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Uttarkashi News: डेढ़ दशक से निष्प्रयोज्य पड़े आवासीय
Thu, 22 Oct 2026 05:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 22 Oct 2026 05:17 PM IST
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भवन, 500 विद्यार्थियों की सुरक्षा पर खतरा
नौगांव (उत्तरकाशी)। दौलतराम रवांल्टा जीआईसी परिसर में शिक्षकों के लिए बनाए गए 16 आवासीय भवन पिछले डेढ़ दशक से निष्प्रयोज्य पड़े हैं। जर्जर हालत में पहुंच चुके भवनों का अब तक ध्वस्तीकरण नहीं हो पाया है जिससे विद्यालय में अध्ययनरत करीब 500 छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी है। हैरानी की बात यह है कि निष्प्रयोज्य घोषित किए जाने के 15 साल बाद भी विभाग भवनों का उपयोग नहीं कर पाया है।
विद्यालय परिसर में प्रधानाचार्य और शिक्षकों के लिए टाइप-टू और टाइप-थ्री श्रेणी के कुल 16 आवासीय सेट बनाए गए थे। वर्ष 2009 में छठे वेतनमान के लागू होने के बाद शिक्षकों ने इन आवासों को खाली कर दिया था। इसके बाद लोनिवि बड़कोट ने वर्ष 2011 में तकनीकी जांच के बाद इन भवनों को निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया था।
तब से ये भवन खाली पड़े हैं लेकिन इनके ध्वस्तीकरण और परिसर के बेहतर उपयोग की दिशा में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। वर्ष 2023-24 में विद्यालय का चयन क्लस्टर श्रेणी में होने के बाद पुराने आवासीय भवनों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर नए भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके बावजूद प्रस्ताव पर अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
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नतीजतन, जर्जर भवनों की स्थिति जस की तस बनी हुई है और विद्यालय परिसर में उपलब्ध भूमि एवं संसाधनों का बेहतर उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। नगर के केंद्र में स्थित इस विद्यालय के निष्प्रयोज्य भवनों को हटाकर नए निर्माण अथवा अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। मुख्य शिक्षाधिकारी अमित कोटियाल का कहना है कि पुराने आवासीय भवनों को डिस्मेंटल कर नए भवन बनाने का प्रस्ताव शासन में स्वीकृति के लिए लंबित है।
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नौगांव (उत्तरकाशी)। दौलतराम रवांल्टा जीआईसी परिसर में शिक्षकों के लिए बनाए गए 16 आवासीय भवन पिछले डेढ़ दशक से निष्प्रयोज्य पड़े हैं। जर्जर हालत में पहुंच चुके भवनों का अब तक ध्वस्तीकरण नहीं हो पाया है जिससे विद्यालय में अध्ययनरत करीब 500 छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी है। हैरानी की बात यह है कि निष्प्रयोज्य घोषित किए जाने के 15 साल बाद भी विभाग भवनों का उपयोग नहीं कर पाया है।
विद्यालय परिसर में प्रधानाचार्य और शिक्षकों के लिए टाइप-टू और टाइप-थ्री श्रेणी के कुल 16 आवासीय सेट बनाए गए थे। वर्ष 2009 में छठे वेतनमान के लागू होने के बाद शिक्षकों ने इन आवासों को खाली कर दिया था। इसके बाद लोनिवि बड़कोट ने वर्ष 2011 में तकनीकी जांच के बाद इन भवनों को निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया था।
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तब से ये भवन खाली पड़े हैं लेकिन इनके ध्वस्तीकरण और परिसर के बेहतर उपयोग की दिशा में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। वर्ष 2023-24 में विद्यालय का चयन क्लस्टर श्रेणी में होने के बाद पुराने आवासीय भवनों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर नए भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। इसके बावजूद प्रस्ताव पर अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
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नतीजतन, जर्जर भवनों की स्थिति जस की तस बनी हुई है और विद्यालय परिसर में उपलब्ध भूमि एवं संसाधनों का बेहतर उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। नगर के केंद्र में स्थित इस विद्यालय के निष्प्रयोज्य भवनों को हटाकर नए निर्माण अथवा अन्य शैक्षणिक जरूरतों के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। मुख्य शिक्षाधिकारी अमित कोटियाल का कहना है कि पुराने आवासीय भवनों को डिस्मेंटल कर नए भवन बनाने का प्रस्ताव शासन में स्वीकृति के लिए लंबित है।