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शहीद जांबाजों के हौसले को सलाम

Sat, 29 Jun 2013 10:44 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
देहरादून/ब्यूरो Updated Sat, 29 Jun 2013 10:44 AM IST
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we salute braveheart martyrs

केदार घाटी में बचाव अभियान के दौरान शहीद हुए 20 जांबाजों को सैन्य सम्मान के साथ गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, सेना प्रमुख बिक्रम सिंह और मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने श्रद्धांजलि दी।

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एयरफोर्स, आईटीबीपी और एनडीआरएफ के ये अफसर और जवान मंगलवार को गौरीकुंड के पास हेलीकाप्टर हादसे में शहीद हो गए थे।

सब एरिया उत्तराखंड के हैलीपैड पर राष्ट्रीय ध्वज में लिपटे शहीदों को सेना और वायुसेना की टुकड़ियों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद शव उनके पैतृक निवास के लिए रवाना कर दिए गए।
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शहीदों को दी श्रद्धांजलि
इसके पूर्व सेना के मध्य कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत, यूबी एरिया कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एनएस बाबा, आईएमए कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मानवेंद्र सिंह, आईटीबीपी के महानिदेशक अजय चड्ढा, एयर मार्शल देव ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
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पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी, एमडीएमए के उपाध्यक्ष एस रेड्डी, कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल, सुरेंद्र सिंह नेगी, मुख्य सचिव सुभाष कुमार, गृह सचिव ओम प्रकाश ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

शहीद जांबाज
वायुसेना : विंग कमांडर डेरिल केस्टिलीनो, फ्लाइट लेफ्टिनेंट के प्रवीण और तपन कपूर, जूनियर वारंट अफसर एके सिंह, सार्जेंट सुधाकर यादव
आईटीबीपी : कमांडेंट नंद राम, सब इंस्पेक्टर जयेंद्र प्रसाद, कांस्टेबल जोमोन पीजी, विभूति राय, सर्वेश कुमार और अजय लाल
एनडीआरएफ : कमांडेंट नित्यानंद गुप्ता, इंस्पेक्टर भीम सिंह, सब इंस्पेक्टर सतीश कुमार, कांस्टेबल के विनायगन. बसवाराज यारागति, संजीव कुमार, संतोष कुमार पासवान, शशिकांत रमेश और अहिर राव गणेश

वायुसेना, आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जांबाजों ने राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए अपनी जान दी। इनकी शहादत को हम नमन करते हैं।
- सुशील कुमार शिंदे, केंद्रीय गृह मंत्री

कुछ शवों से लिया डीएनए सैंपल
हेलीकाप्टर क्रैश में शहीद जवानों के शव तो निकाल लिए गए हैं। इनमें से एयरफोर्स के चालक दल के पांचों शवों की शिनाख्त हो गई है। लेकिन आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जिन जवानों के शवों की शिनाख्त नहीं हो सकी, उनके डीएनए सैंपल सेंट्रल फारेंसिक साइंस लैब हैदराबाद भेजे गए हैं।

श्रद्धांजलि के बाद पहचान पुख्ता होने वाले 12 शव ही जवानों के पैतृक निवास भेजे गए हैं। बुरी तरह से झुलसे शवों की शिनाख्त मुश्किल हो रही है। शिनाख्त न होने वालों में एनडीआरएफ केकमांडेंट नित्यानंद गुप्ता का शव भी है। इसी वजह से शव परिजनों को नहीं सौंपा गया।

गृह मंत्रालय ने शवों की शिनाख्त के लिए सैंपल हैदराबाद स्थित सीएफएसएल को भेजकर तत्काल रिपोर्ट मांगी है। शिनाख्त पुख्ता होने के बाद ही शव परिजनों को सौंपे जाएंगे। कानपुर से नित्यानंद के भाई परमांनद गुप्ता ने बताया कि शव पूरी तरह से झुलसने से आईटीबीपी उसकी पहचान के लिए डीएनए टेस्ट करवा रहा है।

आश्वासन दिया गया है कि दो दिन में जांच पूरी कर ली जाएगी।

हादसा नहीं झुका सकता बुलंद हौसले
साथियों को श्रद्धांजलि देने आए आईटीबीपी और एनडीआरएफ के जवानों को उन्हें खोने का दु:ख जरूर है। लेकिन इस हादसे से उनके हौसले नहीं टूटे। आईटीबीपी कई स्थानों पर सेना के साथ कंधा से कंधा मिलकर बचाव अभियान में जुटी है।


दुर्गम इलाकों में आईटीबीपी ही सक्रिय
जवानों का कहना है कि किसी भी अभियान में चाहे व सैन्य हो या फिर रेस्क्यू उसमें साथी की मौत का दुख तो होता है। लेकिन उसका असर आपरेशन पर नहीं पड़ता। आईटीबीपी के एक अधिकारी ने बताया कि एनडीआरएफ की जिन दो बटालियों को लगाया गया है, वे भी आईटीबीपी की हैं। ऐसे में तालमेल बैठाना और आसान हो गया है।

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