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नवोदय विद्यालय में बच्चे दिन भर रहे भूखे
चिन्यालीसौड़ (उत्तरकाशी)
Updated Sun, 20 Dec 2015 10:17 PM IST
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राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को रविवार को दिनभर भूखा रहना पड़ा। शिक्षा विभाग से बजट नहीं मिलने के कारण बाजार ने अब उधार देना भी बंद कर दिया है। इससे स्कूल की कैंटीन में न तो नाश्ता बना और न ही भोजन पका। फिलहाल खंड शिक्षा अधिकारी के दखल पर दुकानदार 25 दिसंबर तक उधार पर राशन देने को राजी हुआ। तब जाकर शाम को बच्चों को खाना मिल सका।
रविवार को जब राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में पढ़ने वाले कक्षा छह से 12वीं तक के 98 बच्चे नाश्ते के लिए विद्यालय की कैंटीन पहुंचे तो उन्हें नाश्ता नहीं मिला। कैंटीन संचालक ने विभाग से भुगतान न होने और ज्यादा उधारी होने के कारण बाजार से राशन न मिलने पर कैंटीन संचालन से हाथ खड़े कर दिए। इसकी सूचना मिलते ही खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने कैंटीन संचालक को बाजार से 25 दिसंबर तक उधार पर राशन दिलाने की व्यवस्था की। बता दें कि बजट के अभाव में कैंटीन ही नहीं, बिजली, टेलीफोन, यूनिफार्म, सौंदर्य प्रसाधन, बोर्ड परीक्षा फीस की भी लाखों रुपये की उधारी चल रही है। विद्यालय का फोन तीन माह से कटा हुआ है।
खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि बजट के लिए शासन को लिखा गया है। जल्द ही बजट आने पर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। फिलहाल बच्चों के भोजन की व्यवस्था करा दी गई है।
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चार कमरों में चल रहा पूरा स्कूल
छह वर्षों से यह स्कूल राइंका चिन्यालीसौड़ के चार कमरों में चल रहा है। इन्हीं कमरों में 98 बच्चे दिन में पढ़ाई करते हैं और रात को सोते हैं। विद्यालय में शिक्षक समेत अन्य कर्मचारियों के पद सृजित नहीं किए गए हैं। दो शिक्षक अन्य विद्यालयों से व्यवस्था पर और 11 संविदा शिक्षक तैनात कर काम चलाया जा रहा है। दीवारीखोल में विद्यालय के लिए जमीन तो चिन्हित की गई, लेकिन अभी तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
कोट
शिक्षा विभाग पर बीते साल का डेढ़ लाख और इस साल का 15 लाख रुपये बकाया है। भुगतान न मिलने से बाजार में उधारी ज्यादा होने पर दुकानदार ने राशन देने से इंकार कर दिया। इस वजह से कैंटीन में नाश्ता एवं खाना नहीं बन पाया। शाम को राशन की व्यवस्था होने पर अब बच्चों को भोजन दिया जा रहा है।
- मनोज कुमार, कैंटीन संचालक।
व्यवस्थाओं के लिए सिर्फ तीन लाख रुपये बजट मिला। कैंटीन के अलावा बिजली, टेलीफोन बिल, यूनिफार्म, सौंदर्य प्रसाधन का भी काफी उधार है। बच्चों की बोर्ड परीक्षा फीस चौबीस हजार रुपये मुझे अपनी जेब से जमा करनी पड़ी। ऐसे में व्यवस्था संभालना मुश्किल है। मैंने विभाग से मूल विद्यालय के लिए कार्यमुक्त करने की मांग की है।
- जगदीश सिंह कंडारी, प्रभारी प्रधानाचार्य-राजीव गांधी नवोदय विद्यालय।
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रविवार को जब राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में पढ़ने वाले कक्षा छह से 12वीं तक के 98 बच्चे नाश्ते के लिए विद्यालय की कैंटीन पहुंचे तो उन्हें नाश्ता नहीं मिला। कैंटीन संचालक ने विभाग से भुगतान न होने और ज्यादा उधारी होने के कारण बाजार से राशन न मिलने पर कैंटीन संचालन से हाथ खड़े कर दिए। इसकी सूचना मिलते ही खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार मौके पर पहुंचे। उन्होंने कैंटीन संचालक को बाजार से 25 दिसंबर तक उधार पर राशन दिलाने की व्यवस्था की। बता दें कि बजट के अभाव में कैंटीन ही नहीं, बिजली, टेलीफोन, यूनिफार्म, सौंदर्य प्रसाधन, बोर्ड परीक्षा फीस की भी लाखों रुपये की उधारी चल रही है। विद्यालय का फोन तीन माह से कटा हुआ है।
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खंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि बजट के लिए शासन को लिखा गया है। जल्द ही बजट आने पर व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएंगी। फिलहाल बच्चों के भोजन की व्यवस्था करा दी गई है।
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चार कमरों में चल रहा पूरा स्कूल
छह वर्षों से यह स्कूल राइंका चिन्यालीसौड़ के चार कमरों में चल रहा है। इन्हीं कमरों में 98 बच्चे दिन में पढ़ाई करते हैं और रात को सोते हैं। विद्यालय में शिक्षक समेत अन्य कर्मचारियों के पद सृजित नहीं किए गए हैं। दो शिक्षक अन्य विद्यालयों से व्यवस्था पर और 11 संविदा शिक्षक तैनात कर काम चलाया जा रहा है। दीवारीखोल में विद्यालय के लिए जमीन तो चिन्हित की गई, लेकिन अभी तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
कोट
शिक्षा विभाग पर बीते साल का डेढ़ लाख और इस साल का 15 लाख रुपये बकाया है। भुगतान न मिलने से बाजार में उधारी ज्यादा होने पर दुकानदार ने राशन देने से इंकार कर दिया। इस वजह से कैंटीन में नाश्ता एवं खाना नहीं बन पाया। शाम को राशन की व्यवस्था होने पर अब बच्चों को भोजन दिया जा रहा है।
- मनोज कुमार, कैंटीन संचालक।
व्यवस्थाओं के लिए सिर्फ तीन लाख रुपये बजट मिला। कैंटीन के अलावा बिजली, टेलीफोन बिल, यूनिफार्म, सौंदर्य प्रसाधन का भी काफी उधार है। बच्चों की बोर्ड परीक्षा फीस चौबीस हजार रुपये मुझे अपनी जेब से जमा करनी पड़ी। ऐसे में व्यवस्था संभालना मुश्किल है। मैंने विभाग से मूल विद्यालय के लिए कार्यमुक्त करने की मांग की है।
- जगदीश सिंह कंडारी, प्रभारी प्रधानाचार्य-राजीव गांधी नवोदय विद्यालय।