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गंगा के मायके में एनजीटी के फरमान हवा-हवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
Updated Wed, 08 Jun 2016 10:35 PM IST
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गंगा को प्रदूषण मुक्त करने एवं पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए एनजीटी की ओर से जारी फरमान गंगा के मायके उत्तरकाशी में प्रभावी नहीं हो पा रहे हैं। रोक के बावजूद यहां सीवर की गंदगी गंगा में बहाई जा रही है। कचरा निस्तारण के नाम पर आज भी यहां कूड़े के ढेर जलाए जा रहे हैं।
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भागीरथी से खनन और तटों से सौ मीटर दायरे में धड़ल्ले से निर्माण कार्य जारी हैं। गंगा एवं यमुना नदी के उद्गम वाले उत्तरकाशी जनपद में जिला मुख्यालय को छोड़ कहीं भी सीवर ट्रीटमेंट की योजना नहीं है। यही कारण है कि सीवर की गंदगी प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से गंगा और इसकी सहायक नदियों में बहायी जा रही है। उत्तरकाशी मुख्यालय की सीवर ट्रीटमेंट योजना भी वर्ष 2012-13 की बाढ़ में क्षतिग्रस्त पड़ी होने से सीवर की गंदगी बिना ट्रीटमेंट के गंगा में जा रही है।
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जनपद में रोक के बावजूद गंगा तटों से धड़ल्ले से अवैध खनन जारी है। गंगा तट से सौ मीटर दायरे में निर्माण पर प्रतिबंध पहाड़ के लिहाज से अव्यवहारिक माना जा रहा है। अधिकांश जगह नदी तट से सौ मीटर दायरे से आगे खड़े पहाड़ होने से निर्माण के लिए जगह ही नहीं है। ऐसे में लोग नदी किनारे की अपनी जमीनें छोड़कर अपने घर-दुकानों का निर्माण कहां करें, ऐसी कोई व्यवस्था भी सरकारी तंत्र ने नहीं दी है।
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मुझे उत्तरकाशी में पदभार संभाले कुछ ही दिन हुए हैं। फिलहाल स्थिति की पड़ताल की जा रही है। व्यवहारिक दिक्कतों से शासन को अवगत कराने के साथ ही एनजीटी के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
दीपेंद्र चौधरी, डीएम उत्तरकाशी।