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राजभरा कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Sat, 27 Aug 2016 10:39 PM IST
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Strike
- फोटो : amarujala
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को पीपीपी मोड से हटाने के लिए ग्रामीणों व व्यापारियों ने राजभरा कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन किया। लोगों ने अस्पताल को पूर्व की भांति सरकारी तरीके से संचालित करने की मांग की। साथ ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कंपनी से अस्पताल को हटाने की मांग की।
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नौगांव में सीएचसी की अव्यवस्थाओं पर शनिवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने ढोल दमाऊं के साथ मुख्य बाजार से अस्पताल मुख्यालय तक जुलूस निकाला और अस्पताल को पीपीपी मोड से हटाने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि अस्पताल का निजीकरण होने के बाद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
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अस्पताल में डाक्टर नहीं होने से मरीजों को मामूली बीमारी में भी देहरादून, विकासनगर के चक्कर काटने पड़ते हैं। तीन सालों से पीपीपी मोड में अस्पताल का संचालन कर रही राजभरा कंपनी के कर्मचारी आठ माह से कार्य बहिष्कार पर हैं।
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प्रदर्शनकारियों में पूर्व विधायक राजकुमार, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सकल चंद रावत, जिपंस विमला रावत, व्यापार मंडल अध्यक्ष जगदीश असवाल, प्रकाश असवाल, प्रधान संगठन के अध्यक्ष नयन सिंह बर्तवाल, राम प्रसाद सेमवाल, राजेश रावत, बलदेव चौहान आदि शामिल रहे।
न्यायालय ने सरकार को राजभरा कंपनी को एक और मौका देने के आदेश दिए हैं, लेकिन कंपनी के साथ हुए अनुबंध में कोई बदलाव नहीं किया है। इसलिए कंपनी को पूरी सुविधाओं के साथ ही काम करने का मौका दिया जाएगा।
डा. बचन सिंह रावत, मुख्य चिकित्साधिकारी