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जनक का किरदार निभाते ही गूंजती है किलकारी
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Fri, 23 Sep 2016 10:09 PM IST
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मिथक कहें या सच्चाई उत्तरकाशी के संग्राली गांव की रामलीला में जो भी राजा जनक का किरदार निभाता है उसे संतान प्राप्ति होती है। गांव के लोग प्राय: नि:संतान व्यक्ति को राजा जनक का पात्र बनने के लिए प्रेरित करते हैं। यह सिलसिला दशकों से चलता आ रहा है। इस वर्ष भी शादी के बाद तीन साल से बच्चे की किलकारी के लिए तरस रहे शंभू प्रसाद नैथानी बीते साल रामलीला में राजा जनक का पात्र बने और रविवार 18 सितंबर को घर में बेटी का जन्म हुआ।
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वर्ष 1967 में छानियों में छिल्ले जलाकर संवाद लिखने और पेट्रोमैक्स की रोशनी में शुरू हुई संग्राली गांव की रामलीला भले ही समृद्ध न हो पाई हो, लेकिन राजा जनक के पात्र के साथ जुड़ा मिथक आज भी कायम है। गांव के बुजुर्ग रामकृष्ण भट्ट, सूरजमणि नैथानी बताते हैं कि गांव की रामलीला में सीता के पिता राजा जनक का अभिनय करने वाले व्यक्ति को संतान प्राप्त होती है। शुरूआती वर्षों में ही यह मिथक पुष्ट होने पर गांव में यह परंपरा चली आ रही है कि शादी के बाद नि:संतान रहने वाले व्यक्ति को ही जनक के पात्र के लिए चयनित किया जाता है।
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इन्हें प्राप्त हुआ संतान सुख
उत्तरकाशी। संग्राली गांव के स्व. महिमानंद भट्ट, ज्योति प्रसाद नैथानी, स्व. सुरेशानंद नौटियाल, रुद्रेश्वर प्रसाद भट्ट, लक्ष्मी प्रसाद नैथानी, सूर्यप्रकाश नौटियाल, सुबोध भट्ट, प्रमोद भट्ट, संतोष सेमवाल आदि को शादी के कई सालों बाद भी संतान प्राप्त नहीं हुई। रामलीला में राजा जनक बनने के बाद ये लोग पिता बने। इस मिथक के चलते निकटवर्ती पाटा गांव के हरि सिंह चौहान ने भी संग्राली की रामलीला में जनक का पात्र निभाया और संतान पाई।
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