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भगवान के आंखों के आंसुओं से जन्मी है यमुना

Sun, 08 May 2016 10:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी Updated Sun, 08 May 2016 10:31 PM IST
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Tears to the eyes of God is born out of the Yamuna
भागवत कथा - फोटो : amarujala

भगवान राम विश्व के पालनहार होने के साथ ही मर्यादा के आधार हैं। भगवान के आंखों के आंसुओं से मां यमुना का जन्म हुआ है, जबकि गंगा भगवान के चरणों से उत्पन्न हुई है। मां यमुना के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली में आयोजित नौ दिवसीय रामकथा के दूसरे दिन कथा प्रवचन करते संत मुरारी बापू ने कहा कि यमुना की उत्पत्ति के कई उल्लेख पुराणों में है, जिसमें एक उल्लेख भगवान के आंखों के आंसुओं से उत्पत्ति का भी है।

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सूर्य से पुत्री के रूप में भी यमुना की उत्पत्ति का उल्लेख है। यमुना के भगवान बल्लभाचार्य के मिलन का व्याख्यान करते हुए बापू ने कहा कि 14 वर्ष की उम्र में 16 वर्षीय श्वेतवर्ण यमुना का दर्शन उन्हें हुआ। दर्शन के दौरान ही यमुना के गुणगान में एक श्वास में यमुना अष्टक का पाठ रच कर डाला।
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यमुना की महिमा के वर्णन में बापू ने कहा कि नाम के अनुरूप यमराज की बहन है, साथ ही राम, वरुण और गणेश देवताओं का वास भी उनके नाम में समाहित है। काल का भय यमुना के ध्यान, पान और मनन से सदैव के लिए दूर हो जाता है। बापू ने कथा में गुरु की महिमा का जिक्र करते हुए कहा कि गुरु के बिना किसी भी चिंता और समाधान से पार नहीं पाया जा सकता है, जब तक गुरु के निर्देशन में उचित मार्ग न मिल जाए।

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