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जीआईसी साल्ड में जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर छात्र
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जीआईसी साल्ड के जर्जर भवन में छात्र-छात्राएं अनहोनी की आशंका के बीच पढ़ रहे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
जिला मुख्यालय से महज पांच किमी दूरी पर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज साल्ड का भवन जर्जर स्थिति में है। छह गांवों के करीब 200 छात्र-छात्राएं यहां अध्ययनरत हैं, लेकिन जर्जर हो चुके विद्यालय भवन की न तो मरम्मत हो पा रही है और न ही नए भवन का निर्माण किया जा रहा है। क्षेत्र पंचायत सदस्य तनुजा नेगी, ग्राम प्रधान साल्ड संजू नेगी, प्रधान ज्ञाणजा ममलेश भट्ट, अभिभावक संघ अध्यक्ष ममलेश भट्ट, पीटीए अध्यक्ष सरत सिंह, मनसाराम नौटियाल, कुशाल राणा, आनंद पंवार आदि ने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में शिकायत भी की गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दस दिन के भीतर सकारात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
98 लाख में खड़े हुए सिर्फ पिलर और ढांचा
जीआईसी साल्ड में 13 वर्ष पूर्व नए भवन के लिए 98 लाख का बजट मंजूर हुआ था, जिससे तीन वर्ष में मात्र भवन के पिलर और ढांचा ही बना। लेकिन उसके दस साल बाद आज भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया, जिसके चलते निर्माणाधीन भवन भी खंडहर बन गया है। क्षेपंस तनुजा नेगी ने कहा कि विद्यालय भवन की स्थिति नहीं सुधरी, तो छात्र-छात्राओं को साथ लेकर डीईओ कार्यालय में कक्षाएं संचालित की जाएगी।
लैब में भर रहा पानी, कंप्यूटर ढककर रखने पड़ रहे
छात्रा आयुषी नौटियाल व स्मिता नेगी ने कहा कि उन्हें स्कूल की स्थिति में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन यहां तो कुछ भी नहीं बदला। छत टपकने के कारण उनकी लैब में पानी भर रहा है। वहीं कंप्यूटर भी ढककर रखे जाते हैं। सीईओ विनोद सेमल्टी ने बताया कि बजट की कमी के चलते विद्यालय भवन का काम अधूरा रह गया है, जिससे अवशेष कार्यों का आगणन तैयार कर शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव की स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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जिला मुख्यालय से महज पांच किमी दूरी पर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज साल्ड का भवन जर्जर स्थिति में है। छह गांवों के करीब 200 छात्र-छात्राएं यहां अध्ययनरत हैं, लेकिन जर्जर हो चुके विद्यालय भवन की न तो मरम्मत हो पा रही है और न ही नए भवन का निर्माण किया जा रहा है। क्षेत्र पंचायत सदस्य तनुजा नेगी, ग्राम प्रधान साल्ड संजू नेगी, प्रधान ज्ञाणजा ममलेश भट्ट, अभिभावक संघ अध्यक्ष ममलेश भट्ट, पीटीए अध्यक्ष सरत सिंह, मनसाराम नौटियाल, कुशाल राणा, आनंद पंवार आदि ने बताया कि कई बार विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में शिकायत भी की गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दस दिन के भीतर सकारात्मक कार्रवाई नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
98 लाख में खड़े हुए सिर्फ पिलर और ढांचा
जीआईसी साल्ड में 13 वर्ष पूर्व नए भवन के लिए 98 लाख का बजट मंजूर हुआ था, जिससे तीन वर्ष में मात्र भवन के पिलर और ढांचा ही बना। लेकिन उसके दस साल बाद आज भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया, जिसके चलते निर्माणाधीन भवन भी खंडहर बन गया है। क्षेपंस तनुजा नेगी ने कहा कि विद्यालय भवन की स्थिति नहीं सुधरी, तो छात्र-छात्राओं को साथ लेकर डीईओ कार्यालय में कक्षाएं संचालित की जाएगी।
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लैब में भर रहा पानी, कंप्यूटर ढककर रखने पड़ रहे
छात्रा आयुषी नौटियाल व स्मिता नेगी ने कहा कि उन्हें स्कूल की स्थिति में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन यहां तो कुछ भी नहीं बदला। छत टपकने के कारण उनकी लैब में पानी भर रहा है। वहीं कंप्यूटर भी ढककर रखे जाते हैं। सीईओ विनोद सेमल्टी ने बताया कि बजट की कमी के चलते विद्यालय भवन का काम अधूरा रह गया है, जिससे अवशेष कार्यों का आगणन तैयार कर शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव की स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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