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डूब क्षेत्र में फिर बसने की तैयारी
उत्तरकाशी
Updated Fri, 26 Feb 2016 10:10 PM IST
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आपदा में मनेरी बांध की जोशियाड़ा झील के पानी के रिसाव से उजाड़ हुई जोशियाड़ा बस्ती के डूब क्षेत्र में दोबारा पुनर्निर्माण का सिलसिला शुरू हो गया है। जल विद्युत निगम की ओर से अपनी कालोनी में विस्थापितों को बसाने के बाद यह काम किया जा रहा है। एनजीटी की बंदिश और बांध प्रशासन की ओर से अपने ही नियम कानून की अनदेखी कर एक और आपदा की नींव तैयार करने पर लोग हैरान हैं।
304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना को जब डिजाइन किया गया तो इसके जोशियाड़ा जलाशय के हाईफ्लड लेबिल के भीतर सिर्फ सात निर्माण थे। परियोजना तैयार होने तक यह संख्या 79 पहुंच गई। इस बस्ती का पुनर्वास न होने से वर्ष 2008 में शुरू हुई यह परियोजना अभी तक अपनी स्थापित क्षमता के अनुरूप बिजली उत्पादन नहीं कर सकी है। बाढ़ से पहले डीएम एवं डीजीएम मनेरी बांध ने संयुक्त सार्वजनिक नोटिस जारी करके समुद्र सतह से 1110 मीटर तक नदी के दोनों ओर की बस्ती को डूब क्षेत्र में चिह्नित कर पुनर्वास की कार्रवाई शुरू की, लेकिन यहां से कोई नहीं हटा।
आपदा के बाद डूब क्षेत्र का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ तो निगम ने दस करोड़ की मुआवजा राशि की आंशिक किश्त तथा जमीन देकर 14 परिवारों को अपनी जोशियाड़ा कालोनी में ही बसा दिया, जबकि 18 परिवारों ने शपथ पत्र देकर चिह्नित डूब क्षेत्र में ही रहने की इच्छा जताकर अपने पुराने मकान तोड़ वहीं नए मकान बनाना शुरू कर दिया। हाईफ्लड लेबिल के भीतर कानूनन अवैध निर्माण पर बांध प्रशासन चुप्पी साधे है। इतना ही नहीं जिन परिवारों को कालोनी में विस्थापित किया गया, उनकी छोड़ी गई जमीन का कहीं कुछ अता पता नहीं है। इस जमीन पर फिर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण की कोशिश शुरू हो गई है।
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जोशियाड़ा मोटर पुल के पास बांध की झील के बाहरी हिस्से में दीवार के साथ-साथ सड़क बनाई जाएगी। यहां मरीन ड्राइव बनाया जा सकता है और जोशियाड़ा ग्राम पंचायत को भी कुछ जमीन आवंटित की जा सकती है। प्रभावितों की ओर से स्टांप पेपर पर शपथ देकर यहीं रहने की इच्छा जताने पर ही उन्हें यहां निर्माण की अनुमति दी गई है। - आईएम करासी, डीजीएम जल विद्युत निगम।
जोशियाड़ा डूब क्षेत्र की खाली जमीन पर कई जगह अतिक्रमण हो रहा है। लोनिवि कालोनी पर हुए अवैध कब्जे ग्राम पंचायत ने हटवाए। किसी सुरक्षित स्थान पर ग्राम पंचायत का बहुद्देशीय भवन, खेल मैदान और मरीन ड्राइव का प्रस्ताव जल विद्युत निगम को सौंपा जाएगा। - संतोष कुमार, ग्राम प्रधान जोशियाड़ा।
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304 मेगावाट की मनेरी भाली स्टेज टू परियोजना को जब डिजाइन किया गया तो इसके जोशियाड़ा जलाशय के हाईफ्लड लेबिल के भीतर सिर्फ सात निर्माण थे। परियोजना तैयार होने तक यह संख्या 79 पहुंच गई। इस बस्ती का पुनर्वास न होने से वर्ष 2008 में शुरू हुई यह परियोजना अभी तक अपनी स्थापित क्षमता के अनुरूप बिजली उत्पादन नहीं कर सकी है। बाढ़ से पहले डीएम एवं डीजीएम मनेरी बांध ने संयुक्त सार्वजनिक नोटिस जारी करके समुद्र सतह से 1110 मीटर तक नदी के दोनों ओर की बस्ती को डूब क्षेत्र में चिह्नित कर पुनर्वास की कार्रवाई शुरू की, लेकिन यहां से कोई नहीं हटा।
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आपदा के बाद डूब क्षेत्र का कुछ हिस्सा प्रभावित हुआ तो निगम ने दस करोड़ की मुआवजा राशि की आंशिक किश्त तथा जमीन देकर 14 परिवारों को अपनी जोशियाड़ा कालोनी में ही बसा दिया, जबकि 18 परिवारों ने शपथ पत्र देकर चिह्नित डूब क्षेत्र में ही रहने की इच्छा जताकर अपने पुराने मकान तोड़ वहीं नए मकान बनाना शुरू कर दिया। हाईफ्लड लेबिल के भीतर कानूनन अवैध निर्माण पर बांध प्रशासन चुप्पी साधे है। इतना ही नहीं जिन परिवारों को कालोनी में विस्थापित किया गया, उनकी छोड़ी गई जमीन का कहीं कुछ अता पता नहीं है। इस जमीन पर फिर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण की कोशिश शुरू हो गई है।
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जोशियाड़ा मोटर पुल के पास बांध की झील के बाहरी हिस्से में दीवार के साथ-साथ सड़क बनाई जाएगी। यहां मरीन ड्राइव बनाया जा सकता है और जोशियाड़ा ग्राम पंचायत को भी कुछ जमीन आवंटित की जा सकती है। प्रभावितों की ओर से स्टांप पेपर पर शपथ देकर यहीं रहने की इच्छा जताने पर ही उन्हें यहां निर्माण की अनुमति दी गई है। - आईएम करासी, डीजीएम जल विद्युत निगम।
जोशियाड़ा डूब क्षेत्र की खाली जमीन पर कई जगह अतिक्रमण हो रहा है। लोनिवि कालोनी पर हुए अवैध कब्जे ग्राम पंचायत ने हटवाए। किसी सुरक्षित स्थान पर ग्राम पंचायत का बहुद्देशीय भवन, खेल मैदान और मरीन ड्राइव का प्रस्ताव जल विद्युत निगम को सौंपा जाएगा। - संतोष कुमार, ग्राम प्रधान जोशियाड़ा।