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152 देशों के 11 हजार वैज्ञानिकों ने किया जलवायु आपातकाल का एलान

Thu, 07 Nov 2019 03:35 AM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 07 Nov 2019 03:35 AM IST
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11 thousand scientists from 152 countries declared climate emergency
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

एक तरफ जलवायु परिवर्तन को लेकर अमेरिका पेरिस समझौते से बाहर होने की औपचारिक घोषणा कर चुका है और दूसरी तरफ 153 देशों के 11 हजार से ज्यादा वैज्ञानिकों ने जलवायु आपातकाल का एलान कर दिया है। इन वैज्ञानिकों ने चेताया है कि यदि भूमंडल के संरक्षण के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए जाते हैं तो ‘अनकही पीड़ा’ सामने आएगी।

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इन वैज्ञानिकों ने एकदम स्पष्ट रूप से कहा है कि पर्यावरण को लेकर दुनिया को अब गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। भारत और चीन जैसे देशों में बढ़ते प्रदूषण के बीच इन वैज्ञानिकों ने जलवायु आपातकाल की घोषणा ‘बायोसाइंस पत्रिका’ में एक शोध रिपोर्ट में प्रकाशित की है। इस पर हस्ताक्षर करने वाले वैज्ञानिकों ने लिखा है, ‘हमारा यह नैतिक दायित्व है कि हम किसी भी ऐसे संकट के बारे में स्पष्ट रूप से आगाह करें जिससे महान अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा हो।’ 
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वैज्ञानिकों की इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले ओरेगॉन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता विलियम रिपल और क्रिस्टोफर वुल्फ लिखते हैं, ‘वैश्विक जलवायु वार्ता के 40 वर्षों के बाद भी हमने अपना कारोबार उसी तरह से जारी रखा है और इस विकट स्थिति को दूर करने में विफल रहे हैं। जलवायु संकट आ गया है और हमारी उम्मीदों से कहीं अधिक तेजी से यह बढ़ रहा है।’
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छह कदम उठाने के सुझाव

इस घोषणा पर हस्ताक्षर करने वाले दुनिया के 11 हजार वैज्ञानिकों ने जलवायु आपातकाल से निपटने के लिए छह सुझाव दिए हैं। इनमें जीवाश्म ईंधन की जगह उर्जा के अक्षय स्रोतों का इस्तेमाल, मीथेन गैस जैसे प्रदूषकों का उत्सर्जन रोकना, पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा, वनस्पति भोजन के इस्तेमाल व मांसाहार घटाना, कार्बन मुक्त अर्थव्यवस्था का विकास और जनसंख्या को कम करना शामिल है। उन्होंने सुझाव दिया कि पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने के लिए हमें मानवीय कार्य करना होगा, क्योंकि हमारा एक ही घर है और वह सिर्फ पृथ्वी ही है।

मांसाहार छोड़ने की अपील

वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए छह सुझावों में से एक मांसाहार छोड़ने की अपील भी है। वैज्ञानिकों ने दुनिया में लोगों से शाकाहार की तरफ बढ़ने का आग्रह करते हुए लोगों से ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जी खाने को कहा है। इससे मीथेन और ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी आएगी। वैज्ञानिकों ने खाना भी कम से कम बर्बाद करने की अपील की है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब एक तिहाई खाना दुनिया में बर्बाद होता है।

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