राजनीतिक पारा कम करने को CM ने खुली छोड़ दी एक ‘खिड़की’
मुख्यमंत्री ने हरक के अलावा किसी के खिलाफ नहीं की कार्रवाई।
पांच बागी विधायकों के ओहदे व कैबिनेट मंत्री का दर्जा बरकरार।
इस उम्मीद से छोड़ा गया, वापस आना का मन हो तो आ जाए।
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स्टेट में चल रहा पावर गेम अब हर पल रोमांच बढ़ा रहा है। हरक सिंह रावत के अलावा किसी भी विधायक से अभी तक लालबत्ती नहीं छीनना यह साबित करता है, कि हरीश रावत ने इस राजनीतिक तापमान को कम करने के लिए फिलहाल एक खिड़की खुली छोड़ दी है। इशारा यही है कि यदि कोई आना चाहता है तो अपनी मंशा बता दे।
इस पूरे घटनाक्रम की वजह बने हरक सिंह रावत को मुख्यमंत्री एक दिन पहले ही कैबिनेट मंत्री पद से बर्खास्त कर चुके हैं। यूके उनियाल को महाधिवक्ता के पद से हटाकर विधायक सुबोध उनियाल से भी हिसाब चुकता कर लिया।
क्योंकि महाधिवक्ता, विधायक सुबोध उनियाल के भाई है। दो विधायक विजय बहुगुणा और अमृता रावत के पास कोई दायित्व नहीं है। वैसे भी हरीश रावत इन चारों विधायकों की वापसी नहीं चाहते।
बाकी पांच विधायकों ने नहीं छीना अभी तक दायित्व
इसीलिए ही उन्होंने बाकी पांच से अभी तक दायित्व नहीं छीना और ना ही कैबिनेट मंत्री का दर्जा वापस लिया है। उनकी सारी सुख सुविधाएं निरंतर जारी है।
जसपुर से विधायक शैलेंद्र मोहन सिंघल राज्य मंडी परिषद के अध्यक्ष है और इन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी मिला है। केदारनाथ से विधायक शैलारानी रावत इस समय संसदीय सचिव है और मुख्यमंत्री से संबद्ध है। उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है।
उनके पास आपदा प्रबंधन व पुनर्वास, पीडब्लूडी का काम है। रायपुर से विधायक उमेश काऊ संसदीय सचिव है और कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। काऊ भी मुख्यमंत्री से संबद्ध है और पेयजल व युवा कल्याण का काम देखते है।
रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा मुख्यमंत्री के पर्यटन सलाहकार है और इन्हें भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। खानपुर से विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन खनिज विकास परिषद के अध्यक्ष है और इन्हें भी कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला है।
यह पांचों विधायक ऐसे हैं जिनकी वापसी का इंतजार किया जा रहा है। इसीलिए अभी तक इनके ओहदे बरकरार है।