वीरपुर डुंडा में आयोजित लोसर पर्व घरों पर मंत्र लिखे नए झंडे चढ़ाने और रिंगाली देवी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हो गया। रिंगाली देवी मंदिर परिसर में पारंपरिक वेशभूषा में सजी जाड़ समुदाय की महिलाओं की भजन संध्या और नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। वहीं भोटिया समुदाय के लोगों ने आटे की होली खेलकर जश्न मनाया।
बौद्ध पंचांग के अनुसार नए साल के स्वागत में जाड़ भोटिया समुदाय के लोग लोसर पर्व मनाते हैं। पहले दिन चीड़ के छिलकों से बनी मशालें जलाकर समुदाय के लोगों ने दीपावली मनाई। दूसरे दिन ध्याणियों (बहू-बेटियों) का स्वागत और तीसरे दिन बुजुर्गों का स्वागत किया गया। शनिवार को भोटिया समुदाय के लोगों ने आटे की होली खेलकर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान भोटिया समुदाय के लोगों ने पौराणिक परंपरा के अनुसार घरों पर लगे पुराने झंडे उतारकर मंत्र लिखे नए झंडे बांधे। मौके पर नकुल भोटिया, अशोक खांपा, मदन खांपा, कपूर खांपा व सुभाष खांपा आदि मौजूद रहे। वहीं जाड़ समुदाय के लोग रिंगाली देवी के मंदिर में एकत्र हुए। यहां रिंगाली देवी की पूजा-अर्चना करने के साथ ही हरियाली और प्रसाद चढ़ाया गया। पारंपरिक परिधानों में सजी समुदाय की महिलाओं ने भजन संध्या की प्रस्तुति से माहौल को भक्तिमय बनाया। बाद में समुदाय के लोगों ने रिंगाली देवी की डोली के साथ रांसो एवं तांदी नृत्य कर पारंपरिक संस्कृति की झलक पेश की। कार्यक्रम बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे विश्वनाथ मंदिर के महंत अजय पुरी ने पारंपरिक मेले व त्योहार हमारी समृद्धशाली लोक संस्कृति की विरासत हैं। इनका संरक्षण हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने जाड़ भोटिया समुदाय के लोगों को लोसर पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर सेवकराम भंडारी, पूर्व प्रधान नारायण सिंह नेगी, जसपाल रावत, भवान सिंह राणा, रणजौर भंडारी, एसडीएम बंसीलाल राणा, गोपाल नेगी और गोपाल भंडारी आदि मौजूद रहे।