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श्री सोमेश्वर महादेव का देवगोत मेला शुरू
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उत्तरकाशी के जखोल गांव में देवगोत मेले में देवता के स्वागत में ढोल वादन करते ग्रामीण व मौजूद श्रद
- फोटो : UTTER KASHI
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मोरी विकासखंड के जखोल गांव में श्री सोमेश्वर महादेव के देवगोत मेला शुरू हुआ। नव वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित मेले में देवता की डोली गांव के मुख्य मंदिर से बाहर आती है। इस वर्ष बर्फबारी के बीच भी देवता के स्वागत के लिए क्षेत्र के 22 गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस दौरान रणसिंघे और ढोल-दमाऊं की थाप पर ग्रामीणों ने देवता की डोली के साथ रासो, तांदी नृत्य कर सुख-समृद्धि की कामना की।
गत दिवस बुधवार को 13 गते मार्गशीष से शुरू होने वाला जखोल गांव में श्री सोमेश्वर महादेव का देवगोत मेला हिंदू नए वर्ष की शुरूआत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन के महत्व को इस हिसाब से भी आंका जा सकता है कि इस दिन का चयन जखोल गांव के कुल पुरोहित के द्वारा किया जाता है। आज के दिन श्री सोमेश्वर देवता मंदिर से बाहर आते हैं। वहां पर देवता के बाजगियों द्वारा नृत्य और ढोल बाजे द्वारा वादन किया जाता है और वहां से गांव की मुख्य थात की तरफ प्रस्थान करता है। वहां से जखोल गांव के किसी एक घर में 11 या 13 दिनों के लिए रहता है। वहीं देवता की प्रतिदिन नियमानुसार आरती वंदना होती है।
क्षेत्र के लोग वहीं पर देवता के दर्शन करने आते हैं। क्षेत्र के चैन सिंह राणा ने बताया कि जखोल गांव में करीब 15 दिन तक रहने के बाद देवता की डोली धारा, सांवणी, सटूड़ी, तल्ला पांव, उपला पांव आदि गांव में भ्रमण करेगी। बताया कि इस वर्ष यहां जखोल गांव में तीन से चार फीट बर्फ भी गिरी है, जिससे यहां की सुंदरता और वादियों की खूबसूरती ओर बढ़ गई है। इस मौके पर जखोल गांव के अवतार सिंह भंडारी, जनक सिंह, देवता के मुख्य पुजारी रामध्यान सिंह, कृपाल सिंह, जनक सिंह, हाकम सिंह, गंगा सिंह, गुलाब सिंह आदि मौजूद रहे।
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गत दिवस बुधवार को 13 गते मार्गशीष से शुरू होने वाला जखोल गांव में श्री सोमेश्वर महादेव का देवगोत मेला हिंदू नए वर्ष की शुरूआत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन के महत्व को इस हिसाब से भी आंका जा सकता है कि इस दिन का चयन जखोल गांव के कुल पुरोहित के द्वारा किया जाता है। आज के दिन श्री सोमेश्वर देवता मंदिर से बाहर आते हैं। वहां पर देवता के बाजगियों द्वारा नृत्य और ढोल बाजे द्वारा वादन किया जाता है और वहां से गांव की मुख्य थात की तरफ प्रस्थान करता है। वहां से जखोल गांव के किसी एक घर में 11 या 13 दिनों के लिए रहता है। वहीं देवता की प्रतिदिन नियमानुसार आरती वंदना होती है।
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क्षेत्र के लोग वहीं पर देवता के दर्शन करने आते हैं। क्षेत्र के चैन सिंह राणा ने बताया कि जखोल गांव में करीब 15 दिन तक रहने के बाद देवता की डोली धारा, सांवणी, सटूड़ी, तल्ला पांव, उपला पांव आदि गांव में भ्रमण करेगी। बताया कि इस वर्ष यहां जखोल गांव में तीन से चार फीट बर्फ भी गिरी है, जिससे यहां की सुंदरता और वादियों की खूबसूरती ओर बढ़ गई है। इस मौके पर जखोल गांव के अवतार सिंह भंडारी, जनक सिंह, देवता के मुख्य पुजारी रामध्यान सिंह, कृपाल सिंह, जनक सिंह, हाकम सिंह, गंगा सिंह, गुलाब सिंह आदि मौजूद रहे।
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