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टिहरी बांध की झील में डूबे बैशाखी मेले
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Sat, 16 Apr 2016 09:41 PM IST
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टिहरी बांध झील ने क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति एवं पारंपरिक मेलों को भी संकट में डाल दिया। कभी नगुण और देवीसौड़ में लगने वाले बैशाखी के पारंपरिक मेले क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति की पहचान और इसके संवाहक होते थे। दस साल पहले प्राचीन मंदिर और मेला प्रांगणी टिहरी बांध झील में डूबने के बाद अब ग्रामीण सड़क किनारे ही मेले की औपचारिकता पूरी किए जाने से मायूस हैं।
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बैशाख महीने में नगुण, देवीसौड़, छाम आदि स्थानों पर पारंपरिक मेलों का आयोजन होता था। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां पहुंचते थे तथा गंगा स्नान एवं प्राचीन नागराजा मंदिर में पूजा-अर्चना कर मेले में शामिल होते थे।
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वर्ष 2006 में टिहरी बांध झील के विस्तार ने सब बदल दिया। प्राचीन मंदिर और मेला प्रांगण झील में डूब गए। ग्रामीणों के आंदोलन के बाद बांध प्रशासन ने देवीसौड़ वाले मंदिर का पुनर्निर्माण तो कराया, लेकिन नगुण के नागराजा मंदिर और प्रांगण के लिए अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई।
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शुक्रवार को पीपलमंडी के पास गंगोत्री हाईवे के किनारे ही बैशाखी का मेला आयोजित किया गया। यहां न पूजा-अर्चना करने के लिए मंदिर था और न ही गंगा स्नान की कोई व्यवस्था। सड़क किनारे ही सजी फड़ों से ग्रामीणों ने छिटपुट खरीददारी की। नागराजा मंदिर समिति के अध्यक्ष कुलवीर बिष्ट ने झील में डूबे प्राचीन मंदिरों के पुनर्निर्माण और मेला स्थल विकसित करने की मांग की है।