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टमाटर की फसल विल्ट रोग की चपेट में
नौगांव (उत्तरकाशी)।
Updated Sun, 19 Jun 2016 09:42 PM IST
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रवाईं घाटी में टमाटर की फसल विल्ट रोग की चपेट में आने से किसान परेशान हैं। सरकारी विभाग बीमारी से फसल को बचाने की दवाएं उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। बीते साल भी इसी बीमारी के कारण रवाईं घाटी में टमाटर की करीब पचास फीसदी फसल बर्बाद हुई थी।
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आजकल जब बाजार में टमाटर के दाम बढ़ने लगे हैं, तब लोगों की उम्मीद रवाईं घाटी के खेतों से निकलने वाले टमाटरों पर टिकी है। लेकिन पकने से पहले ही टमाटर की फसल विल्ट रोग की चपेट में आ गई है। इसमें तैयार दाने पर काले दाग पड़ रहे हैं और पूरी तरह पकने से पहले ही टमाटर झड़ कर गिर रहा है। बीते साल भी इस बीमारी की चपेट में आने से क्षेत्र में टमाटर की 50 फीसदी फसल बर्बाद होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
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क्षेत्र के अजब सिंह, धर्म सिंह, सरदार सिंह, विनोद, बलवीर आदि किसानों ने बताया कि टमाटर की फसल उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है। बीते साल इस रोग से फसल बर्बाद होने पर कई किसानों तो इस बार खेतों में टमाटर नहीं बोए। इस बार भी बीमारी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। उद्यान विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए फंगीसाइड इंडोफिल जेड-78 के छिड़काव से कोई असर नहीं पड़ रहा। विभाग जिस दवा के छिड़काव की सलाह दे रहा है, वह स्थानीय बाजार में उपलब्ध ही नहीं है।
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सरकारी विभागों के पास कभी अच्छी दवाएं नहीं मिलतीं, जिससे किसानों की सालभर की मेहनत बर्बाद हो जाती है। कृषि विज्ञान केंद्र चिन्यालीसौड़ के वैज्ञानिक भी रवाईं घाटी की उपेक्षा कर रहे हैं। वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ खेतों तक पहुंचकर किसानों को जानकारी तथा सरकारी विभाग अच्छी दवाएं मुहैया कराएं, तभी खेती-बागवानी आजीविका का मजबूत साधन बन सकती है।
जगमोहन चंद, अध्यक्ष रवाईं घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन।
बीते साल भी इस बीमारी से भारी मात्रा में फसल बर्बाद हुई थी। रानीचौरी केंद्र में कराई गई जांच में टमाटर पर विल्ट रोग की पुष्टि हुई थी। बिना उपचारित किए बीज बोने के कारण यह बीमारी होती है। शीघ्र क्षेत्र में टीम भेजकर स्थिति का जायजा लिया जाएगा और किसानों को अच्छी दवाओं का छिड़काव करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
नरेंद्र यादव, जिला उद्यान अधिकारी उत्तरकाशी।