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जानिए, विदेशी अखबारों में कैसी है उत्तराखंड आपदा की कवरेज
हल्द्वानी/ब्यूरो
Updated Sat, 22 Jun 2013 01:59 AM IST
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उत्तराखंड में आई आपदा का मातम सोशल मीडिया या भारतीय अखबारों में ही नहीं विदेशी मीडिया में भी पसरा है। अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों ने इस विभीषिका को पहले पेजों में जगह दी है।
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पड़ोसी देश पाकिस्तान और भूटान ने उत्तराखंड की इस दुर्घटना को मुखपृष्ठ पर स्थान देने के साथ ही अंदर के पेजों में विस्तार से छापा है।
उत्तराखंड के साथ ही नेपाल और हिमाचल में आई आपदा को भी दूसरे देशों में कवरेज मिला है।
अमेरिका का प्रमुख अखबार द वाल स्ट्रीट जरनल केदारनाथ में आई आपदा पर बराबर नजर रखे है। वाल स्ट्रीट ने उत्तराखंड सरकार के प्रवक्ता अमित चंदोला के हवाले से आपदा की खबर छापी है।
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विदेशी अखबार ने भी आपदा के लिए मंदिर के पास हुए अनियोजित निर्माण को जिम्मेदार बताया है। इस अखबार ने पीड़ितों को मदद देने के लिए भारतीय सेना और आईटीबीपी की पीठ भी ठोंकी है।
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इसके अलावा अमेरिका के दूसरे प्रमुख अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने भी उत्तराखंड की पीड़ा को दुनिया की बड़ी आपदाओं में बताया है। मंदिर के पुरोहित जगमोहन बर्त्वाल के साथ ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के हवाले से छपी है।
इसी अखबार में भारत के गृहमंत्री का वह बयान भी छपा है जिससे पता चलता है कि केंद्र में बैठे नेता उत्तराखंड की इस आपदा को लेकर कितने संवेदनशील है।
गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने वाशिंगटन पोस्ट को दिए बयान में कहा है कि उत्तराखंड की आपदा में अब तक 100 लोग मारे गए हैं।
एक दर्जन पुल बहे हैं और कुछ सड़कों के साथ ही 300 मकान क्षतिग्रस्त हैं और 250 मकान अर्द्ध क्षतिग्रस्त हुए हैं।
जबकि उत्तराखंड में 20 हजार से अधिक लोग लापता हैं और न जाने कितने मकान, सड़कें और पुलों का अस्तित्व मिट चुका है। वाशिंगटन पोस्ट ने हिमाचल और नेपाल में आई आपदा को भी अखबार में जगह दी है।
इंग्लैंड के अखबार द गार्जियन भी उत्तराखंड की आपदा को लेकर संजीदा है और बराबर कवरेज दे रहा है। इस अखबार ने भी उत्तराखंड सरकार की सुस्ती के साथ ही सेना और अर्द्धसैनिक बलों के आपरेशन की तारीफ की है।
पड़ोसी देश पाकिस्तान और भूटान आपदा को लगातार कवरेज दे रहे हैं।
पाकिस्तानी अखबार द आब्जर्बर और डॉन ने उत्तराखंड में आई आपदा को भीतर के पेज में प्रमुखता से छापा है और इसमें मरने वालों की साथ गहरी संवेदनाएं जताई हैं।