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Uttarkashi News: रोपाई के बाद बारिश नहीं होने से मुरझाने लगे धान के पौधे
Sat, 20 Jun 2026 04:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 20 Jun 2026 04:37 PM IST
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दिचली क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ी
चिन्यालीसौड़। बारिश नहीं होने से जिले के धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है। रोपाई के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से दिचली क्षेत्र के कवांगढ़ी, गोरण और बगोड़ी के भरती सेरा में धान के खेत सूखने लगे हैं। खेतों में पानी की कमी के कारण रोपे गए पौधे पीले पड़ गए हैं।
बगोड़ी के ग्राम प्रधान देवराज बिष्ट ने बताया कि भरती सेरा में सैकड़ों नाली भूमि पर धान की रोपाई की जा चुकी है लेकिन पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी खत्म होती जा रही है। जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कवां की ग्राम प्रधान मीना थपलियाल ने बताया कि कवांगढ़ी और गोरण क्षेत्र के ऊपरी खेतों में स्थिति और भी गंभीर है।
सिंचाई का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है और खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है। किसानों ने बीज, खाद और मजदूरी पर हजारों खर्च किए हैं लेकिन अब फसल पर संकट मंडरा रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान की फसल सूख सकती है और दोबारा रोपाई की नौबत आ सकती है। इससे खेती की लागत कई गुना बढ़ जाएगी।
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ग्राम प्रधानों और किसानों ने कृषि विभाग से क्षेत्र का सर्वे कर नुकसान का आकलन करने और आवश्यक राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही अस्थायी सिंचाई व्यवस्था के विकल्प तलाशने को भी कहा है। बगोड़ी का भरती सेरा और दिचली क्षेत्र उत्तरकाशी के प्रमुख धान उत्पादक इलाकों में गिने जाते हैं। ऐसे में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
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चिन्यालीसौड़। बारिश नहीं होने से जिले के धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है। रोपाई के बाद पर्याप्त बारिश नहीं होने से दिचली क्षेत्र के कवांगढ़ी, गोरण और बगोड़ी के भरती सेरा में धान के खेत सूखने लगे हैं। खेतों में पानी की कमी के कारण रोपे गए पौधे पीले पड़ गए हैं।
बगोड़ी के ग्राम प्रधान देवराज बिष्ट ने बताया कि भरती सेरा में सैकड़ों नाली भूमि पर धान की रोपाई की जा चुकी है लेकिन पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेतों में नमी खत्म होती जा रही है। जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कवां की ग्राम प्रधान मीना थपलियाल ने बताया कि कवांगढ़ी और गोरण क्षेत्र के ऊपरी खेतों में स्थिति और भी गंभीर है।
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सिंचाई का कोई वैकल्पिक साधन नहीं है और खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है। किसानों ने बीज, खाद और मजदूरी पर हजारों खर्च किए हैं लेकिन अब फसल पर संकट मंडरा रहा है। स्थानीय किसानों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो धान की फसल सूख सकती है और दोबारा रोपाई की नौबत आ सकती है। इससे खेती की लागत कई गुना बढ़ जाएगी।
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ग्राम प्रधानों और किसानों ने कृषि विभाग से क्षेत्र का सर्वे कर नुकसान का आकलन करने और आवश्यक राहत उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही अस्थायी सिंचाई व्यवस्था के विकल्प तलाशने को भी कहा है। बगोड़ी का भरती सेरा और दिचली क्षेत्र उत्तरकाशी के प्रमुख धान उत्पादक इलाकों में गिने जाते हैं। ऐसे में बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।