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सैन्य तख्तापलट: म्यांमार से 10000 शरणार्थी भारत और थाईलैंड भागे
Tue, 22 Jun 2021 03:49 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र।
एजेंसी, संयुक्त राष्ट्र।
Published by: Jeet Kumar
Updated Tue, 22 Jun 2021 03:49 AM IST
सार
मध्य म्यांमार और चीन, भारत एवं थाईलैंड की सीमा से लगे क्षेत्रों समेत पूरे देश में संघर्षों के कारण लगभग 1,75,000 नागरिक विस्थापित हुए हैं।
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संयुक्त राष्ट्र
- फोटो : Social Media
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विस्तार
म्यांमार में संघर्ष के चलते करीब 10,000 शरणार्थी भारत और थाईलैंड भाग गए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की म्यांमार संबंधी मामलों की विशेष दूत क्रिस्टीन श्रेनर बर्गनर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह जानकारी दी।
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उन्होंने कहा, म्यांमार में सभी पक्षों के साथ बातचीत में गंभीर हालात का पता चला है। लोग अभावों में रह रहे हैं, उनके पास कोई उम्मीद नहीं है और वे डर के साए में जी रहे हैं।
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क्रिस्टीन ने कहा, कोई अंतरराष्ट्रीय कदम न उठाए जाने की वजह से आम नागरिक रक्षा बल बना रहे हैं। वे स्व-निर्मित हथियारों का उपयोग करते हैं और जातीय सशस्त्र संगठनों से सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं। देश के उन क्षेत्रों में भी अशांति है, जिन्होंने दशकों से सशस्त्र संघर्ष नहीं देखा है।
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उन्होंने कहा, मध्य म्यांमार और चीन, भारत एवं थाईलैंड की सीमा से लगे क्षेत्रों समेत पूरे देश में संघर्षों के कारण लगभग 1,75,000 नागरिक विस्थापित हुए हैं। संकट का क्षेत्रीय खतरा वास्तविक है। हमें अधिकतम संयम का आह्वान करते रहना चाहिए और सभी प्रकार की हिंसा की निंदा करनी चाहिए। बड़े पैमाने पर गृहयुद्ध का खतरा वास्तविक है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को रोहिंग्या लोगों को नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि रोहिंग्याओं के हालात गंभीर हैं और महासभा को इस मामले को संज्ञान में रखना चाहिए।
म्यांमार के खिलाफ प्रस्ताव पर मतदान से भारत ने बनाई दूरी
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने म्यांमार की सैन्य सरकार के खिलाफ व्यापक वैश्विक विरोध जताते हुए बीते शुक्रवार को एक प्रस्ताव पारित कर देश में सैन्य तख्तापलट की निंदा की। महासभा ने उसके खिलाफ शस्त्र प्रतिबंध का आह्वान किया और लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार को बहाल करने की मांग की है।
हालांकि, भारत, बांग्लादेश, भूटान, चीन, नेपाल, थाईलैंड और लाओस समेत 36 देशों ने इस प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत का कहना है कि मसौदा प्रस्ताव उसके विचारों के मुताबिक नहीं है। इसके पक्ष में 119 देशों ने मतदान किया। बेलारूस एकमात्र ऐसा देश था जिसने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।