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Uttarkashi News: सर्वे की फाइलों में दबी सालू गांव की सड़क
Sun, 15 Mar 2026 05:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 15 Mar 2026 05:51 PM IST
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छात्र छह किमी की पैदल दूरी तय कर पहुंचते हैं स्कूल
बीमारों को डंडी-कंडी के सहारे पहुंचाया जाता है अस्पताल
उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड का सालू गांव सड़क से नहीं जुड़ने से छात्र-छात्राओं को आज भी स्कूल पहुंचने के लिए करीब छह किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार से सामान ले जाने पर ढुलान के कारण उसकी कीमत दोगुनी हो जाती है। सड़क निर्माण के लिए पहले लोनिवि और पीएमजीएसवाई विभाग भी सर्वे तक सीमित रह गया है।
सालू गांव की ग्राम प्रधान अनूपा रावत, नवीन रावत ने बताया कि उनके गांव में सड़क नहीं पहुंचने से आज भी वह आदम युग में जीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण उनके स्कूली बच्चों को करीब छह किमी की घने जंगलों के बीच से पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। इस दौरान जंगली जानवरों का भय बना रहता है।
कहा कि सड़क के लिए पहले लोक निर्माण विभाग ने सर्वे किया। वह आगे नहीं बढ़ पाया। वहीं, अब पीएमजीएसवाई विभाग को यह हस्तांतरित हुई है लेकिन उनकी ओर से भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सड़क नहीं होने के कारण आज भी बीमार को डंडी-कंडी से ही अस्पताल पहुंचाया जाता है।
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सबसे अधिक नुकसान नकदी फसलों का होता है। गांव में आलू सहित अन्य नकदी फसलों का उत्पादन होता है लेकिन सड़क नहीं होने और भाड़ा आदि अधिक होने के कारण कई बार फसलें गांव में ही सड़ का खराब हो जाती है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन से कई बार लिखित शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता शुभाशीष राणा ने कहा कि सड़क का सर्वे किया गया है। जल्द ही डीपीआर तैयार करने की कार्रवाई होेगी। सड़क निर्माण प्रक्रिया अभी लंबा समय लग सकता है।
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बीमारों को डंडी-कंडी के सहारे पहुंचाया जाता है अस्पताल
उत्तरकाशी। भटवाड़ी विकासखंड का सालू गांव सड़क से नहीं जुड़ने से छात्र-छात्राओं को आज भी स्कूल पहुंचने के लिए करीब छह किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों का कहना है कि बाजार से सामान ले जाने पर ढुलान के कारण उसकी कीमत दोगुनी हो जाती है। सड़क निर्माण के लिए पहले लोनिवि और पीएमजीएसवाई विभाग भी सर्वे तक सीमित रह गया है।
सालू गांव की ग्राम प्रधान अनूपा रावत, नवीन रावत ने बताया कि उनके गांव में सड़क नहीं पहुंचने से आज भी वह आदम युग में जीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण उनके स्कूली बच्चों को करीब छह किमी की घने जंगलों के बीच से पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। इस दौरान जंगली जानवरों का भय बना रहता है।
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कहा कि सड़क के लिए पहले लोक निर्माण विभाग ने सर्वे किया। वह आगे नहीं बढ़ पाया। वहीं, अब पीएमजीएसवाई विभाग को यह हस्तांतरित हुई है लेकिन उनकी ओर से भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सड़क नहीं होने के कारण आज भी बीमार को डंडी-कंडी से ही अस्पताल पहुंचाया जाता है।
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सबसे अधिक नुकसान नकदी फसलों का होता है। गांव में आलू सहित अन्य नकदी फसलों का उत्पादन होता है लेकिन सड़क नहीं होने और भाड़ा आदि अधिक होने के कारण कई बार फसलें गांव में ही सड़ का खराब हो जाती है। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन से कई बार लिखित शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही है। पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता शुभाशीष राणा ने कहा कि सड़क का सर्वे किया गया है। जल्द ही डीपीआर तैयार करने की कार्रवाई होेगी। सड़क निर्माण प्रक्रिया अभी लंबा समय लग सकता है।