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Troubles mount for Ashutosh Ranka and Saurabh Das; following an extension of their custody, the case has now b
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आशुतोष रांका और सौरभ दास की मुश्किलें बढ़ीं, हिरासत बढ़ने के बाद अब क्राइम ब्रांच के हवाले केस
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम
Published by: Bhaskar Tiwari
Updated Tue, 20 Oct 2026 01:30 AM IST
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दिल्ली में कोकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं अशुतोष रांका और सौरव दास से जुड़े कथित अनधिकृत प्रवेश के मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। मामले की जांच अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आगे की जांच क्राइम ब्रांच की टीम करेगी और मामले से जुड़े तथ्यों, आरोपों तथा घटनाक्रम की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। दोनों नेताओं से जुड़े इस मामले में पहले उनकी हिरासत बढ़ाए जाने की खबर सामने आई थी। अब जांच एजेंसी में बदलाव के बाद मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। हालांकि, फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर कथित अनधिकृत प्रवेश की परिस्थितियों और मामले से जुड़े सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है।
इस पूरे घटनाक्रम में सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, अशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई के लिए जमानतदारों से जुड़े दस्तावेज जमा किए गए, लेकिन बार-बार जमानतदारों को लेकर आपत्तियां सामने आईं। रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण दोनों नेताओं की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है और हिरासत बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार पेश नहीं किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि कानूनी टीम अदालत के फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने पर विचार कर रही है। दूसरी ओर, मजिस्ट्रेट के आदेश में शांति भंग होने की आशंका और जमानतदारों के दस्तावेजों में कथित विसंगतियों का उल्लेख किया गया है। पुलिस का पक्ष है कि मामले में आगे की जांच जरूरी है, जबकि सीजेपी की कानूनी टीम हिरासत की वैधता और सुनवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।
अब इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच करेगी और अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को निर्धारित है। इस बीच, रत्ना सिंह ने पूरे घटनाक्रम को लेकर जो सवाल उठाए हैं, वे इस मामले को कानूनी और राजनीतिक, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाते हैं। उनके बयान में जमानत प्रक्रिया, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और विरोध-प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस के आरोपों और सीजेपी के दावों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकाला जा सकता है।
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