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Ground Report: Jauri village trapped in waterlogging for 25 years; every household keeps boots to get around
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ग्राउंड रिपोर्ट: 25 साल से जलभराव की कैद में जौरी गांव, निकलने के लिए हर घर में बूट
नीरज नरवरिया
Updated Wed, 28 Oct 2026 09:43 PM IST
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ग्राउंड रिपोर्ट - कृष्णेंदु कुमार
अमर उजाला ब्यूरो
बड़ागांव (झांसी)। जौरी गांव में घर से बाहर निकलने के लिए जूते-चप्पल नहीं, प्लास्टिक के बूट चाहिए। यह किसी बाढ़ग्रस्त इलाके की कुछ दिनों की मजबूरी नहीं, बल्कि पिछले करीब 25 साल से यहां के लोगों की जिंदगी का हिस्सा है। गांव की गलियों में गंदा पानी भरा रहता है। घर से निकलने के लिए ग्रामीणों को प्लास्टिक के बूट पहनने पड़ते हैं।
हालात ऐसे हैं कि लगभग हर घर में तीन से पांच जोड़ी बूट रखे हैं। गंदा पानी घरों के भीतर तक घुस जाता है। बच्चों को कंधे पर बैठाकर स्कूल पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों की परेशानी का बड़ा कारण जलनिकासी के रास्ते को लेकर जमीन का विवाद है। कुछ लोग जलनिकासी के लिए अपनी जमीन नहीं देना चाहते हैं। ऐसे में करीब एक हजार की आबादी वाले गांव के करीब 500 लोगों को स्थायी समाधान का इंतजार है।
हर कदम पर गंदे पानी से जूझती जिंदगी
जौरी गांव में जलभराव ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी मुश्किल कर दी है। घर से बाहर निकलना हो या जरूरी काम से कहीं जाना हो, पहले प्लास्टिक के बूट पहनने पड़ते हैं। महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भी इसी स्थिति से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक, बिना बूट पहने गलियों से निकलना मुश्किल है। लंबे समय से जमा गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना उनकी मजबूरी बन गया है।
समस्या केवल रास्तों तक सीमित नहीं है। गलियों का गंदा पानी घरों में घुस जाता है। इससे खाना बनाने, नहाने-धोने और दूसरे घरेलू काम करने में परेशानी होती है। ग्रामीणों को संक्रमण और बीमारियों का डर भी सताता है। उनका कहना है कि लंबे समय से जलभराव बने रहने के कारण घरों की नींव तक कमजोर होने लगी है।
कंधे पर बच्चे, तभी स्कूल पहुंचने की उम्मीद
गांव के करीब 50 बच्चों की मुश्किलें भी कम नहीं हैं। रास्तों में भरे गंदे पानी के कारण अभिभावकों को बच्चों को कंधे पर बैठाकर स्कूल ले जाना पड़ता है। ग्रामीण रंजीत कुमार बताते हैं कि वह बचपन से जलभराव की समस्या झेल रहे हैं। अब उनकी अगली पीढ़ी भी इसी परेशानी से जूझ रही है। बच्चों का खेलना-कूदना तक प्रभावित है। हर समय डर बना रहता है कि कहीं कोई बच्चा गंदे पानी में न गिर जाए।
कोई नहीं निकाल सका स्थायी समाधान
ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान बसपा, सपा और भाजपा की सरकारें आईं। जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी बदलते रहे, लेकिन शिकायतों के बाद भी गांव की स्थिति नहीं बदली। अब लोगों की उम्मीद है कि जमीन विवाद का समाधान निकलने और जलनिकासी की व्यवस्था बनने के बाद ही उन्हें इस परेशानी से राहत मिल सकेगी।
ग्रामीणों की व्यथा
जलभराव की समस्या पिछले करीब 25 साल से बनी हुई है। अधिकारियों को कई बार इसकी जानकारी दी गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। गंदे पानी के कारण सांप-बिच्छू भी घरों में घुस जाते हैं। इससे लोगों में डर बना रहता है। — राकेश राजपूत
बचपन से इस समस्या का सामना कर रहा हूं। मेरे बच्चे भी इसी हालात में बड़े हो रहे हैं। बच्चों को कंधे पर बैठाकर स्कूल पहुंचाना पड़ता है। जलभराव के कारण उनके खेलकूद पर भी असर पड़ रहा है। — रंजीत कुमार
गलियों का गंदा पानी घरों में घुस जाता है। इससे खाना बनाने और नहाने-धोने तक में परेशानी होती है। घरों की नींव कमजोर होने की आशंका है। लोगों को हर दिन इसी स्थिति में गुजारा करना पड़ता है। — सीमा
घर के अंदर और बाहर गंदा पानी भरा रहता है। गलियों में कई फीट तक पानी जमा हो जाता है और बारिश के दिनों में समस्या और बढ़ जाती है। घर से बाहर निकलने के लिए प्लास्टिक के बूट पहनने पड़ते हैं, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त खर्च भी पड़ता है। — सरस्वती नामदेव
जल्द समाधान कराने का आश्वासन
रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड, मुख्य विकास अधिकारी, झांसी ने कहा कि उनके संज्ञान में अभी यह समस्या नहीं है। अगर ऐसा है तो जल्द से जल्द इसका समाधान कराया जाएगा।
राजीव सिंह पारीछा, भाजपा विधायक, बबीना ने कहा कि पानी निकासी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, ग्रामीणों में जमीन देने को लेकर आपसी सहमति नहीं बन पा रही है।
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