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पहली बार गढ़वाली में मंचित हुआ शेक्सपियर का नाटक
Updated Tue, 28 Jun 2016 09:37 PM IST
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शेक्सपियर का नाटक करते कलाकार
- फोटो : Amar Ujala
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प्रख्यात निर्देशक श्रीश डोभाल ने संवेदना समूह के कलाकारों के साथ मिलकर विश्वविख्यात नाटककार विलियम शेक्सपियर के दुखांत नाटक 'ऑथेलो' के गढ़वाली रूपांतरण 'ऑस्यालो' को मंच पर उतारने का सफल प्रयोग कर दिखाया। इस तरह का यह पहला प्रयोग है। संग्राली एवं मातली में किए गए इस नाटक के मंचन को दर्शकों ने खूब सराहा।
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एक माह से संवेदना समूह के कलाकार 'ऑस्यालो' नाटक की तैयारी में जुटे थे। रविवार रात को वरुणावत के शीर्ष पर स्थित संग्राली गांव के कंडार देवता मंदिर परिसर में नाटक को पहली बार मंच पर उतारा गया। रात बारह बजे तक चले इस नाटक ने दर्शकों को बांधे रखा। सोमवार रात को नाटक का मंचन आईटीबीपी 12वीं वाहिनी मातली में किया गया। कलाकारों का भावपूर्ण अभिनय ही रहा कि गढ़वाली भाषा की समझ न रखने वाले हिमवीरों को भी यह खूब पसंद आया।
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आईटीबीपी के सेनानी केदार सिंह रावत, द्वितीय कमान अधिकारी धर्म सिंह रावत, संग्राली गांव के प्रद्युमन नौटियाल, विजयलाल नैथानी, रविंद्र भट्ट, सुखशर्मानंद, ब्रह्मानंद नौटियाल, बुद्धिबल्लभ नैथानी, प्रधान सुनीता भट्ट आदि ने समूह के इस प्रयास की सराहना की।
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इस नाटक में राजेश जोशी, अंजू पंवार, गोविंद बिष्ट, अजय नौटियाल, गंगा डोगरा, डा.अजीत पंवार, संजय पंवार, मनवीर रावत, उत्तम रावत, हरदेव पंवार, सोनाली बिष्ट, रीनू खान, आराधना कुड़ियाल, अंजुमन खान, रोशन, धनपाल, प्रदीप बिष्ट अनिल सेमवाल आदि कलाकारों ने अपने मंझे हुए अभिनय और भावपूर्ण संवाद अदायगी से दर्शकों का मन मोह लिया। 'ऑथेलो' नाटक का गढ़वाली भाषा में अनुवाद दिल्ली निवासी दिनेश बिजल्वाण ने किया। जबकि इस नाटक के लिए उत्तराखंड के प्रख्यात लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने दो गीत लिखे हैं।
नाटकों के लिए समर्पित हैं डोभाल
उत्तरकाशी। संवेदना समूह के अध्यक्ष जयप्रकाश राणा ने बताया कि नाटक के निर्देशक श्रीश डोभाल ने वर्ष 1984 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा दिल्ली से थिएटर में परास्नातक किया है। इससे पहले वे कई फिल्म, डॉक्यूमेंटरी एवं नाटकों का निर्देशन कर चुके हैं। नाटकों के लिए समर्पित डोभाल के साथ काम करने से समूह के कलाकारों की प्रतिभा और निखर कर सामने आई है।
यह है 'ऑस्यालो' का कथानक
उत्तरकाशी। इस दुखांत नाटक के कथानक के अनुसार बुलेठ(वेनिस) का जनरल ऑस्यालो(ऑथेलो) एक सीनेटर के खूबसूरत बेटी दर्शना(डेस्डिमोना) से विवाह करता है। मन ही मन उससे चिढ़ने वाला उसका लेफ्टिनेंट इनामू(इयागो) उसके मन में दर्शना के चरित्रहीन होने का शक पैदा करता है। आखिर में ऑस्यालो शक की वजह से अपने प्राणों से प्यारी दर्शना की हत्या कर देता है। तभी उसे इनामू की साजिश का पता चलता है तो वह पत्नी के विछोह और अपने गलत निर्णय से क्षुब्ध होकर आत्महत्या कर लेता है। नाटक के विभिन्न दृश्यों में ऑस्यालो की वीरता, दर्शना की खूबसूरती, इनामू की कुटिलता आदि घटनाक्रम को खूबसूरती के साथ पेश किया गया है। इसमें हास्य एवं गीत-संगीत पक्ष भी काफी मजबूत है।
विदेशी भाषा के किसी नाटक को गढ़वाली में रूपांतरित करने का यह पहला प्रयोग है। अभी नाटक में कुछ कमियां हैं। जल्द ही इन्हें दूर कर नाटक को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। इससे गढ़वाली भाषा को एक नई पहचान मिलेगी।
- श्रीश डोभाल, निर्देशक 'ऑस्यालो'(ऑथेलो)।