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उत्तराखंड के सीएम की दो टूक, खुद करो अपनी सुरक्षा

Sat, 29 Jun 2013 07:22 PM IST
उत्तरकाशी/ब्यूरो
उत्तरकाशी/ब्यूरो Updated Sat, 29 Jun 2013 07:22 PM IST
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villagers have to come ahed for thare safty

उत्तरकाशी के बाशिंदो के अभी पिछली आपदा के जख्म ही ठीक से भरे नहीं थे कि उत्तराखंड में आपदा से गहराए हालातों ने और मुश्किलें बढ़ा दी है।

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पिछली आपदा में ही अपना बहुत कुछ खो चुके उत्तरकाशी के बाशिंदो के सामने भागीरथी का उफान दहशत पैदा कर रहा है और दूसरी ओर सरकार ने भी सुरक्षा इंतजामों का बंदोबस्त करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
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उत्तरकाशी के बाशिंदो को अब अपनी सुरक्षा खुद ही करनी होगी। पहले से ही घबराए हुए ग्रामीणों के लिए मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में संदेश दिया है कि अभी सुरक्षा कार्य नहीं हो पाएंगे। यह बात उन्होंने तब कही, जब शनिवार को बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने वे उत्तरकाशी पंहुचे थे।
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उत्तराखंड आपदा के पल पल अपडेट देखें

मुख्यमंत्री से जब लोगों ने शहर की सुरक्षा की मांग की तो उन्होंने सीधे कह दिया कि अगले दो महीने तक सरकार उत्तरकाशी में भागीरथी के उफान को रोकने के लिए कोई सरुक्षा उपाय नहीं कर सकेगी। वर्ष 2012 के अगस्त माह में आई बाढ़ के चलते भागीरथी नदी में भारी मलबा आने से नदी का तल ऊंचा हो गया था।

सरकार ने भागीरथी से मलबा नहीं हटाया, जिससे इस वर्ष 16- 17 जून को आई बाढ़ में जोशियाड़ा बाजार तबाह हो गया। इसके अलावा तिलोथ में भी कई आवासीय भवन और स्कूल गंगा में समा गए। एक बार फिर नदी का तल बाढ़ से और ऊंचा हो गया है।

भागीरथी का तल ऊंचा होने से तिलोथ, जोशियाड़ा, उत्तरकाशी नगर, ज्ञानसू और मातली में कई भवन खतरे की जद में आ गए हैं। नदी के कटाव से भवन तथा खेतों के तबाह होने के आसार भी गहरा गए हैं।

दो महीने क्या करें
शनिवार को बाढ़ से हुए नुकसान का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से नगरवासियों ने सुरक्षा की मांग की, लेकिन उन्होंने दो टूक शब्दों में जवाब दिया कि अभी पानी का बहाव तेज है। लिहाजा दो माह तक कोई सुरक्षा कार्य नहीं हो पाएंगे।

पानी कम होने के बाद सुरक्षा के लिए ठोस योजना बनाई जाएगी। ऐसे में लोग अब स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। नदी तल ऊंचा होने से शहर में कई स्थानों से पानी घुसने का खतरा बना हुआ है।


यहां है खतरा
आसमान में मेघों की गुर्राहट उत्तरकाशी क्षेत्र में सिहरन पैदा कर देती है। भागीरथी यदि अपने मौजूदा स्तर से बामुश्किलन डेढ़ मीटर भी ऊपर आती है तो उत्तरकाशी शहर, लक्षेश्वर, उजेली, गंगा विहार, जड़भरत घाट, मणिकर्णिकाघाट, ज्ञानसू सेरा और मातली डूबने की कगार पर पंहुच सकते हैं।

हल्की सी बारिश से डर रहे लोग
शुक्रवार रात हुई बारिश ने उत्तरकाशी नगरवासियों की धड़कन बढ़ा दी। तटवर्ती क्षेत्र के लोग भागीरथी की जल धारा को निहारने लगे। लगभग एक घंटे तक हुई बारिश ने लोगों का चैन छीन लिया था।

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