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अंतरिक्ष का दिग्गज: दुनिया के सबसे बड़े टेलिस्कोप का 70% काम पूरा, क्या अब खोजेगा पृथ्वी जैसा कोई दूसरा ग्रह?
Sun, 30 Aug 2026 05:50 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सैंटियागो
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, सैंटियागो
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Sun, 30 Aug 2026 05:50 AM IST
सार
चिली के अटाकामा मरुस्थल में बन रहे दुनिया के सबसे बड़े टेलिस्कोप का 70 फीसदी से ज्यादा काम पूरा हो चुका है। 35 लाख किलोग्राम भारी इसका मुख्य ढांचा पहली बार अपनी धुरी पर घुमाया गया है। 2030 के अंत तक काम शुरू करने वाला यह टेलिस्कोप पृथ्वी जैसे नए ग्रहों की सीधी तस्वीरें लेने के साथ उनके वातावरण में जीवन के संकेत खोजेगा। क्या यह ब्रह्मांड की सबसे बड़ी पहेलियां सुलझा पाएगा? आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से समझते हैं...
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ब्रह्मांड
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
इंसान अब ब्रह्मांड के उन हिस्सों को देखने की तैयारी कर रहा है, जहां आज तक पहुंचना बेहद मुश्किल रहा है। चिली के अटाकामा मरुस्थल में बन रहे दुनिया के सबसे बड़े टेलिस्कोप यानी ईएलटी का 70 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है। यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी की ओर से बनाए जा रहे इस विशाल टेलिस्कोप का मुख्य ढांचा हाल ही में पहली बार अपनी धुरी पर सफलतापूर्वक घुमाया गया। यह टेलिस्कोप 2030 के अंत तक अंतरिक्ष को देखना शुरू कर सकता है।
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35 लाख किलो के ढांचे को घुमाना क्यों था जरूरी?
टेलिस्कोप का मुख्य ढांचा करीब 3,500 टन यानी 35 लाख किलोग्राम भारी है। इसे रात के आकाश में किसी भी दिशा में बेहद सटीक तरीके से मोड़ना जरूरी होगा। इसी क्षमता की जांच के लिए ढांचे को पहली बार उसकी धुरी पर घुमाया गया। यह परीक्षण सफल होना टेलिस्कोप के निर्माण में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। इसका मुख्य शीशा करीब 39 मीटर यानी 128 फीट चौड़ा होगा, जो इंसानी आंख की तरह काम करते हुए बेहद दूर की वस्तुओं से आने वाली रोशनी को पकड़ सकेगा।
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क्या यह दूसरे ग्रहों पर जीवन के संकेत खोज पाएगा?
ईएलटी का सबसे बड़ा मकसद सौरमंडल के बाहर मौजूद पृथ्वी जैसे ग्रहों की तलाश करना है। यह उन पथरीले ग्रहों की सीधी तस्वीर लेने की कोशिश करेगा, जो दूसरे तारों की परिक्रमा कर रहे हैं। जब किसी बाहरी ग्रह के वातावरण से होकर उसके तारे की रोशनी गुजरेगी, तब टेलिस्कोप उस रोशनी का बारीकी से विश्लेषण करेगा। इससे पता चल सकेगा कि ग्रह के वातावरण में कौन-कौन सी गैसें मौजूद हैं और वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां हैं या नहीं।
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इंसानी आंख से कितना ज्यादा ताकतवर होगा यह टेलिस्कोप?
यह टेलिस्कोप इंसानी आंख की तुलना में करीब 10 करोड़ गुना ज्यादा ताकतवर होगा। इसकी तस्वीरें हबल स्पेस टेलीस्कोप से भी करीब 16 गुना ज्यादा साफ होने की उम्मीद है। हबल अंतरिक्ष में पृथ्वी से लगभग 500 किलोमीटर ऊपर रहकर ब्रह्मांड की तस्वीरें लेता है, जबकि ईएलटी को धरती पर ही चिली के सेरो आर्माजोन्स पहाड़ पर करीब 3,046 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। इतनी ऊंचाई और साफ वातावरण से अंतरिक्ष का अध्ययन और बेहतर हो सकेगा।
ब्रह्मांड की शुरुआत के बारे में क्या पता चलेगा?
ईएलटी सिर्फ नए ग्रहों की तलाश तक सीमित नहीं रहेगा। यह बिग बैंग के तुरंत बाद बनीं ब्रह्मांड की सबसे पहली आकाशगंगाओं की तस्वीरें लेने की कोशिश करेगा। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि शुरुआती ब्रह्मांड कैसा था और आकाशगंगाएं कैसे बनीं। इसके अलावा यह ब्रह्मांड के फैलने की गति को भी मापेगा। इससे डार्क एनर्जी और डार्क मैटर जैसे रहस्यमय विषयों को समझने में नई जानकारी मिल सकती है।
क्या पहली बार पृथ्वी जैसे ग्रह की सीधी तस्वीर मिलेगी?
अभी के टेलिस्कोप अक्सर किसी ग्रह की मौजूदगी का अनुमान उसके तारे की रोशनी में होने वाले बदलाव से लगाते हैं। ईएलटी इससे आगे जाकर दूसरे तारों की परिक्रमा कर रहे पथरीले ग्रहों की सीधी तस्वीर लेने की कोशिश करेगा। ग्रह के वातावरण से गुजरने वाली रोशनी में मौजूद संकेतों का अध्ययन करके उसकी गैसों की पहचान की जा सकेगी। यही जानकारी यह समझने में अहम होगी कि किसी दूर के ग्रह पर जीवन के लिए जरूरी परिस्थितियां मौजूद हैं या नहीं।