females says UN report
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

यूएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के बाद भारत में महिलाओं के लापता होने की संख्या सबसे ज्यादा है। मंगलवार को जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पिछले 50 वर्षों के दौरान 4.58 करोड़ महिलाएं लापता हुई हैं, जबकि दुनियाभर में लापता होने वाली महिलाओं की संख्या 14.26 करोड़ है।

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संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष द्वारा जारी स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन 2020 की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 50 सालों में लापता होने वाली महिलाओं की संख्या विश्व में दोगुने से अधिक हो गई है। यह 1970 में 6.1 करोड़ थी जो अब 2020 तक बढ़कर 14.26 करोड़ हो गई है। इस वैश्विक आंकड़े में भारत में 2020 तक लापता महिलाओं की संख्या 4.58 करोड़ और चीन की 7.23 करोड़ है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि 2013 और 2017 के बीच भारत में लगभग 4.60 लाख लड़कियां हर साल जन्म के समय लापता हो जाती हैं। एक विश्लेषण के अनुसार, लिंग परीक्षण की वजह से कुल लापता लड़कियों की संख्या लगभग दो-तिहाई है और जन्म के बाद की महिला मृत्यु दर लगभग एक-तिहाई है।
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रिपोर्ट के आंकड़े

  • 1970 में लापता महिलाओं की संख्या 6.1 करोड़ थी।
  • 2020 में लापता महिलाओं की संख्या 14.26 करोड़ हो गई।
  • 4.58 करोड़ महिलाएं लापता हुईं 2020 तक भारत में।
  • 7.23 करोड़ महिलाएं लापता हुईं वर्ष 2020 तक चीन में।

जन्म के बाद लापता होती हैं लड़कियां

यूएनएफपीए के कार्यकारी डॉ. नतालिया कनेम ने बताया कि प्रसव पूर्व लिंग आधारित के कारण लड़कियां ज्यादा लापता हो रही हैं। भारत में लगभग 4,60,000 लड़कियां हर साल जन्म के समय ही लापता हो जाती हैं। भारत की पंजीकरण प्रणाली सांख्यिकीय रिपोर्ट 2018 में जन्म के समय लिंगानुपात दर्ज किया गया है जो 2016-18 की अवधि के दौरान पैदा हुए प्रत्येक 1000 लड़कों के लिए 899 है।

नौ राज्यों में लिंगानुपात 900 से कम

भारत के नौ राज्यों में जन्म के समय लिंगानुपात 900 से कम है। इनमें हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, यूपी, महाराष्ट्र, पंजाब और बिहार शामिल हैं। रिपोर्ट में यूएनएफपीए इंडिया के प्रतिनिधि ने कहा कि हमें समानता, स्वायत्तता और पसंद के सिद्धांतों पर आगे बढ़ने की जरूरत है। डॉ. कनेम ने कहा, हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक सभी लड़कियों के अधिकार और विकल्प पूर्णत: उनके नहीं हो जाते।

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