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कृषि व बागवानी की बात करने वाले प्रत्याशी को देंगे वोट

Wed, 09 Feb 2022 07:51 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 07:51 PM IST
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Will vote for the candidate who talks about agriculture and horticulture
नकदी फसलों की घाटी कही जाने वाली रर्वाइं घाटी उपेक्षा का दंश झेल रही है। यहां स्थानीय निवासी लंबे समय से मृदा परीक्षण केंद्र व कृषि विज्ञान केंद्र की शाखा खोले जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक मांगों पर किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं गया है। इतना ही नहीं इस बार के चुनाव में भी कृषि और बागवानी के मुद्दे गायब हैं।
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मोरी, पुरोला और नौगांव विकासखंड से मिल कर बनी आरक्षित पुरोला विधान सभा सीट पर 74007 मतदाता हैं, जिनमें 35640 महिला मतदाता हैं। रवाईंघाटी में सेब, टमाटर, आलू, मटर, फ्रेंचबीन आदि नकदी फसलों का उत्पादन होता है। नौगांव की स्योरी फल पट्टी सहित आराकोट बंगाण और मोरी के नैटवाड़ शांकरी में करोड़ों के सेब का उत्पादन होता है। इसीलिए इस घाटी से पलायन भी नहीं हुआ है। स्थानीय निवासी घाटी में कृषि विज्ञान केंद्र व मृदा परीक्षण केंद्र खोले जाने की मांग कर रहे हैं, जिससे काश्तकारों को सुविधा मिल सके। लेकिन न तो किसी जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासन ने ग्रामीणों की इस मांग पर ध्यान दिया है। इस बार चुनाव में भी कृषि और बागवानी से संबंधित मुद्दे प्रत्याशियों व राजनीतिक पार्टियों के एजेंडे से गायब हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कृषि व बागवानी की समस्याओं पर बात करने वाले प्रत्याशी के ही पक्ष में मतदान किया जाएगा।
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- क्षेत्र के अधिकांश लोगों की आजीविका कृषि व बागवानी पर निर्भर है। नकदी फसलों की अच्छी पैदावार होती है, लेकिन न तो जनप्रतिनिधियों और न ही प्रशासन ने काश्तकारों की समस्याओं पर ध्यान दिया है। काश्तकारों की समस्याओं पर बात करने वाले प्रत्याशी पर ही विचार किया जाएगा। -गजेंद्र नौटियाल, काश्तकार।
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- राजनीतिक पार्टियां व प्रत्याशी एक दूसरे पर आरोप लगाकर वोट मांग रहे हैं, जबकि क्षेत्र में काश्तकारों के समक्ष कई समस्याएं हैं। लेकिन उनके निराकरण की कोई बात नहीं कर रहा है। चुनाव के दौरान बागवानी व कृषि पर बात होनी चाहिए। -जगमोहन सिंह, काश्तकार।

-रवाईंघाटी से बहुत कम संख्या में लोगों ने पलायन किया है। यहां के अधिकांश परिवारों की आजीविका कृषि और बागवानी पर निर्भर है। पलायन पर पूरी तरह से अंकुश लगाने के लिए यमुनाघाटी विकास परिषद का गठन होना जरूरी है, जिसमें क्षेत्र के विकास के लिए अलग बजट का प्राविधान रहेगा। -सकल चंद रावत, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष
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