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100 Days Cough: ब्रिटेन में बेहद संक्रामक बीमारी का अलर्ट जारी, मरीजों को 100 दिनों तक हो रही खांसी
Sun, 10 Dec 2023 03:05 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 10 Dec 2023 03:05 PM IST
सार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान इस बीमारी के मामले घट गए थे क्योंकि उस दौरान लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया और लॉकडाउन भी था।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
विस्तार
ब्रिटेन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक बेहद संक्रामक बीमारी का अलर्ट जारी किया है और लोगों को सावधान रहने को कहा है। दरअसल यह नई बीमारी है 'पर्टुसिस या वूपिंग कफ'। इस बीमारी में मरीजों को 100 दिनों तक खांसी की समस्या हो रही है। इसमें शुरुआत में सामान्य सर्दी जुकाम के लक्षण दिखाई देते हैं और फिर खांसी की समस्या होती है, जो तीन महीने या करीब 100 दिनों तक चलती है।
तेजी से बढ़ रहे मामले
ब्रिटेन की हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने बताया कि जुलाई से नवंबर के बीच देश में 716 मामले पर्टुसिस के पाए गए। इस बीमारी में फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान इस बीमारी के मामले घट गए थे क्योंकि उस दौरान लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया और लॉकडाउन भी था। अब चूंकि कोरोना महामारी का प्रकोप खत्म हो गया है तो फिर से पर्टुसिस के मामले बढ़ने शुरू हो गए हैं।
वैक्सीन है उपलब्ध
बता दें कि पर्टुसिस बीमारी में मरीज के फेफड़ों और सांस की नली में संक्रमण हो जाता है। 50 के दशक में इस संक्रमण के चलते बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई थी लेकिन 1950 में इसकी वैक्सीन आने पर इसके मामले घट गए। अब बच्चों के साथ ही व्यस्कों में भी अब इस बीमारी के मरीज दिख रहे हैं। वहीं 100 दिनों तक खांसी के चलते मरीजों को हर्निया, पसलियों में दर्द, कान में संक्रमण और पेशाब में परेशानी जैसी समस्याएं हो रही हैं। हालांकि इस बीमारी के लिए वैक्सीन उपलब्ध है और इससे बचाव संभव है।
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तेजी से बढ़ रहे मामले
ब्रिटेन की हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने बताया कि जुलाई से नवंबर के बीच देश में 716 मामले पर्टुसिस के पाए गए। इस बीमारी में फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान इस बीमारी के मामले घट गए थे क्योंकि उस दौरान लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया और लॉकडाउन भी था। अब चूंकि कोरोना महामारी का प्रकोप खत्म हो गया है तो फिर से पर्टुसिस के मामले बढ़ने शुरू हो गए हैं।
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वैक्सीन है उपलब्ध
बता दें कि पर्टुसिस बीमारी में मरीज के फेफड़ों और सांस की नली में संक्रमण हो जाता है। 50 के दशक में इस संक्रमण के चलते बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई थी लेकिन 1950 में इसकी वैक्सीन आने पर इसके मामले घट गए। अब बच्चों के साथ ही व्यस्कों में भी अब इस बीमारी के मरीज दिख रहे हैं। वहीं 100 दिनों तक खांसी के चलते मरीजों को हर्निया, पसलियों में दर्द, कान में संक्रमण और पेशाब में परेशानी जैसी समस्याएं हो रही हैं। हालांकि इस बीमारी के लिए वैक्सीन उपलब्ध है और इससे बचाव संभव है।
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